भारत में हाई-एंड मॉडल्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं लोग। (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Yezdi
भारतीय टू-व्हीलर (2W) बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। अब ग्राहक कम पावर वाली मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के बजाय प्रीमियम और हाई-एंड मॉडल्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यस सिक्योरिटीज (Yes Securities) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में 'प्रीमियमाइजेशन' की रफ्तार तेज हो गई है। इससे 125cc से कम क्षमता वाले वाहनों की हिस्सेदारी लगातार गिर रही है।
स्कूटरों का बढ़ता दबदबा
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में स्कूटरों की पैठ 36% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो पहले के 33% के उच्च स्तर को पार कर गई है। अगर इसमें इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के आंकड़ों को भी जोड़ दिया जाए तो यह पैठ 38.4% तक पहुंच जाती है।
स्कूटरों की बिक्री बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
- तेजी से बढ़ता शहरीकरण
- सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्प
- यूपी, बिहार, एमपी और राजस्थान जैसे राज्यों में बढ़ती मांग
- ई-कॉमर्स, डिलीवरी और टू-व्हीलर टैक्सी सेगमेंट में उछाल
प्रीमियम मोटरसाइकिलों की ओर लोगों का झुकाव ज्यादा
सिर्फ स्कूटर ही नहीं, बल्कि मोटरसाइकिलों के मामले में भी ग्राहक अब ज्यादा पावरफुल इंजन की तलाश में हैं। रिपोर्ट बताती है कि 300cc से ज्यादा क्षमता वाली मोटरसाइकिलों का सेगमेंट एक प्रमुख ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है। यस सिक्योरिटीज रिपोर्ट के अनुसार, अपर प्रीमियम सेगमेंट (300cc से ज्यादा) में वॉल्यूम में बड़ी बढ़त देखने को मिलेगी, क्योंकि एक बड़ा ग्राहक वर्ग अब अपने पुराने वाहनों को अपग्रेड कर रहा है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि 125cc से कम क्षमता वाले सेगमेंट में गिरावट जारी रहेगी। बेहतर फीचर्स, बेहतर परफॉरमेंस और बढ़ती आय के कारण भारतीय उपभोक्ता अब 'वैल्यू अपग्रेड' को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह स्ट्रक्चरल बदलाव भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक लंबी अवधि का ट्रेंड बनने जा रहा है।