भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) की मांग तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) में ही देश में 15 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स रजिस्टर्ड हो चुके हैं। यह संख्या पूरे 2025 में हुई कुल बिक्री से भी अधिक है। वाहन रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों को बिक्री का प्रॉक्सी माना जाता है। इनके अनुसार सितंबर में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन महीने-दर-महीने 7.7 प्रतिशत बढ़कर 1.97 लाख यूनिट हो गए। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कुल रजिस्ट्रेशन 15.61 लाख यूनिट रहे।
सितंबर में किस मॉडल की सबसे ज्यादा बिक्री हुई?
प्रीमियम से मास-मार्केट तक पहुंचा फोकस
जानकारों का कहना है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर की ग्रोथ सिर्फ मांग बढ़ने की वजह से नहीं हुई है। कंपनियां भी अपने ग्राहक आधार को तेजी से बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। शुरुआत में कई इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों का फोकस प्रीमियम कीमत वाले और परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड इलेक्ट्रिक स्कूटर्स पर था। अब कई निर्माता मास-मार्केट और फैमिली स्कूटर सेगमेंट में भी उतर रहे हैं। इस बदलाव का मकसद इलेक्ट्रिक स्कूटर्स को ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाना है।
बड़े ऑटोमेकर्स की पकड़ और मजबूत
छोटे प्लेयर्स भी बढ़ा रहे हैं हिस्सेदारी
ईवी पेनिट्रेशन में भी तेज बढ़ोतरी
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार, ईवी पेनिट्रेशन छह महीने से भी कम समय में 7 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया है। उनके मुताबिक, यह बाजार में मौजूद बड़े अवसर और तेजी से बढ़ती मांग का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि कंपनी को मांग बढ़ने के साथ तैयार रहने के लिए अपनी वर्किंग कैपिटल और प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ानी होगी। इसका मकसद आने वाली मांग को पूरा करने के साथ मौजूदा मांग को भी पूरा करना है।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों में फंडिंग की होड़