Electric Vehicle Charging Station
केन्द्र सरकार 2030 से देश में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की ही बिक्री होगी। सरकार इसके लिए रोडमैप तैयार कर रही है। इसके तहत पूरे देश में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जाएगा। सरकार की योजना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल पंपों पर इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वाइंट्स लगाए जाएं।
अप्रैल 2023 से योजना की शुरुआत
सरकार नीति आयोग, भारी उद्योग मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और बिजली मंत्रालय के सहयोग से ई-चार्जिंग स्टेशन नीति तैयार कर रही है। हालांकि शुरुआत में यह योजना ज्यादा प्रदूषित बड़े शहरों में ही लागू हो सकती है। नीति आयोग के प्रस्ताव में अप्रैल 2023 से तिपहिया वाहनों और अप्रैल 2025 से 150सीसी तक के दोपहिया वाहनों और अप्रैल 2026 से टैक्सियों को सड़कों से बाहर करने की योजना है। इनकी जगह सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों का परिचालन सुनिश्चित करेगी।
ऑटो कंपनियां कर रहीं विरोध
वहीं सरकार की इस योजना को लेकर ऑटो कंपनियों का कहना है कि देश में पहले चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए, जिसके बाद ई-वाहनों को प्रमोट किया जाए। सरकार इन कंपनियों के विरोध से निपटने के लिए पेट्रोल पंपों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने की योजना बना रही है। जब पूरे देश में चार्जिंग स्टेशंस का नेटवर्क तैयार हो जाएगा, उसके बाद इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट किया जाएगा।
60 हजार पेट्रोल पंप
फिलहाल देश में 60 हजार पेट्रोल पंप हैं और सरकार की योजना है कि इन सभी को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क में शामिल किया जाए। इसके अलावा कई प्राइवेट कंपनियां भी हैं, जो देश में गैस स्टेशंस चलाती हैं। सरकार इन गैस स्टेशनों पर भी चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क में लाने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
चीन को हराने की तैयारी
इसके अलावा सरकार चाहती है कि देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों को लागू करने से पहले बैटरियों मैन्यूफैक्चरिंग करने का बेस बनाना चाहती है। सरकार नहीं चाहती कि इस स्थिति का फायदा चीन को मिले। सरकार की रणनीति है कि जिस तरह से इलेक्ट्रॉनिक सामानों और मोबाइल फोन की भारत में देरी से एंट्री हुई, और इसका फायदा सीधे चीन को मिला।
गीगा स्केल सेल निर्माण पर छूट
इसके साथ ही सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने देश में गीगा स्केल सेल और बैटरी निर्माण की सुविधाओं पर जोर दिया है। आयोग ने इसके लिए एक कैबिनेट नोट भी तैयार किया है। जिसमें गीगा स्केल बैटरी बनाने पर कई प्रकार की छूट का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें निवेश को बढ़ाने के लिए आयकर में छूट और डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए कस्टम ड्यूटी के ढांचे में बदलाव की सिफारिश की गई है।