इस रैंकिंग का आकलन किस आधार पर किया गया और भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
आईसीसीटी (ICCT) की इस रिपोर्ट में दुनिया की 22 सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों का मूल्यांकन किया गया था:
- मूल्यांकन का पैमाना: इस रैंकिंग में उन ऑटोमेकर्स को ऊपर रखा गया जिनकी कारें समान दूरी तय करने के लिए सबसे कम बिजली की खपत करती हैं। जिस ब्रांड की गाड़ियां प्रति किलोमीटर जितनी कम बिजली की खपत करेंगी, उसकी रैंकिंग उतनी ही बेहतर होगी।
- वैश्विक पहचान: यह उपलब्धि भारत के इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। जैसे-जैसे टाटा मोटर्स और महिंद्रा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपना विस्तार कर रही हैं, इस उपलब्धि से वैश्विक स्तर पर उनकी साख और मजबूत होगी।
टेस्ला और BYD जैसी दिग्गज कंपनियों की तुलना में टाटा और महिंद्रा की सफलता का क्या रहस्य है?
रिपोर्ट के अनुसार, Tata Sierra EV और Mahindra BE 6 जैसे मॉडल्स को केवल तेज रफ्तार या अत्यधिक परफॉर्मेंस के बजाय कम ऊर्जा खपत को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है:
- स्मार्ट ऑप्टिमाइजेशन: अपेक्षाकृत छोटे बैटरी पैक के बावजूद, इन भारतीय ईवी को इस तरह से ट्यून और ऑप्टिमाइज किया गया है कि वे बेहतरीन एफिशिएंसी आंकड़े हासिल करती हैं।
- वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों से अंतर: इसके विपरीत, कई अन्य वैश्विक निर्माता बड़े, भारी और अत्यधिक शक्तिशाली इलेक्ट्रिक SUV व सेडान बनाते हैं। जो समान दूरी तय करने के लिए अधिक बिजली की खपत करते हैं और परिणामस्वरूप उनकी एफिशिएंसी कम हो जाती है।
- व्यावहारिक दृष्टिकोण: रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि भारतीय ब्रांड्स ने बड़ी एसयूवी के बजाय क्रॉसओवर (Crossovers) पर ध्यान केंद्रित किया है। जिसमें एफिशिएंसी, किफायती कीमत और दैनिक उपयोग की व्यावहारिकता को प्राथमिकता दी गई है।