इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश इतना अहम क्यों है?
गडकरी के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर में किया गया हर 1 रुपये का निवेश अर्थव्यवस्था में 3 रुपये की गतिविधि पैदा करता है।
यानी ज्यादा निवेश से देश की आर्थिक वृद्धि को तेज किया जा सकता है।
क्या कोई उदाहरण है जहां हाईवे ने बड़ा असर डाला?
हां, द्वारका एक्सप्रेसवे इसका बड़ा उदाहरण है।
जहां पहले जंगल था, वहां अब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रियल एस्टेट निवेश आ चुका है।
आगे कौन-कौन से नए प्रोजेक्ट्स आने वाले हैं?
सरकार अगले कुछ हफ्तों में पुणे के आसपास 40,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स शुरू करने जा रही है, जिनमें शामिल हैं:
इसके अलावा, मुंबई-बंगलूरू एक्सप्रेसवे की योजना भी है। जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा समय घटकर करीब 5 घंटे रह जाएगा।
मुंबई-गोवा हाईवे में देरी क्यों हुई?
इस प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण की समस्याओं के कारण देरी हुई।
हालांकि अब 93 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अगले दो महीनों में निर्माण पूरा होने की उम्मीद है।
क्या सड़क निर्माण की रफ्तार कम हुई है?
हां, पहले जहां 40 किमी प्रति दिन सड़क बन रही थी, अब यह घटकर 32-34 किमी प्रतिदिन रह गई है।
सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 60 किमी प्रतिदिन करना है।
टोल सिस्टम में क्या बदलाव होने वाले हैं?
सरकार साल के आखिर तक 900 टोल प्लाजा को मल्टी-लेन फ्री-फ्लो सिस्टम में बदलने की योजना बना रही है।
इसके लिए जल्द ही 105 टेंडर जारी किए जाएंगे।
क्या टेक्नोलॉजी से कोई बचत हो रही है?
हां, टोल प्लाजा पर नई तकनीक के इस्तेमाल से सरकार हर साल 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत कर रही है, क्योंकि ऑपरेशन लागत कम हो गई है।
हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश
भारत के पास हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश करने की क्षमता है, लेकिन असली चुनौती इसे तेजी से लागू करने की है।
अगर खर्च की रफ्तार बढ़ती है, तो यह देश की आर्थिक ग्रोथ को नई गति दे सकता है।