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INDIA-EU FTA: यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से प्रीमियम कारें होंगी सस्ती, 10-15% हो सकता है आयात कर

Tue, 18 Nov 2025 07:13 PM IST
सुयश पांडेय ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) सफल रहा, तो ये भारत की लग्जरी और प्रीमियम कार बाजार की दिशा-निर्देश तय कर सकता है आयात करों में एक छोटी कटौती भी गाड़ी के ऑन-रोड कीमत को 25-35% तक कम कर सकता है।

 
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भारत और यूरोपीय संघ। (प्रतीकात्मक तस्वीर)) - फोटो : ANI
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विस्तार
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कई वर्षों से भारत ने अपनी ऑटोमोबाइल उद्योग को उच्च आयात शुल्क से संरक्षित रखा है। अगर भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) सूझ-बूझ से लागू हुआ, तो ये भारत में प्रीमियम कार बाजार का अनुभव और दुनिया में भारत की छवि को पूरी तरह बदल के रख देगा।

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अभी भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर जो बातचीत हो रही है, वो भारत की लग्जरी और प्रीमियम कार बाजार की दिशा-निर्देश तय कर सकता है। इस डील का सबसे बड़ा असर ये होगा कि भारत में लग्जरी कारें कैसे आयात होंगी, उनका मूल्य निर्धारण कैसे होगा और लोग उन्हें कैसे अनुभव करेंगे ये सभी चीजें तय हो सकती हैं। अगर आयात कर में बड़ी कटौती और प्रक्रिया आसान हुई, तो पोर्शे, लैंड रोवर, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज और ऑडी जैसी ब्रांड्स और भारतीय खरिदारों के लिए ये गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

अभी तक भारत में आयात कर दुनिया में सबसे ज्यादा रहा है, कई बार तो ये 100% तक भी रहा है। इसी वजह से यूरोप में 80 लाख रुपए की पोर्शे केयेन भारत में 1.5 करोड़ रुपए से ज्यादा की पड़ती है। अगर ये ट्रेड एग्रीमेंट सफलतापूर्वक लागू हुआ तो आयात कर 10-15% तक आ सकता है। आयात करों में एक छोटी कटौती भी गाड़ी के ऑन-रोड कीमत को 25-35% तक कम कर सकता है।

स्मार्ट लॉजिस्टिक्स से तेज होगा आयात

अभी कंपलीटली बिल्डअप (CBU) कारें विदेशों से भारत में आयात करने में बहुत समय लगता है। इतनी देरी का मुख्य कारण दस्तावेजीकरण, सीमा शुल्क में देरी और अप्रत्याशित निकासी है। FTA के बाद दोनों देश सुव्यवस्थित प्रक्रिया, तेजी से निकासी और डिजिटल दस्तावेजीकरण पर साथ काम कर सकते हैं। इससे यूरोपियन प्रोडक्शन सीधे भारत की मांग से जुड़ जाएगा।

प्रतियोगिता बढ़ेगी तो ग्राहक को मिलेगा फायदा

जब कीमत की बाधा नहीं होगी तो तो बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज, ऑडी, जैगुआर लैंड रोवर और पोर्शे के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे ग्राहक का अनुभव और सेवा में नवाचार दोनों अच्छा होगा। छोटे यूरोपियन ब्रांड्स जैसे अल्फा रोमियो, डीएस ऑटोमोबाइल्स या कुपरा भी भारत को नया बाजार मान के अपने कदम रख सकते हैं।

कम आयात शुल्क से स्थानीय विनिर्माण को नहीं होगा नुकसान

कई लोग सोचते हैं कि कम आयात शुल्क से लोकल मैन्युफैक्चरिंग या स्थानीय विनिर्माण को नुकसान होगा। लेकिन असल में FTA उल्टा असर कर सकता है। यूरोपियन ब्रांड्स को 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' फॉलो करने होंगे, जिससे स्थानीय सोर्सिंग और भारतीय आपूर्तिकर्ता के साथ करार बढ़ेगा। नए जॉइंट वेंचर्स और कुछ प्रीमियम मॉडल्स भारत में असेंबल हो सकते हैं।

मेट्रो शहरों से बाहर भी फैल सकेगा लग्जरी कार बाजार का नेटवर्क

कीमत कम होने से लग्जरी कारों का बाजार मेट्रो शहरों से बाहर भी फैलेगा। इससे सर्विस नेटवर्क बढ़ेंगे, पूर्व स्वामित्व वाली लग्जरी कारों की ग्रोथ होगी और ऑटो फाइनेंसिंग आसान होगी। लग्जरी कार खरीदना अब सिर्फ लोगों का सपना नहीं वास्तविकता बन सकेगी।

2030 का विजन

अभी जो लग्जरी कार बाजार कुल बिक्री का सिर्फ 1-1.5% है, 2030 तक कुल बिक्री का 4-5% हिस्सा हो सकेंगी। मर्सिडीज एएमजी, बीएमडब्ल्यू एम और पोर्शे ईवी ग्लोबल प्राइसिंग के दुनियाभर में जिस कीमत में मिलती हैं उसी कीमत में भारत के अंदर मिल सकेंगी। भारत से प्रीमियम मॉडल्स साउथ-ईस्ट एशिया एक्सपोर्ट होंगे। लोकल सप्लायर्स यूरोपियन ब्रांड्स को हाई-टेक सॉफ्टवेयर और कंपोनेंट्स देंगे। ये सिर्फ ट्रेड डील नहीं भारत का एक इंडस्ट्रियल ट्रांसफॉर्मेशन होगा।

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