क्या है पूरा मामला और यह कैसे काम करता है?
रिपोर्ट के मुताबिक, क्रोम सबसे पहले आपके कंप्यूटर या लैपटॉप के हार्डवेयर की जांच करता है। अगर आपका सिस्टम इस भारी-भरकम एआई मॉडल को चलाने के लायक होता है, तो ब्राउजर अपने आप इसे डाउनलोड करना शुरू कर देता है।
हैरानी की बात यह है कि यूजर्स को इसकी भनक तक नहीं लगती। ज्यादातर लोगों को इसका पता तब चलता है जब उनके कंप्यूटर की स्टोरेज अचानक कम हो जाती है या इंटरनेट का डेटा तेजी से खत्म होने लगता है।
कैसे हुआ इस बात का खुलासा?
सिक्योरिटी रिसर्चर हैनफ ने इसे साबित करने के लिए मैक कंप्यूटर (मैकओएस) पर एक टेस्ट किया। उन्होंने क्रोम की एक नई प्रोफाइल बनाई और सिस्टम की एक्टिविटी पर नजर रखी। उन्होंने पाया कि क्रोम ने बिना कोई परमिशन मांगे OptGuideOnDeviceModel नाम का एक फोल्डर बनाया और मात्र 14 मिनट के अंदर 4GB की पूरी फाइल डाउनलोड कर ली।
इस 4GB की एआई फाइल का क्रोम क्या करता है?
यह फाइल क्रोम के 'ऑन-डिवाइस एआई फीचर्स' (जैसे- राइटिंग असिस्टेंट या स्मार्ट सर्च) के लिए है। इसका मतलब है कि क्रोम कुछ एआई काम इंटरनेट या क्लाउड पर भेजने के बजाय सीधे आपके कंप्यूटर पर ही करना चाहता है।
हालांकि, मजे की बात यह है कि क्रोम के ज्यादातर मुख्य एआई फीचर्स अभी भी सर्वर से ही चलते हैं। यानी हो सकता है कि यह 4GB की फाइल आपके सिस्टम में बेकार ही पड़ी हो और आप इसका इस्तेमाल भी न कर रहे हों।
आपके कंप्यूटर में कहां छिपी है यह फाइल?
अगर आप विंडोज 11 (Windows 11) का इस्तेमाल करते हैं तो यह भारी फाइल आपके सिस्टम में इस लोकेशन पर मिल सकती है:
- %LOCALAPPDATA%\Google\Chrome\User Data\OptGuideOnDeviceModel
अगर आपके लैपटॉप में स्टोरेज (हार्ड डिस्क/SSD) पहले से ही कम है तो 4GB की यह फाइल आपके सिस्टम को धीमा कर सकती है।
क्या इस फाइल को हमेशा के लिए डिलीट किया जा सकता है?
अगर आप सिर्फ इस फोल्डर को डिलीट करते हैं, तो समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। रिपोर्ट के अनुसार, क्रोम इसे बाद में फिर से डाउनलोड कर सकता है। इससे बचने के लिए आप यह तरीका अपना सकते हैं:
अपने क्रोम ब्राउजर में chrome://flags टाइप करके एंटर करें।
सर्च बार में 'optimization-related on-device AI' लिखकर सर्च करें।
इससे जुड़ी सेटिंग्स को Disable (बंद) कर दें।
(नोट: कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे पूरी तरह छुटकारा पाने का एकमात्र पक्का तरीका क्रोम को अनइंस्टॉल करना ही है।)
आम यूजर्स पर इसका क्या असर पड़ेगा?
आम यूजर्स के लिए इस गुपचुप डाउनलोडिंग के नतीजे काफी परेशानी भरे हो सकते हैं। सबसे बड़ी समस्या डेटा की बर्बादी की है। अगर दुनिया भर के करोड़ों यूजर्स के सिस्टम में यह 4GB की फाइल अपने आप इंस्टॉल होती है तो ग्लोबल लेवल पर इंटरनेट डेटा का खर्च कल्पना से परे होगा। इसका सीधा असर यूजर की जेब और डिवाइस की परफॉर्मेंस पर भी पड़ता है।
क्योंकि इतनी भारी फाइल बैकग्राउंड में डाउनलोड होने से न सिर्फ लैपटॉप की बैटरी जल्दी खत्म होती है, बल्कि बिजली की खपत भी बढ़ जाती है, जो पर्यावरण के लिहाज से भी चिंताजनक है। खासकर उन यूजर्स के लिए यह एक बड़ा झटका है जो सीमित या डेली डेटा पैक (जैसे 1.5GB या 2GB) का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि बिना किसी चेतावनी के होने वाला यह डाउनलोड उनका पूरा दिन का कोटा पल भर में खत्म कर सकता है।
गूगल का क्या कहना है?
फिलहाल, गूगल की तरफ से इस बड़े दावे पर कोई आधिकारिक या विस्तार से जवाब नहीं आया है। इस चुप्पी की वजह से यूजर्स और टेक एक्सपर्ट्स की चिंताएं और बढ़ गई हैं।