शराब पीने के बाद गाड़ी चलाने पर पुलिस अक्सर ब्रेथ एनालाइजर (Breath Analyser) का इस्तेमाल करती है। यह छोटा-सा डिवाइस आपकी सांस से ही बता देता है कि आपने शराब पी है या नहीं।
नया साल आने वाला है और इसके साथ ही जश्न का खुमार भी बढ़ता जा रहा है। दोस्तों और परिवार के साथ पार्टी करने का मौका कौन छोड़ना चाहेगा? लेकिन इन खुशनुमा पलों में एक छोटी-सी गलती, जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाना, न केवल आपकी खुशियों पर पानी फेर सकती है बल्कि दूसरों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकती है।
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शराब पीने के बाद गाड़ी चलाने पर पुलिस अक्सर ब्रेथ एनालाइजर (Breath Analyser) का इस्तेमाल करती है। यह छोटा-सा डिवाइस आपकी सांस से ही बता देता है कि आपने शराब पी है या नहीं। पार्टी में जाने से पहले यह जानना जरूरी है कि ब्रेथ एनालाइजर कैसे काम करता है और इसे लेकर कानून क्या कहता है।
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ब्रेथ एनालाइजर कैसे पकड़ लेता है शराब की मौजूदगी?
ब्रेथ एनालाइजर एक ऐसा डिवाइस है, जो आपकी सांस के जरिए खून में मौजूद शराब का पता लगाता है। शराब पीने के बाद यह खून में मिल जाती है और जब आप सांस छोड़ते हैं, तो थोड़ी मात्रा में अल्कोहल बाहर भी आती है।
इस डिवाइस में एक ट्यूब लगी होती है, जिसमें आपको फूंक मारनी होती है। मशीन के अंदर लगे सेंसर तुरंत यह पता लगा लेते हैं कि सांस में कितनी अल्कोहल है और इसका स्तर खून में कितना हो सकता है। नतीजा मशीन की स्क्रीन पर तुरंत दिखने लगता है।
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कैसे काम करती है यह मशीन?
जब आप शराब पीते हैं, तो वह आपकी खून में मिल जाती है। खून से यह फेफड़ों तक पहुंचती है और सांस छोड़ते वक्त बाहर निकलती है। ब्रेथ एनालाइजर इसी छोड़ी गई सांस का विश्लेषण करता है। सांस में 5 प्रतिशत तक अल्कोहल होती है, जिसे मशीन डिटेक्ट कर लेती है। इसके बाद यह खून में मौजूद अल्कोहल की मात्रा का अनुमान लगाती है। इसे ब्लड अल्कोहल कंसंट्रेशन (BAC) कहते हैं।
मशीन की लाइट्स और उनके संकेत
ब्रेथ एनालाइजर में आमतौर पर तीन रंगों की लाइट्स होती हैं, ग्रीन, येलो और रेड। अगर ग्रीन लाइट जलती है, तो इसका मतलब है कि आप सुरक्षित हैं और गाड़ी चला सकते हैं। येलो लाइट बताती है कि आपने थोड़ा-सा पी रखा है और सावधान रहने की जरूरत है। वहीं, अगर रेड लाइट लाइट जलती है, तो इसका मतलब है कि आपने तय सीमा से ज्यादा शराब पी है और गाड़ी चलाना आपके लिए अवैध है। कुछ नई मशीनों में लाइट्स की जगह डिजिटल डिस्प्ले होता है, जो अल्कोहल का स्तर नंबरों में दिखाता है।
भारत में अल्कोहल की सीमा क्या है?
भारत में अगर आप निजी वाहन चला रहे हैं तो खून में अल्कोहल की सीमा 0.03 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होने चाहिए। इसका मतलब है कि 100 मिलीलीटर खून में 30 मिलीग्राम से ज्यादा अल्कोहल नहीं होना चाहिए। अगर इससे ज्यादा हुआ, तो आप कानून तोड़ रहे हैं। हालांकि, व्यावसायिक वाहनों के मामले में नियम और भी सख्त हैं। ड्राइवर के खून में अल्कोहल की मात्रा बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए।