भारी उद्योग मंत्रालय ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 500 करोड़ रुपये की सब्सिडी परिव्यय पर हितधारकों के साथ परामर्श शुरू किया और इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने में तेजी लाने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए। गुरुवार को हुई पहली बैठक में, अधिकारियों ने ई-ट्रकों में तेजी से और सुचारू बदलाव के लिए ट्रक निर्माताओं, खरीदारों और बैंकों को एक साथ आने की जरूरत पर जोर दिया।
बैठक में भारतीय बंदरगाह संघ, अशोक लीलैंड, टाटा मोटर्स, बिलियनई मोबिलिटी, ओलेक्ट्रा, अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्विच लैब्स, मुरुगप्पा समूह, वोल्वो आयशर, महिंद्रा ट्रक्स के प्रतिनिधियों के अलावा SIAM (एसआईएएम) और ICCT (आईसीसीटी) जैसे उद्योग संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
ई-ट्रकों पर परामर्श के दौरान भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिजवी ने इस बात पर रोशनी डाली कि यह बैठक ई-ट्रकों पर अपनी तरह की पहली सरकारी पहल है।
Electric Truck
- फोटो : Freepik
रिजवी ने कहा, "ई-ट्रक चरण अभी शुरू हुआ है और भारत वैश्विक स्तर पर ई-ट्रकों का निर्माण करने वाले 5-6 देशों में से एक है।"
उन्होंने यह भी कहा कि 2070 तक नेट जीरो के लिए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप, निर्माताओं, खरीदारों और बैंकरों को एक साथ मिलकर तेज और सुचारू बदलाव सुनिश्चित करना चाहिए।
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भारी उद्योग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने ई-ट्रकों के लिए प्रोत्साहन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर रोशनी डाली कि 18 प्रतिशत प्रदूषण भारी परिवहन क्षेत्र के कारण होता है, जिससे ई-ट्रक स्वच्छ परिवहन नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण बन जाते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि बैठक का मकसद ई-ट्रक सप्लाई इकोसिस्टम को मजबूत करने और सतत गतिशीलता को आगे बढ़ाने के लिए ओईएम (मूल उपकरण निर्माताओं) और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं के साथ परामर्श करना था।
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शिपर्स, लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर्स और उद्योग जगत के नेताओं के साथ परामर्श के जरिए ई-ट्रकों की मांग का पता लगाने के लिए विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि चर्चा स्वच्छ भविष्य के लिए टिकाऊ परिवहन समाधानों पर केंद्रित थी।
पीएम ई-ड्राइव योजना देश में ई-ट्रकों की तैनाती को बढ़ावा देगी।