पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है। लेकिन, भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और वाहन खरीदारों के लिए एक राहत की खबर है। भारी उद्योग मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को LPG की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि सप्लाई चेन पूरी तरह से सुरक्षित है। भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव, हनीफ कुरैशी ने बताया कि सरकार ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) और पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ मिलकर हालात पर लगातार नजर रख रही है ताकि गैस की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।
दरअसल, भारत का 90% LPG आयात 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के रास्ते होता है। पश्चिम एशिया में चल रहे विवाद के कारण इस रास्ते पर यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे गैस सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।
LPG का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल के पार्ट्स बनाने वाली फैक्ट्रियों में बड़े पैमाने पर होता है। भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव, हनीफ कुरेशी ने बताया कि सरकार ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) और अन्य इंडस्ट्री संगठनों के साथ लगातार संपर्क में है। पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गैस की सप्लाई में कोई रुकावट न आए। अब तक किसी भी गंभीर कमी की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने आश्वस्त किया है कि सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि नायरा एनर्जी के शटडाउन के बावजूद देश में LPG का उत्पादन बढ़ाकर 45 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया है, ताकि सप्लाई चेन प्रभावित न हो। भारत ने अब अपनी रणनीतियों में भी बदलाव किया है। हम अब कच्चे तेल के लिए केवल मिडिल-ईस्ट पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि अन्य देशों के साथ नए करार कर तेल के स्रोतों का विविधीकरण कर चुके हैं।
ऑटो सेक्टर के लिए एक और सकारात्मक खबर यह है कि मार्च महीने में वाहनों के प्रोडक्शन में लगभग 15 से 16% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका मतलब है कि सप्लाई चेन की चिंताओं के बावजूद इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है।
शिपिंग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने समुद्री मार्ग की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान में 15 भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं। इन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए मंत्रालय हर संभव कोशिश कर रहा है। हालांकि, इन चुनौतियों के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। 'जग विक्रम' नाम का एक भारतीय LPG टैंकर, जो अपने साथ 20,400 मीट्रिक टन गैस लेकर आ रहा है, 14 अप्रैल को गुजरात के कांडला पोर्ट पर पहुंचने की उम्मीद है। इस खेप के आने से घरेलू और औद्योगिक गैस की उपलब्धता को और मजबूती मिलेगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के इरादे से सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी PM E-DRIVE योजना के तहत कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जो ग्राहकों और निर्माताओं दोनों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं। योजना के नए अपडेट के अनुसार, ई-रिक्शा (थ्री-व्हीलर) पर मिलने वाली सब्सिडी की समयसीमा को अब 2 साल के लिए और बढ़ा दिया गया है, जिसका लाभ अब मार्च 2028 तक उठाया जा सकेगा। वहीं, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदारों के लिए भी अच्छी खबर है क्योंकि इन पर मिलने वाली सब्सिडी की अवधि को 3 महीने विस्तार देते हुए अब 31 जुलाई 2026 तक कर दिया गया है।
इसके साथ ही, सरकार ने इलेक्ट्रिक ट्रक और बस निर्माताओं को भी बड़ी राहत दी है। मध्य पूर्व के मौजूदा संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं को देखते हुए, वाहनों में स्थानीय पुर्जे इस्तेमाल करने (PMP नॉर्म्स) की डेडलाइन को 6 महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। अब कंपनियों के पास अपनी उत्पादन प्रक्रिया को इन नियमों के अनुरूप ढालने के लिए 1 सितंबर 2026 तक का समय होगा।
भारत ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) मिलाने का बड़ा लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया है। अब इंडस्ट्री E20 से लेकर E85 तक के मिश्रण पर चलने वाले 'फ्लेक्स-फ्यूल' मॉडल पेश कर रही है, जिससे गाड़ियों की परफॉरमेंस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने ₹7,280 करोड़ की एक नई योजना पेश की है। इसका मकसद देश में ही 'रेयर अर्थ पर्मानेंट मैग्नेट' (जो ईवी मोटर्स के लिए बहुत जरूरी होते हैं) का उत्पादन शुरू करना है। इसके लिए 7 अप्रैल को हुई एक मीटिंग में 25 से ज्यादा कंपनियों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है।