पेट्रोल-डीजल और हाइब्रिड कारों पर सीमा शुल्क में कटौती कैसे काम करेगी?
यह रियायती कोटा सुविधा सीआईएफ (लागत, बीमा और माल भाड़ा) आधार पर 50,000 यूरो तक की कीमत वाली मेड-इन-इंडिया पेट्रोल-डीजल (ICE) और हाइब्रिड (HEV) कारों पर लागू होगी।
समझौता लागू होने के बाद शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कटौती की जाएगी:
- पहला वर्ष: 8 प्रतिशत रियायती सीमा शुल्क
- दूसरा वर्ष: घटाकर 6 प्रतिशत
- तीसरा वर्ष: घटाकर 4 प्रतिशत
- चौथा वर्ष: घटकर 2 प्रतिशत
- पांचवां वर्ष: शुल्क पूरी तरह खत्म यानी 0 प्रतिशत
यह सालाना कोटा पहले साल के 2.5 लाख वाहनों से शुरू होकर 10वें साल में बढ़कर 4 लाख वाहन हो जाएगा। निर्धारित कोटे से अधिक निर्यात किए जाने वाले वाहनों पर सामान्य MFN (सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र) शुल्क लागू रहेगा।
इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों के लिए क्या नियम तय किए गए हैं?
बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (BEV), प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) और अन्य नई तकनीकों से लैस वाहनों के लिए एक अलग 'टैरिफ रेट कोटा' तय किया गया है, जिसकी शुरुआत समझौते के 5वें साल से होगी:
- 40,000 यूरो तक की ईवी: 5वें साल से 27,500 वाहनों के लिए 8 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। यह कोटा 9वें साल में 60,500 और 14वें साल तक 1,25,000 वाहन हो जाएगा। 9वें साल से इस पर आयात शुल्क पूरी तरह शून्य हो जाएगा।
- 40,000 से 60,000 यूरो तक की ईवी: 5वें साल से सालाना 16,250 वाहनों के कोटे पर 8% ड्यूटी लगेगी, जिसे 14वें साल तक बढ़ाकर 75,000 वाहन किया जाएगा और टैक्स शून्य कर दिया जाएगा।
- 60,000 यूरो से अधिक की लक्जरी ईवी: 5वें साल से 6,250 वाहनों के लिए 8% शुल्क लागू होगा, जो 14वें साल तक बढ़कर 25,000 वाहन हो जाएगा। 9वें साल से इस पर से भी शुल्क खत्म कर दिया जाएगा।