इस नई इलेक्ट्रिक कार का प्लेटफॉर्म और उत्पादन कहां होगा?
यह नई इलेक्ट्रिक एसयूवी डेडिकेटेड 'E-GMP (K)' आर्किटेक्चर प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। जिसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर बिकने वाली 'Hyundai Inster' में भी किया गया है।
- स्थानीय उत्पादन: कार की कीमत को किफायती और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए ह्यूंदै इसका निर्माण तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर स्थित अपने कारखाने में स्थानीय स्तर पर करेगी।
- ग्रुप शेयरिंग स्ट्रेटेजी: ह्यूंदै की सहयोगी कंपनी किआ (Kia) द्वारा भारत में लॉन्च की गई साइरोस ईवी (Syros EV) के साथ यह नई एसयूवी अपना प्लेटफॉर्म, बैटरी पैक और कई मुख्य कंपोनेंट्स शेयर करेगी।
EV इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ह्यूंदै की क्या तैयारी है?
नई इलेक्ट्रिक एसयूवी की लॉन्चिंग से पहले ह्यूंदै अपने बिक्री और सर्विस नेटवर्क को ईवी के लिए तैयार कर रही है। कंपनी अपने डीलर कर्मचारियों को इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री, रखरखाव और मरम्मत से जुड़ी ट्रेनिंग भी दे रही है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के आखिर तक अपने नेटवर्क को तेजी से बढ़ाना है:
- नेटवर्क विस्तार: कंपनी FY27 के अंत तक 820 EV-रेडी सेल्स एवं सर्विस टचपॉइंट्स और 650 वर्कशॉप तैयार करेगी।
- स्टाफ ट्रेनिंग: ग्राहकों को बेहतर आफ्टर-सेल्स सर्विस देने के लिए ह्यूंदै वित्त वर्ष 2027 तक 7,000 से अधिक सेल्स कर्मियों और 5,000 से अधिक सर्विस कर्मियों को ईवी मेंटेनेंस और रिपेयरिंग के लिए विशेष प्रशिक्षण दे रही है।
- मौजूदा क्षमता: कंपनी अब तक 10,000 से ज्यादा सेल्स एक्जीक्यूटिव्स को प्रशिक्षित कर चुकी है। जबकि ह्यूंदै मोटर इंडिया के पास वर्तमान में 2,600 से अधिक प्रशिक्षित सर्विस कर्मी तैनात हैं।
इस ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर ह्यूंदै का क्या कहना है?
ह्यूंदै मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ तरुण गर्ग ने कंपनी की भावी रणनीतियों पर बात करते हुए कहा:
"चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ईवी-रेडी सेल्स व सर्विस नेटवर्क का विस्तार करके, विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करके और अपनी डीलरशिप टीमों को व्यवस्थित रूप से प्रशिक्षित करके, हमारा उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ग्राहकों के बदलाव को सुविधाजनक, विश्वसनीय और सुखद बनाना है।"