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भारत में ट्रकों के लिए नए सुरक्षा नियम: 2027-28 से अनिवार्य होंगे ऑटो-ब्रेकिंग और फटीग डिटेक्शन सिस्टम

Fri, 13 Feb 2026 06:35 PM IST
सुयश पांडेय ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Advanced Safety Features in Trucks By 2027: भारत सरकार ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 2027-28 से मध्यम और भारी कमर्शियल वाहनों में कई एडवांस सेफ्टी फीचर्स अनिवार्य करने का फैसला किया है। इन नए नियमों के तहत ट्रकों में एडवांस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS), इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), ब्लाइंड स्पॉट इंफॉर्मेशन सिस्टम, लेन डिपार्चर वार्निंग और ड्राइवर की थकान पहचानने वाले सिस्टम लगाए जाएंगे।

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2027 से 2028 के बीच मध्यम और भारी कमर्शियल वाहनों में कई नए और आधुनिक सेफ्टी फीचर्स लगाना अनिवार्य होगा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI
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विस्तार
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भारतीय सड़कों को ज्यादा सुरक्षित बनाने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि 2027 से 2028 के बीच मध्यम और भारी कमर्शियल वाहनों में कई नए और आधुनिक सेफ्टी फीचर्स लगाना अनिवार्य होगा। इन नए नियमों का मकसद सिर्फ ड्राइवर की सुरक्षा बढ़ाना नहीं है बल्कि सड़क पर चलने वाले पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों और अन्य लोगों को भी बड़े वाहनों से होने वाले हादसों से बचाना है। सरकार चाहती है कि ट्रक ज्यादा सुरक्षित बनें और दुर्घटनाओं की संख्या कम हो। नए नियमों के तहत ट्रकों में ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम, ड्राइवर अलर्ट सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल और ड्राइवर की थकान पहचानने वाला सिस्टम जैसे कई आधुनिक फीचर्स लगाए जाएंगे। 

2027 से लागू होंगे नए ब्रेकिंग और स्टेबिलिटी नियम

  • संशोधित ब्रेकिंग मानक (IS 11852: 2019): सरकार ने तय किया है कि 1 अक्तूबर 2027 से ट्रकों में नया ब्रेकिंग स्टैंडर्ड अनिवार्य होगा। पहले ये नियम सिर्फ बसों के लिए थे लेकिन अब ट्रकों पर भी लागू होंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ट्रकों के ब्रेक ठीक से काम करें और जरूरत पड़ने पर वाहन सुरक्षित तरीके से रुक सके।
  • इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (AIS 162): इसके अलावा, इसी तारीख से ट्रकों में इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल सिस्टम (AIS 162) भी लगाना जरूरी होगा। यह सिस्टम वाहन को खासकर मोड़ पर या अचानक ब्रेक लगाने के समय संतुलित रखने में मदद करता है जिससे ट्रक के फिसलने या पलटने का खतरा कम हो जाता है।
  • एडवांस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS): साथ ही एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम भी अनिवार्य होगा। यह एक स्मार्ट सेफ्टी फीचर है जो खतरे की स्थिति अगर ड्राइवर समय पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाता तो अपने-आप ब्रेक लगा देता है। इससे दुर्घटना होने से बचा जा सकता है या टक्कर का असर कम किया जा सकता है।

2028 से ड्राइवर अलर्ट और थकान पहचानने वाला सिस्टम अनिवार्य

1 जनवरी 2028 से ट्रकों में कई नए सुरक्षा और ड्राइवर मदद करने वाले सिस्टम लगाना जरूरी होगा। इनमें ब्लाइंड स्पॉट इंफॉर्मेशन सिस्टम (AIS 186) शामिल है। यह सिस्टम ट्रक के आसपास मौजूद लोगों या वाहनों की जानकारी देता है, खासकर उन जगहों की जो ड्राइवर को सीधे दिखाई नहीं देतीं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा।

  • मूविंग ऑफ इंफॉर्मेशन सिस्टम (AIS 187): इसके अलावा मूविंग ऑफ इंफॉर्मेशन सिस्टम (AIS 187) भी जरूरी होगा। यह सिस्टम ट्रक को चलाने से पहले ड्राइवर को चेतावनी देता है अगर आसपास कोई व्यक्ति या वाहन मौजूद हो। यह पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों की सुरक्षा के लिए बहुत उपयोगी है।
  • ड्राइवर ड्राउजीनेस डिटेक्शन (AIS 184): ट्रकों में ड्राइवर ड्रोसिनेस डिटेक्शन और अलर्ट सिस्टम (AIS 184) भी लगाया जाएगा। यह सिस्टम ड्राइवर की नींद या थकान को पहचानकर तुरंत अलर्ट देगा जिससे ड्राइवर समय रहते सावधान हो सके।
  • लेन डिपार्चर वार्निंग (AIS 188): साथ ही लेन डिपार्चर वार्निंग सिस्टम (AIS 188) भी अनिवार्य होगा। यह सिस्टम ड्राइवर को चेतावनी देकर दुर्घटनाओं से बचाता है ताकि अगर ट्रक अपनी लेन से बाहर जाने लगे तो उसे बचाया जा सके।
  • अनिवार्य AC (1 अक्तूबर, 2025 से): ड्राइवर की थकान कम करने के लिए सरकार ने ट्रक के केबिन में एयर कंडीशनिंग (एसी) भी अनिवार्य कर दी है जो 1 अक्तूबर 2025 से लागू होगा। इससे ड्राइवर को लंबी दूरी की ड्राइविंग में ज्यादा आराम मिलेगा और  ज्यादा सुरक्षित तरीके से वाहन चलाए जा सकेंगे।

विजिबिलिटी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी पर भी सरकार का ध्यान

सरकार ट्रकों को ज्यादा मजबूत और सुरक्षित बनाने पर भी ध्यान दे रही है। इसके लिए मालवाहक वाहनों के केबिन को एक खास स्ट्रेंथ टेस्ट पास करना जरूरी है ताकि हादसे के समय ड्राइवर को बेहतर सुरक्षा मिल सके।

  • रिवर्स पार्किंग अलर्ट सिस्टम: 1 अप्रैल 2020 या उसके बाद बने ट्रकों में कुछ सेफ्टी फीचर्स पहले से ही अनिवार्य कर दिए गए हैं। इनमें रिवर्स पार्किंग अलर्ट सिस्टम शामिल है जो ट्रक को पीछे करते समय ड्राइवर को चेतावनी देता है। इसके अलावा ट्रक की पूरी चौड़ाई में रिफ्लेक्टिव टेप लगाना भी जरूरी है जिससे रात में या कम रोशनी में वाहन आसानी से दिखाई दे सके।
  • रियर और साइड अंडर-रन प्रोटेक्शन डिवाइस: साथ ही रियर अंडर-रन प्रोटेक्शन डिवाइस और साइड अंडर-रन प्रोटेक्शन डिवाइस भी अनिवार्य हैं। ये फीचर्स पीछे या साइड से होने वाली टक्कर के दौरान छोटे वाहनों को ट्रक के नीचे जाने से बचाने में मदद करते हैं जिससे गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है।

ड्राइवर ट्रेनिंग और एक्सीडेंट के बाद इलाज की बेहतर व्यवस्था

सरकार अच्छे और सुरक्षित ड्राइवर तैयार करने के लिए ट्रेनिंग सुविधाओं को तेजी से बढ़ा रही है। इसके लिए देशभर में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (IDTR), रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (RDTC) और ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (DTC) खोले जा रहे हैं।

  • ट्रेनिंग सेंटर: इन ट्रेनिंग सेंटरों में ड्राइवरों को सही और सुरक्षित तरीके से वाहन चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
  • बजट आवंटन: सरकार इन सेंटरों को बनाने और चलाने के लिए आर्थिक मदद भी दे रही है। इसके तहत IDTR के लिए ₹17.25 करोड़, RDTC के लिए ₹5.50 करोड़ और DTC के लिए ₹2.50 करोड़ तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। इससे देशभर में बेहतर ड्राइवर ट्रेनिंग की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
  • सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना

सरकार ने सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद के लिए "कैशलेस ट्रीटमेंट फॉर रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स स्कीम 2025" शुरू की है। इस योजना के तहत दुर्घटना के शिकार लोगों को ₹1.5 लाख तक का इलाज निशुल्क (कैशलेस) मिल सकेगा। यह सुविधा दुर्घटना के बाद सात दिनों तक उपलब्ध रहेगी।

  • तत्काल सहायता: अगर चोट ज्यादा गंभीर नहीं है तो मरीज को 24 घंटे तक जरूरी इलाज मिलेगा। वहीं, गंभीर मामलों में 48 घंटे तक स्थिर करने के लिए इलाज किया जाएगा ताकि मरीज की जान बचाई जा सके और आगे का इलाज सुरक्षित तरीके से हो सके।
  • चुनिंदा अस्पतालों में मिलेगी सुविधा यह सुविधा सरकार द्वारा तय किए गए अस्पतालों में मिलेगी। इस योजना को e-DAR सिस्टम और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सिस्टम के जरिए लागू किया जाएगा। इस योजना का खर्च मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से दिया जाएगा ताकि पीड़ितों को समय पर इलाज मिल सके और उन्हें आर्थिक परेशानी न हो।
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सड़क सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाएंगे नए नियम

सरकार के ये नए सुरक्षा नियम भारत में सड़कों को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद करेंगे। ऑटोमैटिक ब्रेकिंग, ड्राइवर अलर्ट और थकान पहचानने जैसे सिस्टम से दुर्घटनाओं को रोकने में काफी मदद मिल सकती है। इन नई तकनीकों से ड्राइवर को समय पर चेतावनी मिलेगी और जरूरत पड़ने पर वाहन खुद भी प्रतिक्रिया दे सकेगा जिससे हादसों का खतरा कम होगा।  इसके अलावा बेहतर ड्राइवर ट्रेनिंग और कैशलेस इलाज योजना से दुर्घटना होने के बाद ड्राइवर और घायल लोगों को जल्दी और बेहतर मदद मिल सकेगी। कुल मिलाकर ये नियम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।

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