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भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: हर साल यूरोप भेजी जा सकेंगी 2.5 लाख 'मेड इन इंडिया' कारें, क्या हैं इसके मायने?

Mon, 14 Sep 2026 08:04 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) से भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को यूरोपीय बाजार में कार निर्यात पर बड़ी टैरिफ राहत मिलने का प्रावधान है।
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SUV Car Export - फोटो : Nissan
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विस्तार
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यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच हुए द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को एक बड़ा अवसर मिलने जा रहा है। ईयू द्वारा जारी ड्राफ्ट के अनुसार, भारत में बनी 2.5 लाख पैसेंजर गाड़ियों को हर साल महज 8 प्रतिशत रियायती सीमा शुल्क पर यूरोपीय बाजार में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी। आगे चलकर इस सालाना कोटे को बढ़ाकर 4 लाख गाड़ियों तक किया जाएगा। इस ऐतिहासिक व्यापार वार्ता का समापन 27 जनवरी 2026 को घोषित किया गया था।
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पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड कारों पर सीमा शुल्क में कटौती कैसे काम करेगी?

यह रियायती कोटा सुविधा सीआईएफ (लागत, बीमा और माल भाड़ा) आधार पर 50,000 यूरो तक की कीमत वाली मेड-इन-इंडिया पेट्रोल-डीजल (ICE) और हाइब्रिड (HEV) कारों पर लागू होगी।
समझौता लागू होने के बाद शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कटौती की जाएगी:
  • पहला वर्ष: 8 प्रतिशत रियायती सीमा शुल्क
  • दूसरा वर्ष: घटाकर 6 प्रतिशत
  • तीसरा वर्ष: घटाकर 4 प्रतिशत
  • चौथा वर्ष: घटकर 2 प्रतिशत
  • पांचवां वर्ष: शुल्क पूरी तरह खत्म यानी 0 प्रतिशत
यह सालाना कोटा पहले साल के 2.5 लाख वाहनों से शुरू होकर 10वें साल में बढ़कर 4 लाख वाहन हो जाएगा। निर्धारित कोटे से अधिक निर्यात किए जाने वाले वाहनों पर सामान्य MFN (सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र) शुल्क लागू रहेगा।
 

महंगी और प्रीमियम कारों के लिए ड्यूटी में क्या प्रावधान हैं?

50,000 यूरो से अधिक कीमत वाली लग्जरी कारों के लिए कोई कोटा-आधारित छूट नहीं रखी गई है। हालांकि, इस श्रेणी के वाहनों पर आयात शुल्क को समझौते के लागू होने वाले पहले साल के 8 प्रतिशत से घटाकर 10वें साल तक शून्य (0%) कर दिया जाएगा। इस बहुप्रतीक्षित समझौते पर इस साल के आखिर तक हस्ताक्षर होने और अगले साल से इसके लागू होने की संभावना है।
 

इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों के लिए क्या नियम तय किए गए हैं?

बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (BEV), प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) और अन्य नई तकनीकों से लैस वाहनों के लिए एक अलग 'टैरिफ रेट कोटा' तय किया गया है, जिसकी शुरुआत समझौते के 5वें साल से होगी:
  • 40,000 यूरो तक की ईवी: 5वें साल से 27,500 वाहनों के लिए 8 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। यह कोटा 9वें साल में 60,500 और 14वें साल तक 1,25,000 वाहन हो जाएगा। 9वें साल से इस पर आयात शुल्क पूरी तरह शून्य हो जाएगा।
  • 40,000 से 60,000 यूरो तक की ईवी: 5वें साल से सालाना 16,250 वाहनों के कोटे पर 8% ड्यूटी लगेगी, जिसे 14वें साल तक बढ़ाकर 75,000 वाहन किया जाएगा और टैक्स शून्य कर दिया जाएगा।
  • 60,000 यूरो से अधिक की लक्जरी ईवी: 5वें साल से 6,250 वाहनों के लिए 8% शुल्क लागू होगा, जो 14वें साल तक बढ़कर 25,000 वाहन हो जाएगा। 9वें साल से इस पर से भी शुल्क खत्म कर दिया जाएगा।
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CIF (लागत, बीमा और माल ढुलाई) का गणित क्या है?

इस पूरे समझौते में वाहनों की कीमत का मूल्यांकन सीआईएफ (CIF) आधार पर किया जा रहा है। इसमें कार की वास्तविक खरीद कीमत, यूरोपीय संघ के बंदरगाह तक भेजने का शिपिंग/फ्रेट खर्च और रास्ते का बीमा का कुल योग शामिल है।
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