एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले वित्तीय वर्ष में हुई जबरदस्त रिकॉर्ड बिक्री की वजह से बाजार का आधार अब काफी बड़ा हो चुका है। यही वजह है कि ग्रोथ की रफ्तार काफी तेजी थी, जिस पर पर थोड़ा ब्रेक लगता दिखाई दे सकता है।
सभी सेगमेंट की अलग-अलग रिपोर्ट्स देखें...
आईसीआरए ने कर्मिशल वाहन सेगमेंट को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अपनी रिपोर्ट पेश की है, जो साफ इशारा करती है कि इस साल बसों का बोलबाला रहने वाला है
- बस सेगमेंट (Bus Segment): सार्वजनिक परिवहन और स्कूलों-दफ्तरों के खुलने से इस सेगमेंट में 7-9% की मजबूत सालाना ग्रोथ का अनुमान लगाया जा रहा है।
- लाइट कमर्शियल वाहन -ट्रक (LCV): छोटे और हल्के मालवाहक ट्रकों की श्रेणी में 6-8% की सालाना वृद्धि देखी जा सकती है।
- मीडियम और हेवी कमर्शियल वाहन - ट्रक (M&HCV): भारी-भरकम ट्रकों के इस बड़े सेगमेंट में सबसे कम यानी महज 1-3% की सालाना वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीद जताई गई है।
किन वजहों से बढ़ेगी मांग?
रिपोर्ट में बताया गया है कि लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहा निवेश, माल ढुलाई में सुधार और पुराने वाहनों की जगह नए वाहन खरीदने की बढ़ती मांग कमर्शियल वाहन बाजार को सपोर्ट करेगी। जिनके बारे में नीचे समझाया गया है...
- इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च: सरकार की ओर बुनियादी ढांचे (सड़क, पुल, हाईवे) के निर्माण पर किया जा रहा निरंतर निवेश।
- बेहतर फ्रेट मूवमेंट: देश के भीतर माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) की स्थिति में आया बड़ा सुधार।
- रिप्लेसमेंट डिमांड: पुराने हो चुके कमर्शियल वाहनों को बदलकर नए और आधुनिक वाहन खरीदने की ऑपरेटरों की जरूरत।
ये चुनौतियां भी रहेंगी सामने
हालांकि कुछ सकारात्मक पहलुओं के बाद भी एजेंसी ने आगाह किया है कि ईंधन यानी डीजल और पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतें और बाजार में फाइनेंसिंग संबंधी समस्याएं आ सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो यह पूरे सेक्टर के रास्ते में एक बड़ी रुकावट बनकर खड़ी होगी।
एक नजर मई 2026 के आंकड़े पर
अगर हम अभी की प्रदर्शन पर नजर डालते हैं, तो मई 2026 के जो आंकड़े देखने को मिल रहे हैं, वो बाजार की स्थिति का साफ दर्शा रहे हैं।
- थोक बिक्री : मई 2026 में कमर्शियल वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 13.5% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन अगर इसकी तुलना ठीक पिछले महीने (अप्रैल 2026) से की जाए, तो इसमें 1.1% की सीक्वेंशियल (मासिक) गिरावट आई है।
- रिटेल बिक्री: घरेलू सीवी (कमर्शियल वाहन) की रिटेल यानी खुदरा बिक्री में सालाना तौर पर 5.3% का इजाफा देखा गया, लेकिन मासिक आधार पर इसमें 18.3% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
शहरों को पछाड़कर आगे निकला ग्रामीण भारत
इस पूरी रिपोर्ट में और दिलचस्प बात सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, देश के बाहरी देश के शहरी क्षेत्रों या मेट्रो शहरों की तुलना में ग्रामीण बाजारों में कमर्शियल वाहनों की रिटेल बिक्री कहीं अधिक तेज रही है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इस बात का सीधा संकेत है कि अब बड़े महानगरों के बाहर यानी देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की मांग बहुत तेजी से पैर पसार रही है, जिसका फायदा हमें भविष्य में काफी ज्यादा हो सकता है।