याचिका में संविधान के उल्लंघन का आरोप
यह याचिका अधिवक्ता उत्कर्ष मोंगा द्वारा दायर की गई। जिसमें दो-न्यायाधीशों मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज वाली पीठ के समक्ष यह तर्क दिया गया कि राज्य सरकार के पास राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसा करना अनुच्छेद 246 और 254 तथा संविधान के भाग 11 में बताए गए प्रावधानों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा स्थापित टोल बैरियर राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध रूप से शुल्क वसूल रहे हैं।
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कई जिलों के टोल बैरियर पर अवैध वसूली का आरोप
याचिका में कहा गया कि हिमाचल सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर निम्न स्थानों पर अवैध रूप से टोल शुल्क लिया जा रहा है:
- गरामौरा (बिलासपुर)
- परवाणू (सोलन)
- तुनुहट्टी (चंबा)
- काला अंब (सिरमौर)
- कंडवाल (कांगड़ा)
- बद्दी (सोलन)
- मेहतपुर (ऊना)
इसके अलावा, बिलासपुर जिले में स्थित ग्वालथई/बरमाला टोल बैरियर, जो नंगल-भाखड़ा रोड पर है और BBMB द्वारा मेंटेन किया जाता है, पर भी राज्य सरकार द्वारा कथित रूप से अवैध टोल वसूली की जा रही है।
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हिमाचल प्रदेश टोल्स एक्ट, 1975 के तहत अधिकार न होने का दावा
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि राज्य सरकार ने इन टोल प्लाजा को हिमाचल प्रदेश टोल्स एक्ट, 1975 के तहत स्थापित किया है। लेकिन इस अधिनियम के तहत भी राज्य सरकार के पास राष्ट्रीय राजमार्गों पर शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि राज्य सरकार को इस अवैध वसूली को तुरंत रोकने का निर्देश दिया जाए।
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