भारतीय ऑटो बाजार के लिए सितंबर 2026 का महीना काफी अच्छा रहा। कारों और एसयूवी से लेकर दोपहिया और तिपहिया वाहनों तक की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, सिंतबर में पैसेंजर व्हीकल डिस्पैच सालाना आधार पर 21.8% बढ़कर 4,54,574 गाड़ियों पर पहुंच गया। जबकि सितंबर 2025 में यह आंकड़ा 3,73,347 था।
दोपहिया वाहनों के डिस्पैच में भी 13.5% की बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 24,63,103 पर पहुंच गया। वहीं, तिपहिया वाहनों के डिस्पैच 16% बढ़कर 98,162 रहे। सितंबर का यह प्रदर्शन ऑटो इंडस्ट्री की मजबूत दूसरी तिमाही के बाद आया है, जिसमें पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल, दोपहिया और तिपहिया सेगमेंट ने अब तक की सबसे ज्यादा दूसरी तिमाही की बिक्री दर्ज की।
सितंबर में किस सेगमेंट की बिक्री कितनी बढ़ी?
सियाम के आंकड़ों के अनुसा, सितंबर 2026 में तीन प्रमुख वाहन श्रेणियों में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- पैसेंजर व्हीकल: डिस्पैच 21.8% बढ़कर 4,54,574 रहे, जबकि सितंबर 2025 में यह आंकड़ा 3,73,347 था।
- दोपहिया वाहन: डिस्पैच 13.5% बढ़कर 24,63,103 रहे। पिछले साल इसी महीने में यह संख्या 21,70,100 थी।
- तिपहिया वाहन: डिस्पैच 16% बढ़कर 98,162 रहे, जबकि सितंबर 2025 में यह आंकड़ा 84,635 था।
- यहां डिस्पैच का मतलब वाहन निर्माता कंपनियों से डीलरों तक भेजी गई गाड़ियों से है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर ग्राहकों को हुई खुदरा बिक्री के बराबर नहीं होता।
दूसरी तिमाही में पैसेंजर व्हीकल बिक्री 30.7% बढ़ी
- वित्त वर्ष 2026-27 की बात करें तो, दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान पैसेंजर व्हीकल की बिक्री 30.7% बढ़कर 13,60,687 गाड़ियों पर पहुंच गई है। पिछले साल के मुकाबले बात करें तो यह आंकड़ा काफी मजबूत माना जा रहा है। इस दौरान यूटिलिटी व्हीकल सेगमेंट का दबदबा बना रहा। कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 68% रही। एसयूवी और अन्य यूटिलिटी व्हीकल की मांग ने पूरे सेगमेंट की बढ़त में अहम भूमिका निभाई।
- वहीं, तिमाही के दौरान अलग-अलग श्रेणियों का प्रदर्शन शानदार रहा। यूटिलिटी व्हीकल सेगमेंट में बिक्री 34.2% बढ़कर 9,19,068 रही। पैसेंजर कार की बिक्री 24.9% बढ़कर 3,98,631 रही और वैन की बिक्री 15.3% बढ़कर 42,988 रही।
- सियाम के रिपोर्ट के अनुसार, इन आंकड़ों से पता चलता है कि SUV और अन्य यूटिलिटी व्हीकल की मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि, पैसेंजर कार और वैन सेगमेंट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जीएसटी 2.0 और मांग ने ऑटो बाजार को दिया सहारा
SIAM के प्रेसिडेंट शेनू अग्रवाल का कहना है कि GST 2.0 के बाद बेहतर होती अफोर्डेबिलिटी, मजबूत ग्रामीण और शहरी मांग, स्वस्थ फ्रेट मूवमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों और रिप्लेसमेंट साइकिल ने सभी सेगमेंट में इस शानदार प्रदर्शन को जोरदार समर्थन दिया है।
इन कारकों का असर अलग-अलग वाहन श्रेणियों में देखने को मिला। जहां पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में बढ़ोतरी हुई, वहीं दोपहिया और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट ने भी तिमाही के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया।
दोपहिया वाहनों में स्कूटर सेगमेंट सबसे आगे
जुलाई-सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही में दोपहिया वाहनों की बिक्री 15.2% बढ़कर 64.33 लाख रही। इस बढ़ोतरी में स्कूटर सेगमेंट की बड़ी वजह रही।
स्कूटर की बिक्री 27.7% बढ़कर 26.61 लाख रही। यह बढ़ोतरी दोपहिया बाजार में स्कूटरों की मजबूत मांग को दिखाती है।
कमर्शियल व्हीकल की बिक्री में 28.7% की बढ़ोतरी
- कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी दूसरी तिमाही के दौरान मजबूत बढ़त दर्ज की गई। जुलाई-सितंबर 2026 में इन वाहनों की बिक्री 28.7% बढ़कर 3,09,063 रही। इस दौरान मीडियम और हेवी कमर्शियल व्हीकल की बिक्री में 37% की बढ़ोतरी हुई, जबकि लाइट कमर्शियल व्हीकल की बिक्री 23.8% बढ़ी।
- सियाम ने इस प्रदर्शन को इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, मजबूत माल ढुलाई, पुराने ट्रक और बसों को बदलने तथा लॉजिस्टिक्स फ्लीट के विस्तार से जोड़ा। सड़क निर्माण और माल परिवहन जैसी गतिविधियों में तेजी आने से ट्रक, बस और अन्य कमर्शियल वाहनों की मांग को सहारा मिल सकता है।
वाहन निर्यात में भी बढ़ोतरी, लेकिन पैसेंजर व्हीकल पीछे
घरेलू बाजार में बिक्री के साथ वाहन निर्यात के आंकड़ों में भी कई सेगमेंट ने मजबूत प्रदर्शन किया। हालांकि, पैसेंजर व्हीकल के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।
- दोपहिया वाहन: निर्यात रिकॉर्ड 16.5 लाख रहा, जो 27.7% की बढ़ोतरी है।
- तिपहिया वाहन: निर्यात 1.6 लाख रहा, जिसमें 30.4% की वृद्धि दर्ज की गई है।
- कमर्शियल व्हीकल: निर्यात 72.5% बढ़कर 41हजार से भी अधिक रहा।
- पैसेंजर व्हीकल: निर्यात 5.2% घटकर 2.29 लाख रहा।
पैसेंजर व्हीकल में क्यों हुई गिरावट?
पैसेंजर व्हीकल के निर्यात में गिरावट की वजह वेस्ट एशिया में संकट से जुड़ी लॉजिस्टिक्स चुनौतियों को बताया जा रहा है। इससे साफ है कि घरेलू बाजार में मजबूत मांग के बावजूद अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां वाहन कंपनियों के निर्यात प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।
आगे कैसा रह सकता है ऑटो बाजार का प्रदर्शन?
- SIAM के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में भी ऑटोमोबाइल उद्योग में सकारात्मक वृद्धि जारी रह सकती है। हालांकि, पिछले साल की तुलना में ऊंचे बेस की वजह से बिक्री में बढ़ोतरी की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है।
- पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में नए मॉडल लॉन्च और त्योहारी सीजन से मांग को सहारा मिलने की उम्मीद है। त्योहारी अवधि में कारों और SUV की खरीद बढ़ने से कंपनियों को फायदा हो सकता है। इसके बावजूद, उद्योग महंगाई, संभावित ब्याज दर वृद्धि और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर रखे हुए है। इनका असर ग्राहकों की खरीद क्षमता, वाहन फाइनेंस की लागत और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।