Car AC Recirculation: आजकल बजट और एंट्री-लेवल कारों में भी ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल का फीचर मिलने लगा है, लेकिन अधिकांश कार मालिक आज भी एसी को मैनुअल मोड पर ही चलाना पसंद करते हैं, क्योंकि वे नहीं जानते कि कंसोल पर मौजूद इन बटन असल में कैसे काम करते हैं। आइए, विस्तार से समझते हैं कि कार एसी का ऑटो बटन क्या करता है, रिसर्कुलेशन मोड कब ऑन या ऑफ करना चाहिए और क्या इनसे आपकी कार के माइलेज पर कोई फर्क पड़ता है।
कार का एसी ऑटो बटन क्या करता है?
- ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल में मौजूद ऑटो बटन दबाने के बाद एसी की कई सेटिंग्स सिस्टम खुद संभालता है। आपको सिर्फ अपनी पसंद का तापमान सेट करना होता है।
- इसके बाद सिस्टम खुद तय करता है कि कितनी ठंडी या गर्म हवा देनी है। साथ ही फैन की स्पीड, हवा किस दिशा में जाएगी और दूसरी सेटिंग्स को भी जरूरत के मुताबिक बदलता रहता है, ताकि केबिन का तापमान आरामदायक बना रहे।
ऑटो मोड कैसे बनाए रखता है सही तापमान?
- ऑटो मोड का सबसे बड़ा फायदा होता है कि इससे बार-बार आपको एसी की सेटिंग्स बदलने की जरूरत नहीं पड़ती है। अगर कार का केबिन ज्यादा गर्म है, तो सिस्टम शुरुआत में तेज कूलिंग करता है। जैसे-जैसे तापमान आपके सेट किए गए स्तर के करीब पहुंचता है, फैन की स्पीड अपने आप कम हो जाती है।
- सर्दियों में भी सिस्टम इसी तरह काम करता है। जरूरत के हिसाब से गर्म हवा की मात्रा और फैन स्पीड को एडजस्ट किया जाता है, जिससे केबिन जल्दी आरामदायक तापमान पर पहुंच सके।
रिसर्कुलेशन मोड क्या होता है?
- एसी में मौजूद रिसर्कुलेशन बटन कार के अंदर की हवा को दोबारा इस्तेमाल करता है। इसे ऑन करने पर एसी बाहर की हवा लेने के बजाय केबिन की हवा को ही दोबारा ठंडा या गर्म करता है। वहीं, रिसर्कुलेशन बंद रहने पर बाहर की हवा केबिन में आती रहती है।
- दोनों मोड का अलग-अलग काम है और मौसम और परिस्थितियों के हिसाब से इनका इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर रहता है।
गर्मी में रिसर्कुलेशन कब करें ऑन?
- अगर कार काफी देर तक धूप में खड़ी रही है और अंदर का तापमान बहुत ज्यादा है, तो रिसर्कुलेशन मोड उपयोगी साबित हो सकता है।
- शुरुआत में एसी के साथ इसका इस्तेमाल करने से ठंडी हवा को केबिन के अंदर ही सर्कुलेट करने में मदद मिलती है। इससे केबिन को जल्दी ठंडा करने में मदद मिल सकती है।
- हालांकि, इसे लंबे समय तक लगातार ऑन रखना सही नहीं माना जाता। इसकी वजह यह है कि बाहर की ताजी हवा केबिन में कम आती है और लंबे समय बाद अंदर की हवा भारी महसूस हो सकती है।
सर्दियों में इसका इस्तेमाल कैसे करें?
- यह फीचर सिर्फ गर्मी में ही नहीं, बल्कि ठंड में भी काफी काम का साबित होता है। ठंड यह कार के अंदर की हवा बाहर की तुलना में गर्म हो सकती है, इसलिए उसे दोबारा सर्कुलेट करने से केबिन को गर्म बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन केबिन गर्म होने के बाद रिसर्कुलेशन बंद कर देना बेहतर रहता है।
- लंबे समय तक इसे ऑन रखने पर यात्रियों की सांसों से निकलने वाली नमी केबिन में जमा हो सकती है। इससे कार की खिड़कियों और विंडशील्ड पर धुंध जम सकती है, जिससे बाहर देखने में परेशानी हो सकती है।
ऑटो मोड में कब खुद सेटिंग बदलें?
- ऑटो क्लाइमेट कंट्रोल कई काम खुद कर सकता है, लेकिन हर स्थिति में आपकी व्यक्तिगत जरूरत को समझना जरूरी नहीं है।
- अगर फैन की आवाज ज्यादा लग रही है, किसी यात्री से बात करनी है या फोन पर बातचीत करनी है, तो आप फैन की स्पीड खुद कम कर सकते हैं।
- इसी तरह जरूरत के हिसाब से हवा की दिशा भी बदली जा सकती है। इसके बाद दोबारा ऑटो बटन दबाकर सिस्टम को ऑटोमैटिक मोड में लाया जा सकता है।
क्या ऑटो बटन से कार का माइलेज कम होता है?
- हर सवाल अधिकतर कार मालिक का हो सकता है, लेकिन ऑटो बटन का मुख्य काम कार के केबिन का तापमान आरामदायक बनाए रखना है। इसका उद्देश्य सीधे तौर पर माइलेज बढ़ाना नहीं है।
- ऑटो मोड जरूरत के हिसाब से AC की स्पीड और दूसरी सेटिंग्स को एडजस्ट करता रहता है। इससे सिस्टम को जरूरत के मुताबिक काम करने में मदद मिलती है।
- हालांकि, AC चलने पर इंजन पर कुछ लोड आता है और इसका माइलेज पर थोड़ा असर पड़ सकता है। लेकिन सिर्फ Auto बटन ऑन करने की वजह से माइलेज में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता।
तो कौन-सा मोड कब इस्तेमाल करें?
- ऑटो मोड: जब आप चाहते हैं कि एसी खुद तापमान और फैन स्पीड मैनेज करे।
- रिसर्कुलेशन: गर्म कार को जल्दी ठंडा करने या केबिन की हवा को दोबारा सर्कुलेट करने के लिए।
- रिसर्कुलेशन लंबे समय तक: लगातार इस्तेमाल करने के बजाय जरूरत के हिसाब से करें।
- सर्दियों में: शीशों पर धुंध जमने लगे तो रिसर्कुलेशन बंद करना बेहतर है।
- माइलेज: एसी के इस्तेमाल से थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन ऑटो बटन अकेले माइलेज को काफी कम नहीं करता।