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MLFF: हरियाणा का पहला बैरियर-मुक्त टोल, NH-44 के बस्ताड़ा पर ट्रायल शुरू, जानें कैसे कटेगा बिना रुके टैक्स

Tue, 23 Jun 2026 05:18 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

NH-44 पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! हरियाणा के बस्तारा में राज्य के पहले 'बैरियर-मुक्त' (बिना बैरियर वाले) टोल सिस्टम का ट्रायल आज से शुरू हो गया है। अब आपको टोल टैक्स देने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित यह सिस्टम गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक लगाए बिना सीधे टैक्स काट लेगा।
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बसताड़ा टोल प्लाजा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हरियाणा ने आधुनिक हाईवे प्रबंधन की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए करनाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) (पानीपत-जालंधर हाईवे) पर स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा पर राज्य की पहली बैरियरलेस टोल प्रणाली शुरू कर दी है। इस नई व्यवस्था का ट्रायल मंगलवार, 23 जून से शुरू हो गया है।

नई प्रणाली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित है, जिसके तहत वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। वाहन बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकेंगे और टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा।

इस पहल का मकसद है:

  • ट्रैफिक जाम कम करना

  • यात्रा को अधिक सुगम बनाना

  • ईंधन की बर्बादी रोकना

  • पारंपरिक टोल प्लाजा प्रणाली से आगे बढ़ना

माना जा रहा है कि देश के सबसे व्यस्त हाईवे कॉरिडोर में से एक NH-44 पर यह व्यवस्था यात्रा अनुभव को पूरी तरह बदल सकती है।

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क्या यह देश का पहला बैरियरलेस टोल है?

नहीं। बसताड़ा टोल प्लाजा देश का चौथा बैरियरलेस टोल बूथ बन गया है।

यहां:

  • ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।

  • टोल की कटौती पूरी तरह स्वचालित होगी।

  • किसी भी तरह के मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

आखिर क्या है MLFF टोलिंग सिस्टम?

MLFF यानी मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्रणाली मौजूदा 'रुको और भुगतान करो' व्यवस्था की जगह लेगा।

इस तकनीक की प्रमुख विशेषताएं:

  • वाहन को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं।

  • टोल कटौती पूरी तरह तकनीक आधारित होगी।

  • FASTag (फास्टैग) और नंबर प्लेट पहचान प्रणाली मिलकर काम करेगी।

यह व्यवस्था:

  • रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID)

  • ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR)

तकनीकों के संयोजन पर आधारित है।

इस नई व्यवस्था के पीछे कौन-सी तकनीक काम करेगी?

बैरियरलेस टोल सिस्टम को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए हर एंट्री पॉइंट पर अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • RFID रीडर और एंटेना

  • नंबर प्लेट पहचान के लिए ANPR कैमरे

  • LIDAR (लिडार) आधारित वाहन पहचान प्रणाली

  • RADAR (रडार) आधारित डिटेक्शन सिस्टम

  • निगरानी कैमरे

  • इन्फ्रारेड इल्यूमिनेशन सिस्टम

इन तकनीकों की मदद से वाहन की पहचान और टोल कटौती स्वतः हो सकेगी।

टोल भुगतान कैसे होगा?

नई प्रणाली में:

  • फास्टैग के जरिए टोल राशि खुद-ब-खुद कटेगी।

  • यदि फास्टैग से भुगतान नहीं हो पाता, तो वाहन की नंबर प्लेट के आधार पर ई-नोटिस जारी किया जाएगा।

72 घंटे के भीतर भुगतान क्यों जरूरी है?

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कारण से टोल भुगतान नहीं हो पाता, तो वाहन चालक को ई-नोटिस जारी होने के 72 घंटे के भीतर बकाया राशि का भुगतान करना होगा।

यदि 72 घंटे के भीतर भुगतान किया गया:

  • सामान्य टोल राशि देनी होगी।

  • यानी केवल एक गुना (1x) टोल।

यदि 72 घंटे के बाद भुगतान किया गया:

  • दोगुना शुल्क देना होगा।

  • यानी दो गुना (2x) टोल देना पड़ेगा।

कुछ लोगों के खाते से ज्यादा राशि क्यों कट सकती है?

NHAI के अनुसार, कुछ मामलों में बाद में अधिक राशि कटने का कारण यह नहीं है कि वाहन ने MLFF सड़क का उपयोग किया, बल्कि यह इसलिए होता है क्योंकि:

  • निर्धारित समय सीमा में बकाया टोल का भुगतान नहीं किया गया।

  • 72 घंटे की समयसीमा समाप्त होने के बाद दोगुना शुल्क लागू हो जाता है।

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बैरियरलेस टोल व्यवस्था से क्या फायदा होगा?

नई प्रणाली लागू होने से कई बड़े फायदे होने की उम्मीद है:

  • टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में कमी आएगी।

  • यात्रा समय घटेगा।

  • ईंधन की बचत होगी।

  • ट्रैफिक जाम कम होगा।

  • वाहन चालकों को बिना रुके सफर करने का अनुभव मिलेगा।

  • हाईवे पर परिचालन दक्षता में सुधार होगा।

हरियाणा के लिए यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?

NH-44 पर बसताड़ा में शुरू हुआ बैरियरलेस टोल सिस्टम हरियाणा के लिए अगली पीढ़ी के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में इसी तरह की तकनीक अन्य टोल प्लाजा पर भी लागू की जा सकती है। जिससे देश में टोल संग्रह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और बाधारहित बनने की दिशा में तेजी आएगी। 

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