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'भोजन बनाम ईंधन' संकट पर ICRIER का सुझाव: इथेनॉल की कमी होने पर E20 से घटाकर E15 किया जाए ब्लेंडिंग लक्ष्य

Tue, 08 Sep 2026 08:24 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को लेकर एक नई रिसर्च में नीति को अधिक लचीला बनाने की जरूरत बताई गई है। जानें ICRIER के शोध पत्र में क्या सुझाव दिए गए हैं। 
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Ethanol Blending Policy - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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आर्थिक शोध संस्थान 'इक्रियर' (ICRIER) द्वारा प्रकाशित "फूड बनाम फ्यूल: रिकैलिब्रेटिंग इंडियाज इथेनॉल ब्लेंडिंग स्ट्रैटेजी" शीर्षक वाली एक शोध रिपोर्ट में सरकार को 'इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल' (EBP) कार्यक्रम में अधिक लचीला दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की गई है।
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प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी के सह-लेखन में तैयार इस रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार को E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) को अपने दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में बनाए रखना चाहिए। लेकिन जब घरेलू स्तर पर इथेनॉल की उपलब्धता कम हो या खाद्य सुरक्षा पर दबाव पड़े, तो ब्लेंडिंग लक्ष्य को अस्थायी रूप से घटाकर E15 (15% मिश्रण) कर देना चाहिए। 

Ethanol Blending - फोटो : AI

भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की वर्तमान स्थिति और अब तक की उपलब्धियां क्या हैं?

भारत ने अपने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का बहुत तेजी से विस्तार किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और घरेलू नवीकरणीय ईंधन को बढ़ावा देना है:
  • समय से पहले हासिल किया लक्ष्य: सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य रखा था। जिसे भारत ने मूल समयसीमा से 5 साल पहले इथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2025-26 में ही सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है।
  • बिक्री और खर्च के आंकड़े: ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने ESY 2023-24 में 679.04 करोड़ लीटर (₹48,757 करोड़), 2024-25 में 1,033.31 करोड़ लीटर (₹73,996 करोड़) और जून 2026 तक 705.43 करोड़ लीटर (₹49,577 करोड़) इथेनॉल की खरीद की है।
  • 38% की वार्षिक वृद्धि (CAGR): 2019-20 से 2025-26 के दौरान ओएमसी (OMCs) को सप्लाई किए जाने वाले इथेनॉल की मात्रा 173.03 करोड़ लीटर से बढ़कर अनुमानित 1,200 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है। जो कि 6 वर्षों में लगभग 38% की वार्षिक चक्रवर्द्धि वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाती है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

रिपोर्ट में 'फूड बनाम फ्यूल' (Food vs Fuel) के बढ़ते अंतर पर क्या चिंता जताई गई है?

रिपोर्ट के अनुसार, एक तरफ जहाँ इथेनॉल की मांग 38% CAGR की दर से बढ़ी है, वहीं इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाली मुख्य फसलों की पैदावार बहुत धीमी गति से बढ़ी है:
  • फसलों की धीमी वृद्धि दर: समान अवधि के दौरान मक्के का उत्पादन 11.4%, चावल का 4.4% और गन्ने का उत्पादन केवल 5.1% CAGR की दर से बढ़ा।
  • मांग और आपूर्ति का बढ़ता अंतर: इथेनॉल की तेज मांग और कच्चे माल की धीमी पैदावार के बीच का यह अंतर भोजन बनाम ईंधन का सीधा संघर्ष पैदा कर रहा है।
  • चीनी की कीमतों पर असर: चीनी बाजार में यह असर दिखने भी लगा है, जहाँ कम शुरुआती स्टॉक और उत्पादन में गिरावट के चलते खुदरा चीनी की मोडल कीमत जुलाई के ₹45 प्रति किग्रा से 44 प्रतिशत बढ़कर 29 अगस्त तक ₹65 प्रति किग्रा पर पहुंच गई। 
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E20 - फोटो : Amar Ujala

कृषि और खाद्य बाजार को संतुलित रखने के लिए रिपोर्ट में क्या मुख्य सुझाव दिए गए हैं?

कृषि आपूर्ति में कमी आने पर खाद्य बाजारों पर अत्यधिक दबाव डाले बिना E20 लक्ष्य को बनाए रखने के लिए एक 'फ्लेक्सिबल फीडस्टॉक स्ट्रैटेजी' की सिफारिश की गई है:
  • गन्ना और मक्का का उपयोग: चीनी की प्रचुर उपलब्धता होने पर गन्ना-आधारित इथेनॉल का उपयोग जारी रहे। लेकिन स्टॉक कम होने पर इसे नियंत्रित किया जाए। मक्के की उत्पादकता बढ़ाकर उससे इथेनॉल की मांग पूरी की जाए।
  • FCI चावल का सीमित उपयोग: भारतीय खाद्य निगम के चावल का उपयोग केवल वास्तविक अधिशेष के समय ही किया जाए और इसकी कीमत कम से कम अधिग्रहण लागत के बराबर तय हो।
  • आयात और अस्थायी छूट: चीनी की किल्लत होने पर बफर स्टॉक के लिए चीनी आयात का सहारा लिया जाए। इसके साथ ही कच्चे माल व इथेनॉल आयात के प्रति अधिक खुलापन और आवश्यकता पड़ने पर E20 से घटाकर E15 ब्लेंडिंग का व्यावहारिक विकल्प अपनाना चाहिए।
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