फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Report: भारत में कमर्शियल वाहनों की मांग में जबरदस्त उछाल, वित्त वर्ष 2027 में 12.4 लाख बिक्री का अनुमान

Fri, 24 Apr 2026 05:46 PM IST
Jagriti ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

India Commercial Vehicle Industry 2027: भारत में कमर्शियल वाहन सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है। नई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 का यह 12.4 लाख यूनिट्स के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। जो कि वित्त वर्ष 2019 के पिछले उच्च स्तर को भी पार कर जाएगा।
 
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : adobe stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Commercial Vehicle Sales Record: रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) की रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू बाजार में कमर्शियल वाहनों की मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, इसे कई अहम फैक्टर भी सपोर्ट कर रहे हैं। देशभर में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, पुराने वाहनों की रिप्लेसमेंट डिमांड और जीएसटी दरों में कमी के बाद बेहतर हुई अफॉर्डेबिलिटी इस ग्रोथ को मजबूती दे रहे हैं। हालांकि, निर्यात के मोर्चे पर पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर देखने को मिल सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है।
विज्ञापन


LCV और MHCV सेगमेंट का प्रदर्शन
सेक्टर में एलसीवी यानी की लाइट कमर्शियल व्हीकल का दबदबा बना रहेगा, जो कुल वॉल्यूम का लगभग 60% योगदान देता है। इसमें FY27 में 5–6% ग्रोथ का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण ई-कॉमर्स का विस्तार, लास्ट-माइल डिलीवरी की बढ़ती जरूरत को माना जा रहा है। वहीं, MHCV (मीडियम और हेवी कमर्शियल व्हीकल) सेगमेंट में 4–5% की ग्रोथ देखने को मिल सकती है, जिसे सपोर्ट फ्रेट मूवमेंट में वृद्धि और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च मिलेगा। यहां पर खास बात यह है कि एलसीवी सेगमेंट में 2 टन से ज्यादा GVW वाले वाहनों की हिस्सेदारी 73% तक पहुंच गई है, जो बेहतर पेलोड एफिशिएंसी की ओर बदलाव दिखाती है।

बस सेगमेंट में FY27 में 3–4% की ग्रोथ का अनुमान है। रिप्लेसमेंट डिमांड, सरकारी स्तर पर इलेक्ट्रिक बसों की खरीद से इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिफिकेशन तेजी से बढ़ रहा है, हालांकि इसकी हिस्सेदारी अभी भी सिंगल डिजिट में है।
विज्ञापन


निर्यात पर दबाव, लेकिन मांग बरकरार
निर्यात कुल वॉल्यूम का करीब 8% हिस्सा रखते हैं। FY27 में इनकी ग्रोथ 2–4% रहने की उम्मीद है, जो FY26 के 17% से काफी कम है। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में अस्थिरता, शिपिंग में देरी है। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार डिमांड कमजोर नहीं हुई है, बल्कि डिलीवरी में देरी हो रही है।

इसके अलावा सेक्टर के लिए एक चिंता की बात, उसकी बढ़ती लागत है। स्टील, एल्यूमिनियम और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और नए नियम जैसे ADAS और CAFE नॉर्म्स की वजहों से ऑपरेटिंग मार्जिन FY26 के लगभग 12% से घटकर 40–50 बेसिस पॉइंट कम हो सकता है।

चालू वित्त वर्ष में सेक्टर का कैपेक्स करीब 5,500 करोड़ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के बराबर है। यह निवेश मुख्य रूप से मॉडर्नाइजेशन और रेगुलेटरी कंप्लायंस पर केंद्रित रहेगा। हालांकि ग्रोथ थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन मजबूत कैश फ्लो और बैलेंस शीट के कारण सेक्टर का क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर रहने की उम्मीद है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें