भारत सरकार ने मौजूदा इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति में बदलाव कर ज्यादा वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने की योजना का एलान किया। इसके कुछ महीनों बाद, अब सरकार आगामी संशोधित ईवी नीति पर मसौदा दिशानिर्देश जारी करने के लिए तैयार है। आने वाले कुछ महीनों में ईवी नीति को अंतिम रूप देने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय के हितधारकों के साथ बैठक करने की उम्मीद है। मार्च में, केंद्र सरकार ने कहा था कि वह मौजूदा ईवी नीति को संशोधित करेगी। जो विदेशी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को भारत में सुविधाएं स्थापित करने और स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल करने या न्यूनतम निवेश योजना का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इस कदम को टेस्ला जैसी वैश्विक ईवी दिग्गजों को भारतीय ईवी बाजार में एंट्री करने के लिए आकर्षित करने के रूप में देखा जा रहा है।
आगामी ईवी नीति इस साल 15 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा घोषित भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा देने की नई योजना (SPMEPCI)(एसपीएमईपीसीआई) के इर्द-गिर्द घूमेगी। यह उन निर्माताओं से आयातित इलेक्ट्रिक कारों पर टैक्स कटौती का प्रस्ताव करता है। जो पांच साल की अवधि में 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताते हैं। जिसमें देश में स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग प्लांट लगाने की योजना भी शामिल होनी चाहिए। वियतनाम की एक ईवी स्टार्टअप कंपनी विनफास्ट उन पहले विदेशी निर्माताओं में से एक थी, जिसने अपनी निवेश योजनाओं का एलान किया और तमिलनाडु में एक सुविधा स्थापित की। जो इस समय निर्माणाधीन है।
केंद्र सरकार ने इस साल अप्रैल में ईवी निर्माताओं के साथ पहली बैठक की थी। जिसमें टेस्ला के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया था। सरकार के अनुसार अगली बैठक जुलाई के आखिर से पहले होगी। केंद्र ईवी निर्माताओं से नई ईवी नीति के तहत लाभ का दावा करने के लिए आवेदन आमंत्रित करेगा। हालांकि, ऐसे निर्माताओं द्वारा किए गए पिछले निवेशों पर विचार नहीं किया जाएगा। विनफास्ट को भी यह बताया गया कि उसका पुराना वेंचर गिना नहीं जाएगा और उसे नए सिरे से आवेदन करना होगा। भारी उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "उन्होंने कहा कि अगर योजना लागू नहीं होती है तो वे उस स्थिति में और ज्यादा निवेश रोक देंगे।"
केंद्र सरकार द्वारा ईवी निर्माताओं के लिए 31 जुलाई या उसके बाद से नई ईवी नीति के तहत आवेदन करने के लिए प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। उनके पास अपने आवेदन दाखिल करने के लिए 120 दिन या उससे ज्यादा का समय होगा। जिनके अनुमोदन से पहले केंद्र द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा।
इस कदम को टेस्ला जैसी विदेशी कार निर्माताओं के लिए भारत में लॉन्च रणनीति पर पुनर्विचार करने के एक और अवसर के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका स्थित ईवी निर्माता पिछले कुछ वर्षों से भारतीय बाजार में एंट्री करने के लिए कम आयात शुल्क की पैरवी करने की कोशिश कर रही थी। कंपनी और केंद्र के बीच विभिन्न स्तरों पर मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत की गई है। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भी इस साल भारत आने और वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की अपनी मंशा का एलान किया था। हालांकि, उन्होंने आखिरी वक्त में बैठक टाल दी।
भारत में अग्रणी ईवी निर्माता टाटा मोटर्स ने पहले केंद्र सरकार से इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क कम नहीं करने और स्थानीय निर्माताओं के लिए समान अवसर देने का आग्रह किया था। इस समय, केंद्र भारत में आयातित इलेक्ट्रिक कारों पर 70 से 100 प्रतिशत आयात टैक्स लगाता है। नई ईवी नीति के तहत इन कार निर्माताओं द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया जाएगा। बशर्ते उनकी कीमत 35,000 डॉलर (लगभग 29 लाख रुपये) से ज्यादा न हो।