पैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट की बिक्री में किस तरह का बड़ा बदलाव देखा गया है?
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ग्राहकों की पसंद और कमर्शियल सेगमेंट दोनों में ही गहरा संरचनात्मक बदलाव आया है:
- यूटिलिटी व्हीकल्स (SUV) का दबदबा: वित्तीय वर्ष 2021 (FY21) में कुल पैसेंजर व्हीकल (PV) बिक्री में एसयूवी और क्रॉसओवर की हिस्सेदारी सिर्फ 39 प्रतिशत थी, जो FY25 में उछलकर 65 प्रतिशत हो गई।
- पैसेंजर व्हीकल्स की कंपाउंड ग्रोथ (CAGR): बड़े वाहनों की ओर ग्राहकों के झुकाव से घरेलू पैसेंजर व्हीकल बिक्री 11 प्रतिशत के CAGR से बढ़कर 2.71 मिलियन (27.1 लाख) यूनिट्स से 4.64 मिलियन (46.4 लाख) यूनिट्स हो गई। FY26 में PV बिक्री में सालाना 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- कमर्शियल व्हीकल्स (CV) में MHCVs की बढ़त: इंफ्रास्ट्रक्चर, माइनिंग और लंबी दूरी के माल ढुलाई कार्यों में मांग के कारण मीडियम और हैवी कमर्शियल व्हीकल्स (MHCV) की हिस्सेदारी कुल CV बिक्री में 28 प्रतिशत से बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई। FY26 में कमर्शियल वाहनों की कुल बिक्री में 12.5 प्रतिशत का उछाल आया।
- बिक्री बढ़ने के मुख्य कारण: इस वृद्धि का मुख्य श्रेय जीएसटी 2.0 के तहत मिले टैक्स लाभ और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कटौती से मिली सस्ती फाइनेंसिंग (कम ब्याज दरों) को दिया गया है।
भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री ने निर्यात के मोर्चे पर क्या नया रिकॉर्ड बनाया है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वाहनों की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है:
- पैसेंजर व्हीकल्स का रिकॉर्ड निर्यात: कॉम्पैक्ट कारों और यूटिलिटी वाहनों के दम पर FY25 में पैसेंजर व्हीकल्स का एक्सपोर्ट 17 प्रतिशत CAGR के साथ रिकॉर्ड 7.7 लाख (0.77 मिलियन) यूनिट्स पर पहुंच गया।
- मारुति सुजुकी का धमाकेदार प्रदर्शन: देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने FY26 में अपने निर्यात में 34 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज करते हुए रिकॉर्ड 4.47 लाख यूनिट्स का निर्यात किया।
- ट्रक और बस एक्सपोर्ट के शीर्ष बाजार: भारतीय ट्रकों के निर्यात के लिए सऊदी अरब सबसे बड़े बाजार के रूप में उभरा। जबकि बसों के निर्यात बाजार के तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सबसे आगे रहा।
रुबिक्स डेटा ने इंडस्ट्री की ग्रोथ और सप्लाई चेन जोखिमों पर क्या कहा?
रुबिक्स डेटा साइंसेज के प्रेसिडेंट तुषार भास्कर ने कहा कि बड़े पैमाने पर हो रहा यह विस्तार अपने साथ परिचालन संबंधी नई चुनौतियां भी लेकर आता है।
- सप्लाई चेन का जोखिम: तुषार भास्कर के अनुसार, रिकॉर्ड एक्सपोर्ट और ओईएम (OEM) की क्षमता विस्तार की घोषणाएं उन कंपोनेंट निर्माताओं, डीलरों और लॉजिस्टिक्स पार्टनर्स के भरोसे टिकी हैं, जिनकी बैलेंस शीट इतने तेज बदलावों के लिए तैयार नहीं थी।
- आगामी दशक के विजेता: अगले दशक में वही कंपनियां आगे रहेंगी जो अपनी सप्लाई चेन में 3-स्तर नीचे बन रहे जोखिमों को पहले ही भांपकर सही समय पर निर्णय ले सकेंगी।
भारतीय ऑटो उद्योग के सामने मौजूदा चुनौतियां और भविष्य के विकास के कारक क्या हैं?
तेज विकास के बावजूद, रिपोर्ट में निकट भविष्य की कुछ संवेदनशील चुनौतियों और विकास को गति देने वाले कारकों को चिन्हित किया गया है:
निकट भविष्य के जोखिम/चुनौतियां:
- पश्चिम एशिया में तनाव: पश्चिम एशिया के हालात से जुड़ी सप्लाई चेन की अनिश्चितता।
- कड़े उत्सर्जन मानक: सख्त होते एमिशन नॉर्म्स के कारण अनुपालन पर बढ़ता खर्च।
- कच्चे माल में उतार-चढ़ाव: कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता।
उद्योग के प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर्स:
- सरकारी योजनाएं: केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम।
- एडवांस टेक्नोलॉजी: वाहनों में आधुनिक तकनीकों को अपनाना, जैसे H1 2025 में ADAS की पैठ बढ़कर 8.3 प्रतिशत हो चुकी है।
- ईवी एडॉप्शन: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के तेजी से बढ़ते कदम।