कोरोना महामारी के बाद से लोग साफ-सफाई को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं। हालांकि, अब लोगों ने यूवी (UV) सैनिटाइजर का इस्तेमाल कम कर दिया है, लेकिन कार बनाने वाली दिग्गज कंपनियां ह्यूंदै और किआ इस तकनीक को एक बिल्कुल नए लेवल पर ले गई हैं।
इन दोनों कंपनियों ने मिलकर एक ऐसा खास सिस्टम तैयार किया है, जो कार में बैठे यात्रियों को बिना नुकसान पहुंचाए, पूरी गाड़ी को अंदर से कीटाणुमुक्त कर देगा। आइए समझते हैं कि यह धांसू तकनीक कैसे काम करती है।
क्या है यह नई टेक्नोलॉजी?
इस नई और अनोखी तकनीक का नाम प्लाज्मा केयर यूवीसी रखा गया है। कंपनियों का दावा है कि दुनिया में पहली बार कारों के लिए ऐसा इन-व्हीकल सैनिटाइजेशन सिस्टम बनाया गया है। यह कार के केबिन को साफ करने के लिए एक खास तरह की यूवी लाइट का इस्तेमाल करता है।
क्या यह UV लाइट इंसानों के लिए सुरक्षित है?
आमतौर पर माना जाता है कि यूवी (UV) लाइट हमारी त्वचा और आंखों के लिए खतरनाक होती है, लेकिन ह्यूंदै और किआ ने इसका एकदम सेफ तरीका निकाल लिया है।
- फार-यूवीसी लाइट का इस्तेमाल: यह सिस्टम 200 से 230 नैनोमीटर की फार-यूवीसी लाइट का उपयोग करता है। यह लाइट हवा और सतह पर मौजूद वायरस और बैक्टीरिया को तो मार देती है, लेकिन इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।
- स्किन रहेगी सेफ: कंपनियों के मुताबिक, इस लाइट की किरणें इतनी हल्की होती हैं कि ये हमारी त्वचा की बाहरी सुरक्षा परत को पार नहीं कर सकतीं। इसलिए, अगर आप गाड़ी में बैठे हैं और यह सिस्टम ऑन है, तब भी आप पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
- खास प्लाज्मा लैंप: इसमें आम एलईडी (LED) बल्ब की जगह एक खास प्लाज्मा लैंप और सेफ्टी फिल्टर लगा है, जिससे कार के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स भी सुरक्षित रहते हैं।
टेस्टिंग के शानदार नतीजे
इंजीनियरों ने इस तकनीक को एक बंद चेंबर और किआ PV5 इलेक्ट्रिक वैन के अंदर टेस्ट किया, जिसके नतीजे काफी हैरान करने वाले रहे:
- सिर्फ 30 सेकंड में असर: लैब टेस्टिंग में इस लाइट ने मात्र 30 सेकंड में 99.9% बैक्टीरिया को खत्म कर दिया और 60 सेकंड में उनका पूरी तरह सफाया कर दिया।
- हवा के वायरस भी हुए कम: कार जैसे बंद चेंबर में 30 मिनट तक इसे चलाने पर हवा में मौजूद 96.8% वायरस खत्म हो गए।
- इलेक्ट्रिक वैन में पास हुआ टेस्ट: किआ की PV5 वैन में 40 मिनट तक इस सिस्टम को ऑन रखने पर 99.9% बैक्टीरिया खत्म हो गए।
क्या आपकी अगली कार में मिलेगा यह फीचर?
भले ही यह तकनीक सुनने में बहुत हाई-टेक और काम की लग रही हो, लेकिन इसे आपकी कारों तक पहुंचने में अभी थोड़ा समय लगेगा:
- सरकारी मंजूरी: इसे कारों में लगाने से पहले कंपनियों को सरकारी विभागों और नियमों के तहत मंजूरी लेनी होगी।
- कार के इंटीरियर का क्या होगा: एक चिंता यह भी है कि लगातार यूवी लाइट पड़ने से कार के डैशबोर्ड का प्लास्टिक और सीटों का लेदर/फैब्रिक समय से पहले खराब हो सकता है या उनका रंग उड़ सकता है। कंपनी को अभी इस चुनौती से पार पाना है।
किसके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होगी ये तकनीक?
भविष्य में जब यह तकनीक बाजार में आएगी, तो यह पर्सनल कारों से ज्यादा ओला-उबर जैसी कैब सर्विस के लिए एक वरदान साबित होगी। इससे हर राइड के बाद कार के कीटाणु और बदबू अपने आप खत्म हो जाएगी, जिससे हर नए यात्री को हमेशा एक साफ, फ्रेश और सुरक्षित गाड़ी मिलेगी।