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E20: फोर्ड की बड़ी चेतावनी! ई20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान, माइलेज कम होने के साथ वारंटी पर भी पड़ सकता है असर

Thu, 25 Jun 2026 07:48 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में E20 पेट्रोल को लेकर बहस अभी थमी नहीं है। इसी बीच फोर्ड इंडिया की ओर से एक ऐसा जवाब सामने आया है, जिसने पुराने वाहन मालिकों की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। कंपनी के कस्टमर केयर ने कथित तौर पर चेतावनी दी है कि अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन, जैसे E20, का इस्तेमाल इंजन और उत्सर्जन प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है। इतना ही नहीं, इससे वाहन की वारंटी की वैधता भी प्रभावित हो सकती है। यह प्रतिक्रिया एक इकोस्पोर्ट मालिक की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में भेजी गई थी और अब यह ऑनलाइन चर्चा का विषय बन गई है।

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Ford Ecosport - फोटो : Ford
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विस्तार
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भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मुहिम तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच वाहन चालकों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी कार निर्माता कंपनी फोर्ड इंडिया (Ford India) के कस्टमर केयर ने कथित तौर पर चेतावनी दी है कि अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन, जैसे कि E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) का इस्तेमाल करने से गाड़ी के इंजन या एमिशन (उत्सर्जन) सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है। इतना ही नहीं, यह कदम आपकी गाड़ी की वारंटी को भी अमान्य (कैंसल) कर सकता है।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक फोर्ड इकोस्पोर्ट (EcoSport) के मालिक ने कंपनी से इथेनॉल पेट्रोल के उपयोग को लेकर सवाल पूछा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक सत्यापित और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ईमेल जवाब ने पुरानी गाड़ियों के मालिकों के बीच एक नई बहस और चिंता को जन्म दे दिया है। हालांकि फोर्ड इंडिया ने अभी इस पर आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। उनसे संपर्क किया गया है और प्रतिक्रिया आने पर जानकारी अपडेट की जाएगी।

 
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E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

फोर्ड इंडिया ने अपने आधिकारिक जवाब में क्या कहा है?

कंपनी ने ग्राहक के सवाल का जवाब देते हुए इस नए ईंधन के व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं पर गंभीर बातें कही हैं:

  • इंजन और एमिशन को नुकसान: फोर्ड इंडिया ने साफ तौर पर कहा कि अधिक इथेनॉल वाले ईंधन (जैसे E20) हर गाड़ी के अनुकूल नहीं होते। इसके इस्तेमाल से इंजन या गाड़ी के साइलेंसर/उत्सर्जन सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

  • बढ़ जाएगा आपकी जेब का खर्च: कंपनी के मुताबिक, इस ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है, जिसका सीधा मतलब है कि आपकी ईंधन की खपत बढ़ जाएगी और गाड़ी चलाने का खर्च अधिक हो जाएगा।

  • वारंटी हो सकती है खत्म: सबसे बड़ा झटका पुरानी कारों के मालिकों के लिए है। फोर्ड ने साफ किया कि E20 ईंधन का उपयोग करने से वाहन की वारंटी की वैधता प्रभावित हो सकती है।

  • कंपनी की सलाह: फोर्ड ने कार मालिकों को सलाह दी है कि वे अपनी गाड़ी के परफॉर्मेंस पर पैनी नजर रखें। अगर गाड़ी चलाने में कोई भी असामान्य व्यवहार या दिक्कत महसूस होती है, तो तुरंत नजदीकी अधिकृत फोर्ड सर्विस सेंटर पर जाएं। 

पेट्रोल पंप - फोटो : संवाद

यह चेतावनी पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

यह पूरा विवाद और चेतावनी मुख्य रूप से उन गाड़ियों से जुड़ी है जो कुछ साल पुरानी हैं:

  • E10 के लिए बनी थीं पुरानी कारें: भारत में जब E20 ईंधन के मानक तय नहीं हुए थे, उससे पहले बेची गईं इकोस्पोर्ट और अन्य कारों को कम इथेनॉल मिश्रण यानी E10 पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन किया गया था। इसका मतलब है कि फोर्ड की यह चेतावनी उन पुरानी गाड़ियों के लिए है जो E20 को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई थीं।

  • बीमा दावा खारिज होने का डर: कार मालिकों की सबसे बड़ी चिंता केवल माइलेज घटने या गाड़ी के झटके लेने तक सीमित नहीं है। उन्हें सबसे बड़ा डर इस बात का है कि अगर भविष्य में इंजन या एमिशन से जुड़ी कोई खराबी आती है, तो क्या कंपनी इथेनॉल ईंधन का हवाला देकर उनके वारंटी क्लेम को खारिज कर देगी? 

Ethanol blending with Petrol - फोटो : AI

सरकार और वाहन निर्माताओं के दावों में यह विरोधाभास क्यों है?

यह ईमेल ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ समय पहले ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का पुरजोर बचाव किया था।

  • सरकार का पक्ष: सरकार का कहना है कि E20 ईंधन पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है और देश में इसके इस्तेमाल से इंजन खराब होने की कोई बड़ी शिकायतें सामने नहीं आई हैं।

  • ग्राहकों में असमंजस: फोर्ड के इस जवाब ने साबित कर दिया है कि उपभोक्ताओं के मन का डर अभी खत्म नहीं हुआ है। सरकार के भरोसे और कार बनाने वाली कंपनी की इस हिदायत के बीच फंसे पुराने वाहन मालिकों के लिए अब यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि वे अपनी गाड़ी में कौन सा पेट्रोल डलवाएं। 

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Ethanol blending with Petrol - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

इथेनॉल ब्लेंडिंग और इंजन की उम्र पर वैज्ञानिक रिसर्च क्या कहती है?

इस विषय पर दुनिया भर में कई प्रतिष्ठित शोध और वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं, जो फोर्ड की इस चिंता का समर्थन करते हैं:

  • एनर्जी पॉलिसी (Energy Policy) जर्नल: इस रिसर्च जर्नल के मुताबिक, हालांकि इथेनॉल ब्लेंडिंग से प्रदूषण कम होता है, लेकिन पुराने कंबशन इंजनों (ICE) पर इसका क्या असर होगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि इंजन में इस्तेमाल हुआ मटेरियल और उसका फ्यूल सिस्टम नए ईंधन को झेलने के अनुकूल है या नहीं।

  • SAE इंटरनेशनल (SAE International) के तकनीकी दस्तावेज: इस शोध में प्रमाणित किया गया है कि अधिक इथेनॉल वाले ईंधन से उन इंजनों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है जो इसके लिए नहीं बने हैं। यह ईंधन की पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचा सकता है, रबर के पार्ट्स को गला सकता है और इंजन के अंदर कंबशन (ईंधन जलने की प्रक्रिया) के व्यवहार को बदल सकता है।

  • नेचर एनर्जी (Nature Energy) रिसर्च जर्नल: इस रिव्यू में चेतावनी दी गई है कि इथेनॉल से मिलने वाले फायदे पूरी तरह से इंजन के कैलिब्रेशन पर निर्भर करते हैं। जब नीतियां बदलती हैं और ईंधन नया आता है, तो पुराने वाहनों की तकनीक और नए ईंधन के बीच एक 'बेमेल' पैदा होता है, जिससे शुरुआती बदलाव के दौर में दिक्कतें आनी तय हैं। 


    क्या किया जाए?

    वैज्ञानिक रिसर्च इथेनॉल के इस्तेमाल को पूरी तरह से खारिज नहीं करते। लेकिन वे लगातार एक ही तकनीकी चुनौती की ओर इशारा करती हैं। नए ईंधन मानकों और पुरानी गाड़ियों की इंजीनियरिंग के बीच का तालमेल न होना ही सबसे बड़ी समस्या है। 
     

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