Consumer Court On Force Motors Vehicle
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कर्नाटक की एक जिला उपभोक्ता आयोग ने वाहन निर्माता कंपनी फोर्स मोटर्स (Force Motors) और उसके अधिकृत डीलर के खिलाफ एक कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने गाड़ी के इंजन में अंदरूनी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पाए जाने के बाद कंपनी और डीलर को आदेश दिया है कि वे ग्राहक को या तो उसी ब्रांड की नई गाड़ी दें या फिर 15 लाख रुपये का रिफंड करें। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 10,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 रुपये चुकाने का भी निर्देश दिया गया है।
- फैसले की तारीख: 30 सितंबर 2026 को दिए गए इस आदेश में आयोग ने माना कि नई गाड़ी खरीदने के कुछ ही महीनों के भीतर उसमें गंभीर तकनीकी खराबी आ गई थी और कंपनी और डीलर इस बात को साबित करने में विफल रहे कि यह समस्या ड्राइवर की लापरवाही की वजह से हुई थी।
शिकायतकर्ता मुगुंडप्पा ने कंज्यूमर कोर्ट का रुख क्यों किया था?
मामले के अनुसार, पेशे से ड्राइवर मुगुंडप्पा ने 2 अप्रैल 2024 को अधिकृत डीलर 'अरिहंत मोटर्स' से Force Cityline पैसेंजर गाड़ी 15 लाख रुपये (इनवॉइस मूल्य) में खरीदी थी। उन्होंने इस कमर्शियल वाहन को लोन लेकर अपने परिवार का गुजारा चलाने के लिए खरीदा था।
- गाड़ी में कब और क्या खराबी आई?: गाड़ी पर दो साल की वारंटी थी, लेकिन खरीदने के महज दो महीने और लगभग 9,000 किलोमीटर चलने के बाद ही गाड़ी में इंजन ओवरहीटिंग और सीज होने की गंभीर समस्या सामने आने लगी।
- सर्विस सेंटर के चक्कर: उन्होंने 27 मई 2024 को डीलर के सर्विस सेंटर पर गाड़ी दिखाई और 5,200 रुपये का भुगतान किया। लेकिन 10 जून 2024 को समस्या फिर से उभर आई, जब कूलेंट सूख गया और गाड़ी का इंजन बीच सड़क पर दोबारा सीज हो गया। इसके बाद मुगुंडप्पा को गाड़ी टो करके सर्विस सेंटर ले जानी पड़ी।
- कंपनियों का तर्क: हालांकि, डीलर और निर्माता कंपनी ने मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट से इंकार करते हुए दावा किया कि ड्राइवर ने लो-कूलेंट वार्निंग को नजरअंदाज किया और गैर-सिफारिशी कूलेंट का इस्तेमाल किया, जिससे इंजन ओवरहीट हुआ। साथ ही उन्होंने कहा कि वारंटी के तहत गाड़ी की मरम्मत कर दी गई थी और वह डिलीवरी के लिए तैयार है।
उपभोक्ता आयोग की जांच और निष्कर्ष में क्या सामने आया?
अध्यक्ष संजीव वी कुलकर्णी और सदस्य एस एस कोड्रोलीमठ की बेंच ने दस्तावेजों और एक स्वतंत्र मैकेनिक की रिपोर्ट की गहराई से जांच की:
- विशेषज्ञ की गवाही: आयोग ने मैकेनिक और विशेषज्ञ साक्ष्यों के आधार पर माना कि शिकायतकर्ता ने यह साबित कर दिया है कि नई खरीदी गई गाड़ी में शुरुआत से ही अंदरूनी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट था। बेंच ने कहा कि ओपीएस (APs) अपना बचाव साबित करने में पूरी तरह असफल रहे हैं।
- सेवा में कमी: आयोग ने इस बात पर भी गौर किया कि 10 जून 2024 से गाड़ी डीलर के शोरूम पर ही खड़ी है और यह पूरी खराबी वारंटी पीरियड के दौरान ही सामने आई थी। बेंच ने इसे स्पष्ट रूप से 'सेवा में कमी' और इंजन के अहम हिस्सों में बड़ी खराबी माना है।
कोर्ट का अंतिम फैसला और निर्देश क्या हैं?
बेलगावी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपनी शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए अरिहंत मोटर्स और फोर्स मोटर्स को संयुक्त रूप से ये निर्देश दिए हैं:
- ग्राहक को उसी ब्रांड की नई गाड़ी बदली, या फिर...
- खरीद मूल्य 15 लाख रुपये वापस करें। जिस पर 2 अप्रैल 2024 से लेकर भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
- मानसिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा दें।
- मुकदमे के खर्च के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करें।
आयोग ने कंपनियों को इस आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों का समय दिया है।