भारत में 2035 तक सड़कों पर हर दिन 12,000 से अधिक कारें बढ़ेंगी। इन कारों के लिए सालाना एक अरब वर्गमीटर से अधिक जगह का विस्तार किया जाएगा, जो दक्षिण अफ्रीका में वर्तमान में कुल निर्मित क्षेत्र से अधिक है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने विश्व ऊर्जा परिदृश्य-2024 रिपोर्ट में यह दावा किया है।
रिपोर्ट में कहा, भारत 2023 में चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया। जनसंख्या का आकार और सभी क्षेत्रों से मांग बढ़ने के कारण अगले दशक में किसी अन्य देश की तुलना में भारत में तेल और गैस से लेकर कोयला, बिजली एवं नवीकरणीय तक सभी प्रकार की ऊर्जा खपत में सबसे अधिक 35 फीसदी की वृद्धि होगी। इससे यह वैश्विक स्तर पर ऊर्जा मांग के लिए विकास का इंजन बन जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कच्चा तेल उपभोक्ता और आयातक भारत में 2035 तक क्रूड की मांग हर दिन करीब 20 लाख बैरल बढ़ जाएगी।
सिर्फ एसी पर खर्च होगी पूरे मेक्सिको जितनी बिजली
आईईए के मुताबिक, भारत में 2035 तक लोहा और इस्पात उत्पादन 70 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। सीमेंट उत्पादन में लगभग 55 फीसदी की वृद्धि तय है। एयर कंडीशनर (एसी) का स्टॉक 4.5 गुना से अधिक बढ़ेगा, जिससे 2035 में एसी के लिए बिजली की मांग उस समय मेक्सिको की कुल अपेक्षित खपत से अधिक हो जाएगी।
प्राकृतिक गैस की बढ़ेगी मांग घटेगा कोयला उत्पादन
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राकृतिक गैस की मांग 2050 में 64 अरब घनमीटर से बढ़कर 172 अरब घनमीटर पहुंच जाएगी। हालांकि, कोयला उत्पादन 2023 के 72.1 करोड़ टन से घटकर 2050 में 64.5 करोड़ टन रह जाएगा। बिजली उत्पादन क्षमता करीब तीन गुना होकर 1,400 गीगावाट पहुंच जाएगी।
- देश में 2035 तक कच्चे तेल की मांग बढ़कर 71 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) पहुंच सकती है, जो अभी 52 लाख बीपीडी है।
- कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदलने की रिफाइनरियों की क्षमता इस अवधि तक 58 लाख बीपीडी से बढ़कर 71 लाख बीपीडी हो जाएगी।