कम दृश्यता में गलतियां बनती हैं जानलेवा
कोहरे के दौरान सड़क और आसपास की दृश्यता बेहद सीमित हो जाती है, जिससे वाहन चालकों को सही अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में अगर कोई चालक सिग्नल जंप करता है, तेज रफ्तार से गाड़ी चलाता है, फॉग लैंप का इस्तेमाल नहीं करता, बिना संकेत दिए मुड़ता है या अचानक लेन बदलता है, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हाईवे और एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार और कम दृश्यता का यह मेल अक्सर गंभीर और जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बनता है।
यह भी पढ़ें - Motorcycle Sales: नवंबर 2025 में मोटरसाइकिल की बिक्री में मजबूती, जानें किस कंपनी ने बेचे कितने वाहन
यह भी पढ़ें - December Car Deals: दिसंबर में कार खरीदना सही है या नहीं? समझें क्या है इसके गणित और मनोविज्ञान की असली कहानी
कोहरे में हाईवे ड्राइविंग क्यों है ज्यादा खतरनाक
हाईवे पर वाहन सामान्य तौर पर तेज रफ्तार से चलते हैं। कोहरे में जब आगे चल रहे वाहन, सड़क किनारे खड़े लोग या कोई अवरोध अचानक नजर आता है, तो ब्रेक लगाने का समय नहीं मिल पाता। पीछे से आ रहे वाहन भी समय पर रुक नहीं पाते। जिससे चेन रिएक्शन की तरह कई गाड़ियां टकरा जाती हैं और बड़ा हादसा हो जाता है।
यह भी पढ़ें - e-Challan Recovery: ई-चालान से वसूले जा रहे जुर्मानों की वसूली 2024 में घटी, लंबित जुर्माने बेतहाशा बढ़े
धीमी और नियंत्रित रफ्तार है क्यों है सबसे सुरक्षित विकल्प
कोहरे वाले मौसम में हाईवे पर गाड़ी चलाते समय धीमी लेकिन स्थिर रफ्तार बेहद जरूरी है। खाली सड़क देखकर तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि कोहरे में यह अंदाजा लगाना मुश्किल होता है कि आगे अचानक कौन सा वाहन या पैदल यात्री सामने आ जाए। धीमी रफ्तार से वाहन चलाने पर चालक को बेहतर नियंत्रण मिलता है और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने का समय भी मिल जाता है।
यह भी पढ़ें - Toll Collection: टोल वसूली को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने हिमाचल सरकार और NHAI से मांगा स्पष्ट जवाब
सही रोशनी से बढ़ती है सुरक्षा
वाहनों में फॉग लैंप खास तौर पर इसी स्थिति के लिए दिए जाते हैं। घने कोहरे में इनका इस्तेमाल करने से सड़क की दृश्यता बेहतर होती है। कुछ वाहन अतिरिक्त सहायक लाइट्स का भी इस्तेमाल करते हैं। जो धुंध में ड्राइविंग के दौरान मददगार साबित हो सकती हैं। सही रोशनी न सिर्फ आपको आगे देखने में मदद करती है, बल्कि दूसरे चालकों को भी आपके वाहन की मौजूदगी का संकेत देती है।
यह भी पढ़ें - UV Sales: नवंबर 2025 में मारुति सुजुकी बनी UV सेगमेंट की नंबर-1 कंपनी, महिंद्रा मामूली अंतर से दूसरी
एलईडी लाइट्स से क्यों बनती है परेशानी
कई चालक अपनी गाड़ियों में तेज सफेद एलईडी लाइट्स लगवाते हैं, जो देखने में आकर्षक लगती हैं। लेकिन कोहरे और बारिश में ये लाइट्स कारगर नहीं होतीं। एलईडी की तेज सफेद रोशनी कोहरे की पानी की बूंदों से टकराकर बिखर जाती है, जिससे आगे की सड़क साफ दिखने के बजाय चमक और धुंध बढ़ जाती है। इसके मुकाबले पीली हेलोजन लाइट्स कोहरे और बारिश में बेहतर दृश्यता देती हैं।
यह भी पढ़ें - VIDA Dirt.E K3: बच्चों के लिए इलेक्ट्रिक डर्ट बाइक भारत में लॉन्च, बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ बाइक भी बढ़ेगी!
इंडिकेटर से बढ़ता है आपसी तालमेल
धुंध के मौसम में टर्न इंडिकेटर का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी हो जाता है। इंडिकेटर से दूसरे चालकों को आपकी अगली चाल का अंदाजा हो जाता है, जिससे टक्कर का खतरा कम होता है। मोड़ लेने या लेन बदलने से पहले इंडिकेटर का इस्तेमाल करना जरूरी है। हालांकि हाईवे पर बार-बार लेन बदलने से बचना चाहिए। लेकिन अगर मजबूरी हो तो संकेत देना अनिवार्य है।
यह भी पढ़ें - MINI Convertible: भारत में नई मिनी कन्वर्टिबल लॉन्च, इसमें है 18 सेकंड में खुलने वाली रूफ, जानें कीमत और फीचर्स
समस्या होने पर वाहन रोकना है समझदारी
हर हादसा केवल खराब दृश्यता की वजह से नहीं होता। कई बार चालक को खुद की आंखों या ध्यान से जुड़ी समस्या भी हो सकती है, जो कोहरे में और गंभीर हो जाती है। अगर ड्राइविंग के दौरान आपको देखने में परेशानी हो रही है या आत्मविश्वास महसूस नहीं हो रहा। तो बेहतर यह होता है कि वाहन को सुरक्षित तरीके से सड़क के किनारे रोक दिया जाए। दृश्यता बेहतर होने तक पार्किंग लाइट ऑन करके वाहन खड़ा रखना कई बार जान बचाने वाला फैसला साबित हो सकता है।