India-EU FTA: केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के अनुसार भारत-EU और भारत-अमेरिका एफटीए देश के लिए किसी गेम-चेंजर से कम नहीं हैं। इससे ऑटो कंपोनेंट और ईवी सेक्टर को वैश्विक बाजारों में सीधी पहुंच मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने इस समझौते को मदर ऑफ ऑल ट्रेड बताते हुए कहा कि इससे 27 यूरोपीय देशों के विशाल बाजार एक साथ खुलते हैं।
नई दिल्ली में आयोजित एसीएमए ऑटोमैकेनिका व्यापार मेले में केंद्रीय मंत्री ने भारतीय निर्माताओं को एक कड़ा और उत्साहजनक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर बाधाएं हटा दी हैं। अब आगे की जिम्मेदारी घरेलू कंपनियों की है कि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरें।
मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाले समझौते को एतिहासिक बताया। 27 देशों के इस विशाल समूह तक सीधी पहुंच को उन्होंने सभी समझौतों की मां करार (Mother of all FTA) दिया। उन्होंने कहा कि यूके, ऑस्ट्रेलिया और ओमान के साथ मौजूदा समझौतों को मिलाकर, भारत अब दुनिया के 65 प्रतिशत व्यापार बाजार तक अपनी पहुंच बना चुका है। 750 अरब डॉलर का यूरोपीय बाजार अब भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए खुला है।
ईवी सेगमेंट के लिए स्वर्ण युग
ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट के लिए ये समय स्वर्ण युग जैसा है। प्रसाद ने बताया कि हालिया बजट में दुर्लभ खनिजों और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट विनिर्माण के लिए 40 हजार करोड़ का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। इसका उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि ईवी और ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए भारत की सप्लाई चेन बाहरी झटकों से सुरक्षित रहे।
प्रसाद ने राजनीतिक स्थिरता को आर्थिक विकास का आधार बताया। उन्होंने कहा कि 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, सरकार न केवल स्थिर है बल्कि चुस्त भी है। उद्योग जगत की प्रतिक्रियाओं पर तुरंत कार्रवाई करना सरकार की प्राथमिकता है। ग्रामीण भारत का बढ़ता उपभोग भी वैश्विक कंपनियों के लिए भारत को एक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग हब बना रहा है। मंत्री ने उद्योग निकायों और व्यापार संगठनों से आग्रह किया कि वे सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने अपना काम पूरा कर लिया है, अब दुनिया को यह दिखाने का समय है कि मेक इन इंडिया क्या कर सकता है।