हाल ही में हैदराबाद में ट्रैफिक पुलिस की एक रूटीन चेकिंग के दौरान कुछ ऐसा देखने को मिला, जिसने सबको हैरान कर दिया। पुलिस ने एक ऐसी कार पकड़ी जिसकी नंबर प्लेट सिर्फ एक बटन दबाते ही बदल जाती थी। इस घटना ने एक बार फिर इस बात पर सबका ध्यान खींचा है कि भारतीय शहरों में लोग स्पीडिंग चालान से बचने के लिए कैसे-कैसे गैरकानूनी और हाई-टेक तरीके अपना रहे हैं।
हाल ही में हैदराबाद में देर रात पुलिस की चेकिंग के दौरान एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया, जिसने सबको चौंका दिया। पुलिस ने जब एक लग्जरी कार को रोका और उसकी जांच की तो पता चला कि उसमें एक खास रिमोट-कंट्रोल सिस्टम लगा हुआ था। इस हाई-टेक सिस्टम की मदद से ड्राइवर सिर्फ एक बटन दबाकर कुछ ही सेकंड में कार की नंबर प्लेट बदलकर उस पर दूसरा नंबर ले आता था।
दरअसल, इस चालाकी का इस्तेमाल स्पीड कैमरों को धोखा देने और बार-बार कटने वाले चालान से बचने के लिए किया जा रहा था। इस खुलासे के बाद पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए कार को जब्त कर लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, नंबर प्लेट से छेड़छाड़ का यह अब तक का सबसे हाई-टेक मामला है, इसलिए अब यह मामला सिर्फ ट्रैफिक नियम तोड़ने तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस ने इसमें धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की गंभीर धाराएं भी जोड़ दी हैं।
सिर्फ हैदराबाद ही नहीं, कई शहरों की ट्रैफिक पुलिस को 'ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) कैमरों को धोखा देने के कई गैरकानूनी तरीके देखने को मिल रहे हैं:
नंबरों में मामूली बदलाव: कुछ ड्राइवर नंबर प्लेट के किसी एक अक्षर या नंबर को बदल देते हैं या मिटा देते हैं। उनका मकसद कैमरे को कनफ्यूज करना होता है, लेकिन पुलिस के बैकएंड सिस्टम इस चालाकी को आसानी से पकड़ लेते हैं।
फैंसी फॉन्ट और डिजाइन: स्टाइलिश अक्षरों वाली या डिजाइनर नंबर प्लेट लगाना एक आम बात हो गई है। देखने में ये भले ही अच्छे लगें, लेकिन ये सरकारी नियमों के खिलाफ हैं और पुलिस इन्हें चेकिंग के दौरान तुरंत पकड़ लेती है।
रिफ्लेक्टिव कोटिंग और फिल्म: कुछ लोग नंबर प्लेट पर ऐसा स्प्रे या पारदर्शी फिल्म लगा देते हैं, जिससे कैमरे की फ्लैश पड़ते ही नंबर चमकने लगता है और फोटो में दिखाई नहीं देता। हालांकि, अब नए कैमरे इस तरह के रिफ्लेक्शन को भी आसानी से पकड़ लेते हैं।
फर्जी या क्लोन नंबर प्लेट: कई गंभीर मामलों में लोग किसी दूसरी कार का नंबर इस्तेमाल करते हैं। इसका खुलासा तब होता है जब असली मालिक के पास बिना गलती के चालान पहुंचने लगते हैं और वो इसकी शिकायत करते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि आज का पुलिस और ट्रैफिक सिस्टम बहुत एडवांस हो चुका है और यह सिर्फ एक फोटो के भरोसे काम नहीं करता। अगर कोई चालान से बचने के लिए नंबर प्लेट के साथ इस तरह के 'जुगाड़' या छेड़छाड़ की कोशिश करता है तो उसे आसानी से पकड़ लिया जाता है।
दरअसल, सिस्टम अब कैमरों के अलग-अलग एंगल से गाड़ी की जांच करता है और कार के मॉडल, मेक और उसके रंग का भी बारीकी से मिलान करता है। इसके अलावा, गाड़ी किस समय और कहां से गुजरी, पुलिस इसके पूरे मूवमेंट पैटर्न को ट्रैक कर सकती है। बात अगर शक से आगे बढ़े तो गाड़ी के चेसिस और इंजन नंबर की फिजिकल चेकिंग भी की जाती है। इसके सामने चालान से बचने की ये सारी चालाकियां पूरी तरह से फेल हो जाती हैं।
अक्सर जो लोग स्मार्ट कैमरों को चकमा देने की कोशिश करते हैं, उन्हें लगता है कि पकड़े जाने पर सिर्फ ट्रैफिक चालान भरना होगा, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने पर आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसमें न सिर्फ मोटर वाहन अधिनियम के तहत भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, बल्कि पुलिस आपकी गाड़ी को भी जब्त कर सकती है।
बात यहीं खत्म नहीं होती, अगर जांच में आपकी धोखाधड़ी साबित हो जाती है तो आप पर चीटिंग और फर्जीवाड़े के तहत क्रिमिनल केस (FIR) दर्ज हो सकता है। इससे जेल जाने तक की नौबत आ सकती है। इसके अलावा, पुलिस उन गैराज या दुकानों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है, जो इस तरह के गैरकानूनी मॉडिफिकेशन करने में लोगों की मदद करते हैं। इसलिए, बेहतर यही है कि चालान से बचने के लिए किसी भी तरह का शॉर्टकट या 'जुगाड़' अपनाने से बचें, हमेशा सुरक्षित चलें और यातायात नियमों का पूरी तरह से पालन करें।