भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने की दिशा में सरकार और उद्योग द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिर भी कई संभावित खरीदार इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर हिचकिचाहट महसूस करते हैं। Forvis Mazars द्वारा हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में सबसे बड़ी रुकावट रेंज को लेकर चिंता है, जो कि 58% संभावित खरीदारों को EV खरीदने से रोक रही है। यह चिंता तब और बढ़ जाती है जब देखा जाता है कि भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त रूप से विकसित नहीं है।
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भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की हालत खराब
भारत में फरवरी 2024 तक केवल 12,146 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन थे, जो कि देश में मौजूदा इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या को देखते हुए बेहद कम हैं। औसत संख्या को देखें तो, देश में 135 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सिर्फ एक चार्जिंग स्टेशन पर औसतन उपलब्ध है, जबकि अमेरिका और चीन जैसे देशों में यह आंकड़ा एक चार्जिंग स्टेशन पर क्रमश: 20 और 10 इलेक्ट्रिक वाहनों का है। इसके अलावा, भारत में अधिकांश पब्लिक चार्जिंग स्टेशन मेट्रोपोलिटन शहरों में स्थित हैं, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोगों को चार्जिंग की सुविधा नहीं मिलती है।
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चार्जिंग स्टेशन में संचालन की समस्याएँ
मेट्रो शहरों में भी कई चार्जिंग स्टेशन संचालन में समस्याओं का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 25% पब्लिक चार्जिंग स्टेशन अक्सर तकनीकी समस्याओं, सीमित ग्रिड कनेक्टिविटी, या रख-रखाव में कमी के कारण खराब रहते हैं। इसके अतिरिक्त, भारत में चार्जिंग का औसत समय 1.5 से 2 घंटे होता है, जो ग्लोबल स्टैंडर्ड से कहीं ज्यादा है। वैश्विक मानक में फास्ट चार्जिंग के लिए औसतन 30 मिनट से 1 घंटा का समय लिया जाता है। इससे भी अधिक समस्या यह है कि भारत में फास्ट चार्जिंग नेटवर्क का अभाव है, जो इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है।
Electric car EV charging battery at charger station
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नॉर्वे का माॅडल बना दुनिया के लिए सीख
इस स्थिति से निपटने के लिए नॉर्वे एक आदर्श उदाहरण है। नॉर्वे इलेक्ट्रिक वाहनों के अपनाने में सबसे आगे है, जहां EVs की हिस्सेदारी 91.5% है। नॉर्वे ने यह सुनिश्चित किया है कि उपयोगकर्ता कभी भी 50 किलोमीटर से अधिक दूर न हों एक फास्ट चार्जिंग स्टेशन से। इसके परिणामस्वरूप, नॉर्वे में EV का उपयोग तेजी से बढ़ा है, और यहां के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ने इस बढ़ोतरी को समर्थन दिया है।
EV charging station at Sahibabad RRTS
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भारत में अधिकांश EV उपयोगकर्ता (लगभग 90%) घर पर ही चार्जिंग करते हैं, इसलिए आवासीय और व्यावसायिक विकास के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। पावर ग्रिड को मजबूत करने और पब्लिक चार्जिंग के लिए एक मानकीकृत मूल्य निर्धारण मॉडल स्थापित करने की भी आवश्यकता है, ताकि चार्जिंग के समय और लागत में पारदर्शिता को बढ़ाया जा सके।