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Budget 2026-27: सस्ते होंगे इलेक्ट्रिक वाहन! लिथियम-आयन सेल पर कस्टम ड्यूटी में छूट का एलान

Sun, 01 Feb 2026 03:16 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी में छूट का एलान किया है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत में कमी आने की उम्मीद है।
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Electric Car - फोटो : Freepik
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट पेश किया। उन्होंने लगातार अपना नौवां बजट पेश किया है। मोटर वाहन उद्योग को बजट से काफी उम्मीदें थीं। खासकर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माताओं को कुछ खास रियायतों की उम्मीद थी। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी में छूट का एलान किया है।
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वित्त मंत्री का प्रस्ताव
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान कहा, "मैं यह प्रस्ताव करती हूं कि बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले लिथियम-आयन सेल के लिए जिन मशीनों और पूंजीगत सामान पर पहले से कस्टम ड्यूटी में छूट मिलती है, वही छूट अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले लिथियम-आयन सेल बनाने वाले सामान पर भी दी जाएगी। इसके अलावा, सोलर ग्लास बनाने में काम आने वाले सोडियम एंटीमोनेट के आयात पर भी मूल सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) से छूट देने का प्रस्ताव है।" 

क्या हैं लिथियम-आयन सेल
लिथियम-आयन (Li-ion) सेल ज्यादातर आधुनिक इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली मुख्य टेक्नोलॉजी है। जिसमें बैटरी इलेक्ट्रिक गाड़ियां और प्लग-इन हाइब्रिड शामिल हैं। क्योंकि इनकी एनर्जी डेंसिटी ज्यादा होती है। साथ ही ये हल्के होते हैं और इनकी लाइफ लंबी होती है।
 

सस्ती बैटरी से सस्ते होंगे ईवी
वित्त मंत्री के इस एलान से साफ है कि बैटरी सस्ती होगी। जिसका सीधा असर इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत पर भी पड़ेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों की मौजूदा ज्यादा कीमत इसमें इस्तेमाल होने वाली बैटरी की लागत और कीमत की वजह से होती है। इसलिए बैटरी की कीमत में कमी आने से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत में कटौती होगी। 
 
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ड्यूटी छूट से EV बैटरी की लागत घटेगी और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
लिथियम-आयन सेल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कैपिटल गुड्स पर ड्यूटी छूट बढ़ाने के सरकार के फैसले से भारत में बैटरी बनाने की लागत कम होगी। इससे बैटरी निर्माताओं को सेल आयात करने के बजाय देश में ही फैक्ट्रियां लगाने और उनका विस्तार करने में मदद मिलेगी।

समय के साथ इससे इलेक्ट्रिक कारों, दोपहिया वाहनों और बसों की लागत घट सकती है, बैटरियों की उपलब्धता बेहतर होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। उपभोक्ताओं के लिए इसका मतलब है ज्यादा किफायती ईवी, बेहतर सर्विस सपोर्ट और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने के साथ बैटरियों पर लंबी वारंटी मिलने की संभावना।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस एलान से खासकर एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कार खरीदने वाले मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिल सकती है।

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