फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CAFE 3 Norms: क्या कैफे 3.0 नियम लागू होने में हो सकती है देरी? कार की कीमतों और उत्सर्जन पर क्या होगा असर?

Fri, 20 Mar 2026 07:28 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में कारों के लिए ईंधन दक्षता के कड़े नियमों को लागू करने की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। केंद्र सरकार 'कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता' (CAFE) मानदंडों के अगले चरण को लागू करने की समय-सीमा को अप्रैल 2027 के बाद तक के लिए टाल सकती है।
विज्ञापन
Car Pollution - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत में कारों के लिए सख्त फ्यूल एफिशिएंसी नियमों (CAFE 3.0) को लागू करने में देरी हो सकती है। पहले इसे अप्रैल 2027 से लागू किया जाना था। लेकिन अब सरकार इस समयसीमा को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है।

विज्ञापन


इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) स्तर पर ऑटोमोबाइल कंपनियों और संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा हो चुकी है। जिससे संकेत मिलता है कि सरकार उद्योग की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है।

आखिर CAFE नियम क्या होते हैं?
कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) (CAFE) नियम किसी एक कार मॉडल पर नहीं, बल्कि कंपनी के पूरे वाहन पोर्टफोलियो के औसत उत्सर्जन पर लागू होते हैं।

इसका मतलब यह है कि:

  • ज्यादा प्रदूषण करने वाली गाड़ियों को संतुलित करने के लिए कंपनियों को

  • ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट, हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक वाहन भी बेचने होते हैं

CAFE 3.0 के तहत प्रस्तावित लक्ष्य:

  • 2027 तक: 88.4 ग्राम CO₂ प्रति किमी

  • 2032 तक: 71.5 ग्राम CO₂ प्रति किमी

इनका मकसद है ईंधन की खपत कम करना और प्रदूषण घटाना।

Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

ऑटो कंपनियां क्यों चिंतित हैं?
नई और सख्त सीमाएं कई कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती हैं।

खासतौर पर:

  • मास-मार्केट कार बनाने वाली कंपनियां जैसे मारुति सुजुकी और टोयोटा

  • जिन्हें बड़े पैमाने पर तकनीकी अपग्रेड और निवेश करना पड़ेगा

अगर कंपनियां तय सीमा पूरी नहीं कर पातीं:

  • भारी जुर्माना देना पड़ सकता है

  • कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं

 

इस मुद्दे पर विवाद क्यों हो रहा है?
ऑटो इंडस्ट्री का कहना है कि इतने कम समय में सख्त नियम लागू करना मुश्किल है।

मुख्य चिंताएं:

  • इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड तकनीक में भारी निवेश की जरूरत

  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह विकसित नहीं

  • ग्राहकों द्वारा ईवी अपनाने की रफ्तार अभी धीमी

इसी वजह से कंपनियां समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रही हैं।

Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

क्या ग्राहकों को इससे कोई फायदा होगा?
अगर CAFE 3.0 में देरी होती है, तो इसका सीधा असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा।

अल्प अवधि में:

  • कारों की कीमतें तुरंत नहीं बढ़ेंगी

  • कंपनियों को बदलाव के लिए ज्यादा समय मिलेगा

लेकिन लंबे समय में:

  • बाजार में ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट और कम प्रदूषण वाली गाड़ियां आएंगी

  • पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़ेगा

 

विज्ञापन

वाहन उद्योग के लिए एक बड़ा बदलाव
CAFE 3.0 नियम भारत के ऑटो सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं।

हालांकि, सरकार और उद्योग के बीच संतुलन बनाना जरूरी है ताकि:

  • पर्यावरण सुरक्षा भी बनी रहे

  • और उद्योग पर अत्यधिक दबाव भी न पड़े

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन नियमों को कब और किस रूप में लागू करती है। 


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें