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अगर आप टोल प्लाजा पर कैश में करते हैं भुगतान, तो चुकाना पड़ सकता है ‘जुर्माना’

Wed, 03 Jul 2019 01:33 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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टोल प्लाजा
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अब टोल प्लाजा पर नकद भुगतान करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। आप सोच रहे होंगे कि कैश पेमेंट पर्स पर कैसे भारी पड़ सकता है। असल में सरकार टोल प्लाजा पर लगने वाली भीड़ को कम करने के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है। अगर सरकार की यह योजना परवान चढ़ी, तो आपकी जेब पर 10 से 20 प्रतिशत पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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लंबी लाइनों से मिलेगा आराम

सरकार ने टोल प्लाजा पर वाहनों की लग रही लंबी-लंबी लाइनों को कम करने के लिए एक नई योजना तैयार की है। इस योजना के तहत मेट्रो सिटीज में टोल प्लाजा पर नकद भुगतान करने पर सरचार्ज लगाया जा सकता है। यह सरचार्ज 10 से 20 प्रतिशत तक हो सकता है। सरकार चाहती है कि इस लोगों की आदत में सुधार होगा और फास्टैग्स के जरिए इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग को बढ़ावा मिलेगा।
 

खत्म हो सकती है छूट

असल में टोल प्लाजा पर नकद भुगतान से न केवल वाहनों की लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं, साथ ही वहां रुकने वाली गाड़ियों से प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता है। वहीं अगर सरकार फास्टैग्स की योजना को अमल में लाती है कि तो फिलहाल ई-टोलिंग के लिए FASTag पर मिल रही छूट खत्म हो सकती है। वहीं अब इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग के लिए बेस रेट तय किए जा सकते हैं और कैश पेमेंट पर सरचार्ज लगाया जा सकता है।
 

टोल नीति में होगा शामिल

नेशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई की तरफ से तैयार की जा रही टोल नीति में इस प्रस्ताव को शामिल किया जा सकता है। फास्टैग्स को 2014 में शुरू किया गया था और कार की विंडशील्ड पर लगे RFID टेक्नोलॉजी वाले स्टिकर की मदद से बिना गाड़ी रोके डिजिटल भुगतान किया जा सकता है।
 

10 से 20 प्रतिशत तक ‘जुर्माना’

केन्द्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का कहना है कि सरचार्ज बेस रेट का 10 से 20 प्रतिशत तक हो सकता है। जिसमें टोल से जुड़ी बहुत सी कीमतों को शामिल किया जायेगा। इसमें भीड़ की वजह से होने वाला प्रदूषण भी शामिल है। इसके अलावा भीड़ के चलते ज्यादा जमीन का अधिग्रहण करना पड़ता है, साथ ही इसमें वक्त की बर्बादी भी शामिल है। फिलहाल एनएचएआई के 400 टोल प्लाजा में से 30 प्रतिशत में ही इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से टोल वसूल किया जा रहा है। अकेले दिल्ली में ही 60 प्रतिशत से ज्यादा टोल कैश के जरिये वसूला जा रहा है, वहीं सरकार की कोशिश है कि यह सख्या 10 प्रतिशत से कम होनी चाहिये।
 

फास्टैग लगाना जरूरी

इससे पहले केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 27 जून को लोकसभा में बताया था कि 1 दिसंबर 2017 से बिकने वाली गाड़ियों पर फास्टैग लगाना जरूरी है। साथ ही, गाड़ियों पर लगाया जाने वाला यह फास्टैग नेशनल परमिट कैटेगरी का होगा। फास्टैग बेचने के लिए 22 बैंको को अधिकृत किया गया है। इसके अलावा बैंक न्यूट्रल NHAI FASTag भी पेट्रोल पंपों और ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजन के जरिये बेचे जायेंगे।   
 

कैसे करता है काम

इस डिवाइस की मदद से टोल प्लाजा पर रोके बिना ही सीधे पेमेंट हो जाती है। यह डिवाइस कार की वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाई जाती है और रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टेक्नोलॉजी की मदद से चलते हुए ही सीधे टोल के पैसे कट जाते हैं और वाहन रोकने की आवश्यकता नहीं पड़ती।      
 

अमेजन से खरीदने की सुविधा

FASTag को फिर से चार्ज किया जा सकता है और इससे टोल प्लाजा पर पैसे ऑटोमैटिकली ही कट जाएंगे। अमेजन पर मिलने वाला FASTag केवल कारों, जीप और वैन के लिए ही मान्य होगा। केन्द्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से जारी स्टेटमेंट के मुताबिक ऑनलाइन मिलने वाले फास्टैग को कस्टमर खुद ही एक्टिवेट कर सकेंगे।
 

मोबाइल एप को करना होगा डाउनलोड

NHAI FASTag को खरीदते वक्त उसमें कोई बैंक लिंक नहीं होता है। ऑनलाइन खरीदने के बाद कस्टमर्स को My FASTag मोबाइल एप पर केवल अपनी और गाड़ी की डिटेल्स भरनी होगी। जिसके बाद कस्टमर को टैग में अपनी पसंद के बैक को लिंक करना होगा। इस एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।
 

बैंक भी देते हैं सुविधा

Fastag बैंक से ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। सभी बैंकों की वेबसाइट पर फास्टैग खरीदने का ऑनलाइन ऑप्शन है। इसके लिए आपको कार का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो भी अपलोड करना होगा। जिसके बाद एक से दो दिन में आपके घर पर फास्टैग डिलीवर कर दिया जाएगा। इसके लिए बैंक कोई डिलीवरी चार्ज नहीं ले रहे हैं।
 
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पेट्रोल पंपों पर मिलते हैं FASTag

इसके अलावा NHAI FASTag दिल्ली-एनसीआर के चुनिंदा पेट्रोल पंपों और कॉमन सर्विस सेंटर्स पर उपलब्ध हैं और जल्द ही इसे देश के दूसरे मैट्रो शहरों में उपलब्ध कराया जाएगा। फास्टैग्स को इस साल जनवरी, 2019 में एनएचएआई ने इंडियन हाइवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के जरिए लांच किया था।   
 
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