सुरक्षा की दृष्टिकोण से यह तकनीक बेहद जरूरी है। यह लेन बदलते समय होने वाली टक्करों को 14 प्रतिशत तक घटाता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बीएसडी वाली कारों में चोट वाली दुर्घटनाएं अन्य कारों की अपेक्षा 23 प्रतिशत कम होती है। साथ ही ड्राइवर को तनाव मुक्ति ड्राइविंग का अनुभव भी देती है। यह बड़े ब्लाइंड स्पॉट वाले वाहनों में बेहद उपयोगी साबित हुई है।
इस प्रकार काम करता है बीएसडी सिस्टम
ये रडार, कैमर सेंसर रियर बंपर या साइड मिरर में लगे होते हैं, जो तीन से 10 मीटर की रेंज वाले वाहनों को पहचानते हैं। अगर कोई वाहन ब्लाइंड स्पॉट में आता है तो सिस्टम ईसीयू (इंजन कंट्रोल यूनिट) को सिग्नल भेजता है, फिर ईसीयू विजुअल या ऑडियो अलर्ट ट्रिगर करता है। कुछ एडवांस्ड कारों में ब्लाइंड स्पॉट असिस्ट (बीएसए) होता है जो खुद ब्रेक या स्टीयरिंग एडजस्ट करता है।
किन गाड़ियों में मिलता है यह फीचर?
भारत में 2025 तक 100 से अधिक कारें बीएसडी से लैस हैं। जैसे एंट्री लेवल कारों में टाटा नेक्सॉन, टाटा अल्ट्रोज , मिड रेंज एसयूवी में ह्ययूंडई क्रेटा, महिंद्रा एक्सयूवी 700, किआ सल्टोस, एमजी हेक्टर आदि में। लक्जरी सेगमेंट की बात करें तो लैंड रोवर डिफेंडर, ऑडी बीएम डब्ल्यू में यह फीचर मिलता है। वहीं, बीएसडी का असली हीरो रडार सेंसर माना जाता है।
ये होता है रडार सेंसर
रडार रेडियो डिटेक्शन या रैंगिंग तकनीक माइक्रोवेव या मिलिमीटर वेव्स (24गीगाहर्ट्ज़ या 77गीगाहर्ट्ज़) भेजती है। यह तरंगें ऑब्जेक्ट से टकराकर लौटती हैं और सिस्टम दूरी, स्पीड और दिशा माप लेती है। इनकी फायदों की बात करें तो ये बारिश और कोहरे में भी असरदार होती है। क्रैश अवॉइडेंस और पार्किंग मे मददगार है। ह्यूंडई क्रेटा, टाटा हैरियर, महिंद्रा एक्सयूवी 700, किआ ईवी6 जैसी कारों में यह सेंसर मौजूद है। 2025 में भारत में 50 से अधिक मॉडल्स में रडार सेंसर स्टैंडर्ड फीचर है।