40 टन तक माल ढोने की क्षमता, 200 किमी है रेंज
यह हाइड्रोजन पावर्ड ट्रक एक बार फुल टैंक करने पर करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है और इसमें तीन हाइड्रोजन टैंक लगे हुए हैं। यह ट्रक वजन उठाने और दूरी तय करने के मामले में डीजल से चलने वाले भारी ट्रकों के बराबर है। इनमें 40 टन तक माल ढोने की क्षमता है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह ग्रीन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है, जिससे प्रदूषण लगभग शून्य हो जाता है।
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धुआं की जगह पानी और गर्म हवा छोड़ता है ये ट्रक
परंपरागत डीजल ट्रकों से जहां कार्बन डाइऑक्साइड और हानिकारक गैसें निकलती हैं, वहीं यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रक सिर्फ पानी की भाप और गर्म हवा छोड़ता है। यही वजह है कि इसे कमर्शियल ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में सबसे साफ-सुथरे विकल्पों में से एक माना जा रहा है।
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कैसे काम करता है हाइड्रोजन फ्यूल सेल?
हाइड्रोजन फ्यूल सेल एक तरह की इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया के जरिए काम करता है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिससे बिजली बनती है। जब हाइड्रोजन फ्यूल सेल में जाता है, तो उसे प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में बांटा जाता है। प्रोटॉन एक खास मेम्ब्रेन से होकर गुजरते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन बाहर की सर्किट से गुजरते हुए इलेक्ट्रिक करंट बनाते हैं। यही करंट वाहन के मोटर को पावर देता है। इस पूरी प्रक्रिया का बाय-प्रॉडक्ट सिर्फ पानी और थोड़ी गर्मी होती है।
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भारत में नई शुरुआत
हालांकि भारत में यह हाइड्रोजन ट्रक पहली बार खनन क्षेत्र में इस्तेमाल हुआ है। लेकिन पूरी दुनिया में इस तकनीक पर पहले से काम चल रहा है। टोयोटा, ह्यूंदै और होंडा जैसी कंपनियां पहले ही हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर कारें बाजार में उतार चुकी हैं। जैसे टोयोटा मिराई, ह्यूंदै नेक्सो हाइड्रोजन फ्यूल का इस्तेमाल करती हैं।
हालांकि, हाल ही में टाटा मोटर्स ने भारत में पहली बार हाइड्रोजन से चलने वाले हेवी-ड्यूटी ट्रकों का ट्रायल शुरू किया है। यह लॉन्ग-डिस्टेंस कार्गो ट्रांसपोर्टेशन को ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इस ट्रायल को 4 मार्च 2025 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
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