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ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव: पेट्रोल में और बढ़ेगी इथेनॉल की मात्रा, BIS ने E22-E30 फ्यूल को दी हरी झंडी

Wed, 20 May 2026 12:38 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

E20 Fuel India: भारत अब ग्रीन मोबिलिटी और साफ ईंधन की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा चुका है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड यानी BIS ने आधिकारिक तौर पर E22, E25, E27 और E30 जैसे हाई-इथेनॉल पेट्रोल ब्लेंड्स के लिए नए फ्यूल स्टैंडर्ड्स को मंजूरी दे दी है। अब तक देश में मुख्य रूप से E20 पेट्रोल का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसमें 20% इथेनॉल मिलाया जाता है। लेकिन अब नए मानकों के बाद ज्यादा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को भी औपचारिक स्वीकृति मिल गई है।

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Ethanol Blending - फोटो : AI
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विस्तार
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भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से ग्रीन एनर्जी और साफ ईंधन की तरफ बढ़ रहा है। अभी तक हम E20 (यानी पेट्रोल में 20% इथेनॉल) का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन अब देश इससे एक कदम और आगे जा रहा है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने ज्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल यानी कि E22, E25, E27 और E30 के लिए आधिकारिक स्टैंडर्ड तय कर दिए हैं। आसान भाषा में कहें तो अब हमारी गाड़ियों के लिए ऐसे पेट्रोल को औपचारिक मंजूरी मिल गई है जिसमें इथेनॉल की मात्रा ज्यादा होगी।

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नए अपडेट की मुख्य बातें

इस अपडेट के मुख्य पहलुओं को समझें तो 15 मई 2026 को जारी हुए आधिकारिक नोटिफिकेशन के जरिए BIS ने पेट्रोल में हाई इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए नए मानकों को हरी झंडी दे दी है। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण, दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

इससे न केवल भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी। बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी और घरेलू चीनी व बायोफ्यूल इंडस्ट्री को एक बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। विशेष रूप से E25 फ्यूल स्टैंडर्ड पर दिए गए फोकस से बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त चीनी और इथेनॉल उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग करना संभव हो सकेगा।

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इंडस्ट्री ने क्या कहा?

ऑल इंडिया डिस्टलरी एसोसिएशन (AIDA) ने सरकार के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है। AIDA के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने इसे एक बहुत ही सही समय पर लिया गया दूरदर्शी कदम बताया है। उनका मानना है कि यह केवल एक तकनीकी घोषणा नहीं है। बल्कि देश की एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है।


फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) ऑटोमोबाइल सेक्टर का भविष्य

एक्सपर्ट्स का मानना है कि E30 तक पहुंचना केवल एक शुरुआत भर है। असली लक्ष्य देश को E85 और E100 (जिसमें 85% से 100% तक इथेनॉल का इस्तेमाल होगा) जैसे हाई-इथेनॉल फ्यूल की ओर ले जाना है। इस बड़े ऊर्जा बदलाव में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां सबसे अहम भूमिका निभाएंगी। ये ऐसी तकनीक से लैस गाड़ियां होती हैं, जिनका इंजन अलग-अलग अनुपात में इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर बिना किसी परेशानी के चलने में सक्षम होता है।


नतीजा

BIS के इन नए स्टैंडर्ड्स से अब ऑटोमोबाइल कंपनियों और तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को भविष्य की योजनाओं के लिए एक स्पष्ट और मजबूत दिशा-निर्देश मिल गया है। यह फैसला संकेत देता है कि आने वाले समय में भारत की सड़कों पर इथेनॉल-आधारित ईको-फ्रेंडली वाहनों की संख्या में बड़ी वृद्धि होगी। ये न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता को भी नई रफ्तार देगा।

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