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Auto Sales: भारत में कारों की मांग उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ रही है? जानें क्या है वजहें

Tue, 10 Mar 2026 06:13 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री मंदी के लिए तैयार थी। सितंबर में जीएसटी कटौती के बाद त्योहारों में जो तेजी आई थी, उसके कुछ ही महीनों में कम होने की उम्मीद थी। इसके बजाय, जनवरी और फरवरी ने अनुमानों को गलत साबित कर दिया।
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Car Showroom - फोटो : AI
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विस्तार
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भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग को उम्मीद थी कि त्योहारों के बाद बिक्री में तेजी धीरे-धीरे कम हो जाएगी। लेकिन वास्तविक स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। जनवरी और फरवरी के आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि कारों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है और कई सेगमेंट में तो तेजी और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स में राहत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार और आने वाले चुनाव जैसे कई कारक इस मांग को बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं।

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क्या वाहन रिटेल बिक्री ने उद्योग को चौंका दिया?
सरकार के VAHAN पोर्टल के अनुसार जनवरी में वाहन रजिस्ट्रेशन लगभग 7 प्रतिशत बढ़े।

फरवरी में यह वृद्धि और ज्यादा तेज रही और लगभग 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो इस महीने के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।

यह वृद्धि उस समय हुई जब विश्लेषकों को उम्मीद थी कि पैसेंजर व्हीकल बिक्री लगभग 10 से 15 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।

मजबूत मांग को देखते हुए वाहन निर्माता कंपनियां उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में जुट गई हैं।

क्या GST कटौती ने ऑटो सेक्टर को नई रफ्तार दी?
ऑटो उद्योग के लिए बड़ा मोड़ तब आया जब सितंबर में छोटे कारों पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई।

बड़ी कारों पर भी टैक्स में कमी की गई, जिससे कीमतों पर दबाव कम हुआ और ग्राहकों के लिए वाहन खरीदना आसान हो गया।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के अध्यक्ष सी. एस. विग्नेश्वर के अनुसार, इस टैक्स राहत का असर केवल कुछ महीनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों तक उद्योग को फायदा पहुंचा सकता है।

क्या ग्रामीण भारत कार बिक्री को आगे बढ़ा रहा है?
वाहनों की मांग में एक खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा गैर-मेट्रो और ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहा है।

ग्रामीण बाजार में पैसेंजर वाहनों की बिक्री लगभग 14 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि शहरी बाजार में वृद्धि 3 प्रतिशत से कम रही है।

दोपहिया वाहनों में शहरी बाजार में लगभग 22 प्रतिशत और ग्रामीण बाजार में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी फसल और आयकर राहत जैसे कारकों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, जिससे वाहन खरीदने की क्षमता बढ़ी है।

क्या बढ़ती कीमतों से पहले वाहन खरीदने की प्रवृत्ति बढ़ी है?
ऑटो कंपनियों का मानना है कि कई खरीदार वाहन खरीदने का फैसला जल्दी ले रहे हैं ताकि भविष्य में संभावित कीमत बढ़ोतरी से बचा जा सके।

कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण वाहन कीमतों में धीरे-धीरे वृद्धि की संभावना बनी रहती है। इसलिए कुछ ग्राहक मौजूदा कीमतों पर ही वाहन खरीदना बेहतर समझ रहे हैं।

क्या बेहतर उपभोक्ता भावना और डिजिटल बिक्री का असर दिख रहा है?
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार जीएसटी कटौती के बाद शुरू हुई मजबूत रिटेल मांग फरवरी 2026 तक जारी रही है।

कंपनियां अब डिजिटल मार्केटिंग, डेटा-आधारित लीड मैनेजमेंट और बेहतर डीलर नेटवर्क के जरिए बिक्री बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं।

डीलरों के अनुसार ग्राहकों की पूछताछ बढ़ी है और मार्केटिंग गतिविधियों के कारण बिक्री में रूपांतरण दर भी बेहतर हुई है।

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क्या चुनावी माहौल भी वाहन बिक्री को प्रभावित कर सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनाव भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत दे सकते हैं।

असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों के दौरान अक्सर स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां और नकदी प्रवाह बढ़ जाते हैं।

इसका अप्रत्यक्ष असर वाहन खरीद पर भी पड़ सकता है और आने वाले महीनों में मांग को अतिरिक्त बढ़ावा मिल सकता है।

क्या ऑटो सेक्टर की मांग मजबूत बनी रहेगी?
मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था, टैक्स राहत और बेहतर उपभोक्ता भावना के चलते भारत में कारों की मांग फिलहाल मजबूत बनी हुई है।

अगर यह रुझान जारी रहता है, तो आने वाले वित्तीय वर्ष में भी ऑटो उद्योग को स्थिर वृद्धि देखने को मिल सकती है।

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