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Iron Ore Imports: दुनिया का दूसरा बड़ा उत्पादक होकर भी भारत क्यों कर रहा लोहे का आयात? कारों पर क्या होगा असर?

Tue, 24 Mar 2026 04:24 PM IST
Suyash Pandey टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

India Iron Ore Imports: मजबूत और सुरक्षित गाड़ियां बनाने के लिए हाई-ग्रेड स्टील की जरूरत होती है। लेकिन भारत में हाई-ग्रेड स्टील बनाने के मुख्य कच्चे माल की कमी के चलते इसका इम्पोर्ट पिछले 7 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इस आर्टिकल में समझिए कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक होने के बावजूद भारत को कच्चा माल विदेशों से क्यों मंगाना पड़ रहा है और ऑटो सेक्टर पर इसका क्या असर होगा।
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आयरन ओर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एक्स
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विस्तार
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ऑटोमोबाइल सेक्टर में कार, बस या कमर्शियल गाड़ियां बनाने के लिए 'हाई-क्वालिटी स्टील' की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। और बेहतरीन स्टील बनाने के लिए जरूरत होती है अच्छे 'आयरन ओर' की।  हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 मार्च को खत्म हो रहे वित्तीय वर्ष में भारत का आयरन ओर इम्पोर्ट पिछले 7 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने वाला है। अब चूंकि गाड़ियों की मजबूती और सेफ्टी सीधे तौर पर स्टील की क्वालिटी पर निर्भर करती है, इसलिए ये समझना जरूरी हो जाता है कि ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इसका क्या असर पड़ेगा?

1. आयात दोगुना होने की उम्मीद

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का आयरन ओर आयात पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 1.2 करोड़ से 1.4 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंचने की उम्मीद है। इस भारी बढ़ोतरी की मुख्य वजह घरेलू बाजार में 'हाई-ग्रेड' यानी बेहतरीन क्वालिटी वाले कच्चे लोहे की कमी होना है। इसके चलते देश की बड़ी स्टील कंपनियों को मजबूरी में इसे विदेशों से मंगाना पड़ रहा है। इस आयात प्रक्रिया में भारत की सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी JSW Steel सबसे आगे है, जो महाराष्ट्र और कर्नाटक में अपने बड़े प्लांट्स की बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए भारी मात्रा में कच्चा लोहा आयात कर रही है।

2. कहां से आ रहा है कच्चा माल?

भारत में आने वाले कुल कच्चे लोहे के स्रोत पर गौर करें तो इसका लगभग 70% हिस्सा मुख्य रूप से ब्राजील और ओमान से आ रहा है। इन पारंपरिक रास्तों के अलावा, एक दिलचस्प बदलाव ऑस्ट्रेलिया के साथ हुई खास डील के रूप में भी दिख रहा है। ऑस्ट्रेलियाई माइनिंग दिग्गज BHP अब अपना 'जिंबलबार फाइन्स' आयरन ओर भारत भेज रही है। दरअसल, चीन में इस विशेष प्रोडक्ट की बिक्री पर बैन होने की वजह से भारत को यह बेहतरीन क्वालिटी वाला कच्चा लोहा काफी अच्छे डिस्काउंट पर मिल रहा है, जो घरेलू स्टील उत्पादन के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

3. क्या भारत खुद कच्चा लोहा नहीं निकालता?

यहां ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत स्वयं पर्याप्त कच्चा लोहा पैदा नहीं करता? हकीकत ये है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 'क्रूड स्टील' उत्पादक है और वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू उत्पादन बढ़कर 30.5 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके बावजूद आयात की मुख्य वजह भारत में निकलने वाले आयरन ओर की 'क्वालिटी' है। दरअसल, भारतीय खदानों से निकलने वाला एक बड़ा हिस्सा 'लो-ग्रेड' का होता है, जिसे देश के कई आधुनिक स्टील प्लांट्स इस्तेमाल नहीं करते। यही वजह है कि भारत अपनी जरूरत के लिए तो हाई-ग्रेड लोहा बाहर से मंगाता है, लेकिन अपने इस लो-ग्रेड आयरन ओर को दूसरे देशों में एक्सपोर्ट कर देता है, जिसका लगभग 85% हिस्सा अकेले चीन को भेजा जाता है।

4. मिडिल ईस्ट के तनाव का असर

भारत पिछले साल से ईरान से सस्ते 'आयरन ओर पेलेट्स' (फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाला प्रोसेस्ड कच्चा लोहा) मंगा रहा था। अप्रैल से फरवरी के बीच यह आयात 6 गुना बढ़ गया था। लेकिन, मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और तनाव की वजह से अब वहां से सप्लाई घटने की आशंका है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त घरेलू स्टॉक है, इसलिए चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है।

ऑटो सेक्टर के लिए इसका क्या मतलब है?

ऑटोमोबाइल कंपनियों को सुरक्षित और मजबूत गाड़ियां बनाने के लिए लगातार अच्छी क्वालिटी वाले स्टील की जरूरत होती है। जेडएसडब्ल्यू (JSW) जैसी स्टील कंपनियों के जरिए हाई-ग्रेड कच्चे लोहे का आयात यह सुनिश्चित करता है कि भारत के ऑटो सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत स्टील की सप्लाई बिना किसी रुकावट के मिलती रहे।

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