वैकल्पिक ईंधनों ने कैसे रचा नया इतिहास?
इस जून महीने की सबसे बड़ी और दिलचस्प बात यह रही कि देश की कुल कार बिक्री में वैकल्पिक ईंधन से चलने वाली गाड़ियों (CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक) की हिस्सेदारी पहली बार 40 प्रतिशत की ऐतिहासिक सीमा को पार कर 40.35 प्रतिशत पर पहुंच गई। इन पॉइंट्स के जरिए समझिए कि किस सेगमेंट का कितना योगदान रहा:
-
CNG कारों का सबसे बड़ा जलवा (24.33% हिस्सेदारी): कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में सीएनजी (CNG) गाड़ियों का योगदान सबसे ज्यादा 24.33 प्रतिशत रहा। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहकों ने इसे सबसे किफायती विकल्प के रूप में चुना।
-
हाइब्रिड तकनीक को मिला साथ (8.27% हिस्सेदारी): ईंधन की बचत और बेहतर परफॉर्मेंस देने वाली हाइब्रिड (Hybrid) कारों ने भी कुल बिक्री में 8.27 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी दर्ज कराई।
-
इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती रफ्तार (7.75% हिस्सेदारी): पूरी तरह बिजली से चलने वाली यानी प्योर इलेक्ट्रिक कारों (EV) का कुल बिक्री में हिस्सा 7.75 प्रतिशत रहा, जो पर्यावरण के प्रति बढ़ते रुझान को दिखाता है।
अचानक क्यों बढ़ी ग्रीन और क्लीन गाड़ियों की मांग?
ग्राहकों का पारंपरिक गाड़ियों से मोहभंग होने और सीएनजी या इलेक्ट्रिक की तरफ तेजी से कदम बढ़ाने के पीछे कुछ बेहद ठोस कारण रहे हैं:
-
पश्चिम एशिया संकट और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं। इसके चलते भारत सरकार को मई 2026 में कम से कम चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पड़े। इस महंगाई से बचने के लिए लोगों ने वैकल्पिक ईंधनों का रुख किया।
-
इथेनॉल पेट्रोल को लेकर असमंजस: बाजार में इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर बढ़ती भ्रम की स्थिति और अनिश्चितताओं ने भी ग्राहकों को पेट्रोल कारों से दूर कर सीएनजी और ईवी की तरफ मोड़ने का काम किया।
-
सीएनजी कारों में बंपर बुकिंग: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने पिछले महीने जानकारी दी थी कि जब से ईंधन के दामों में बढ़ोतरी हुई है, तब से उनकी सीएनजी कारों की बुकिंग में 40 प्रतिशत का भारी उछाल आया है।