क्या यह देश का पहला बैरियरलेस टोल है?
नहीं। बसताड़ा टोल प्लाजा देश का चौथा बैरियरलेस टोल बूथ बन गया है।
यहां:
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ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
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टोल की कटौती पूरी तरह स्वचालित होगी।
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किसी भी तरह के मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
आखिर क्या है MLFF टोलिंग सिस्टम?
MLFF यानी मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्रणाली मौजूदा 'रुको और भुगतान करो' व्यवस्था की जगह लेगा।
इस तकनीक की प्रमुख विशेषताएं:
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वाहन को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं।
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टोल कटौती पूरी तरह तकनीक आधारित होगी।
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FASTag (फास्टैग) और नंबर प्लेट पहचान प्रणाली मिलकर काम करेगी।
यह व्यवस्था:
तकनीकों के संयोजन पर आधारित है।
इस नई व्यवस्था के पीछे कौन-सी तकनीक काम करेगी?
बैरियरलेस टोल सिस्टम को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए हर एंट्री पॉइंट पर अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं।
इनमें शामिल हैं:
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RFID रीडर और एंटेना
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नंबर प्लेट पहचान के लिए ANPR कैमरे
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LIDAR (लिडार) आधारित वाहन पहचान प्रणाली
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RADAR (रडार) आधारित डिटेक्शन सिस्टम
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निगरानी कैमरे
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इन्फ्रारेड इल्यूमिनेशन सिस्टम
इन तकनीकों की मदद से वाहन की पहचान और टोल कटौती स्वतः हो सकेगी।
टोल भुगतान कैसे होगा?
नई प्रणाली में:
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फास्टैग के जरिए टोल राशि खुद-ब-खुद कटेगी।
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यदि फास्टैग से भुगतान नहीं हो पाता, तो वाहन की नंबर प्लेट के आधार पर ई-नोटिस जारी किया जाएगा।
72 घंटे के भीतर भुगतान क्यों जरूरी है?
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कारण से टोल भुगतान नहीं हो पाता, तो वाहन चालक को ई-नोटिस जारी होने के 72 घंटे के भीतर बकाया राशि का भुगतान करना होगा।
यदि 72 घंटे के भीतर भुगतान किया गया:
यदि 72 घंटे के बाद भुगतान किया गया:
कुछ लोगों के खाते से ज्यादा राशि क्यों कट सकती है?
NHAI के अनुसार, कुछ मामलों में बाद में अधिक राशि कटने का कारण यह नहीं है कि वाहन ने MLFF सड़क का उपयोग किया, बल्कि यह इसलिए होता है क्योंकि:
बैरियरलेस टोल व्यवस्था से क्या फायदा होगा?
नई प्रणाली लागू होने से कई बड़े फायदे होने की उम्मीद है:
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टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में कमी आएगी।
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यात्रा समय घटेगा।
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ईंधन की बचत होगी।
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ट्रैफिक जाम कम होगा।
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वाहन चालकों को बिना रुके सफर करने का अनुभव मिलेगा।
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हाईवे पर परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
हरियाणा के लिए यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?
NH-44 पर बसताड़ा में शुरू हुआ बैरियरलेस टोल सिस्टम हरियाणा के लिए अगली पीढ़ी के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में इसी तरह की तकनीक अन्य टोल प्लाजा पर भी लागू की जा सकती है। जिससे देश में टोल संग्रह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और बाधारहित बनने की दिशा में तेजी आएगी।