भारत के वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और जवाबदेही को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) और डेमलर इंडिया कमर्शियल वाहन ने मिलकर एक यूनिवर्सल ड्राइवर रेटिंग सिस्टम विकसित करने के लिए साझेदारी की है। यह पहल देशभर में एक साझा, डेटा-आधारित मानक तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
समझौते के साथ औपचारिक शुरुआत
यह सहयोग 2 फरवरी 2026 को चेन्नई में हस्ताक्षरित एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) के जरिए औपचारिक हुआ। इसका उद्देश्य ऐसा ड्राइवर मूल्यांकन ढांचा बनाना है, जो वाणिज्यिक चालकों के प्रदर्शन, सुरक्षा और व्यवहार का निष्पक्ष आकलन कर सके। और जिसे बीमा, रोजगार सत्यापन तथा क्रेडेंशियल जांच में एक साझा संदर्भ के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
क्यों जरूरी है ड्राइवर रेटिंग सिस्टम?
भारत में ट्रक और अन्य वाणिज्यिक वाहनों के चालकों की निगरानी आज भी असमान नियमों और कमजोर प्रवर्तन के चलते चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
नतीजतन, ड्राइविंग स्टैंडर्ड अलग-अलग जगहों पर अलग हैं और जवाबदेही सीमित रहती है। नया रेटिंग सिस्टम इसी कमी को दूर करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
'ड्राइवरों के अच्छे काम का आधार'
इस परियोजना का समन्वय कर रहे प्रो. गीता कृष्णन रामदुरई ने कहा, "ट्रक और ट्रक ड्राइवर हमारे देश की रीढ़ हैं। यह परियोजना उनके अच्छे काम को पहचान देने वाला आधार बनेगी। यह सिस्टम सुरक्षित ड्राइविंग को प्रोत्साहित करेगा और जोखिम भरे व्यवहार को सुधारने में मदद करेगा। जिससे जान, समय और पैसा, तीनों की बचत होगी।"
IIT Madras
- फोटो : ANI
टेक्नोलॉजी से होगा निष्पक्ष आकलन
प्रस्तावित ड्राइवर रेटिंग सिस्टम स्मार्टफोन-आधारित इनपुट्स और सेंसर डेटा के जरिए काम करेगा।
इसके तहत ड्राइविंग व्यवहार का लगातार और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही, इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह देशव्यापी स्तर पर स्केल किया जा सके। यानी यह एक तरह की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका निभा सकता है।
शिक्षा-उद्योग साझेदारी की मिसाल
आईआईटी मद्रास के डीन (एलुमनी और कॉर्पोरेट रिलेशंस) प्रो. अश्विन महालिंगम ने कहा कि संस्थान लंबे समय से रोड सेफ्टी और मोबिलिटी पर काम कर रहा है।
उनके मुताबिक, "डेमलर के साथ यह साझेदारी दिखाती है कि कैसे शिक्षा और उद्योग मिलकर रिसर्च को जमीन पर उतरने लायक, बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधान में बदल सकते हैं।"
सभी स्टेकहोल्डर्स को मिलेगा फायदा
इस यूनिवर्सल ड्राइवर रेटिंग सिस्टम से:
- ड्राइवरों को सुरक्षित व्यवहार के लिए पहचान और बेहतर रोजगार अवसर
- फ्लीट ऑपरेटर्स को प्रदर्शन निगरानी और अनुपालन में मदद
- शिपर्स को बेहतर डिलीवरी विजिबिलिटी
- और सरकार को नीति निर्माण के लिए गुमनाम, तथ्य-आधारित डेटा
जैसे फायदे मिल सकते हैं।
जवाबदेह और सुरक्षित परिवहन की ओर कदम
अगर यह पहल बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो यह भारत में वाणिज्यिक मोबिलिटी को ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षा-केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। जहां शिक्षा और उद्योग की साझेदारी से सिस्टम-लेवल बदलाव संभव हो सकेगा।