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त्योहारी सीजन में ऑटो बिक्री में उछाल: बिक्री बढ़ने के बावजूद कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव क्यों है?

Fri, 09 Oct 2026 06:45 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग में त्योहारी सीजन से पहले मांग मजबूत बनी हुई है। GST में कटौती के बाद यात्री वाहनों, दोपहिया और कमर्शियल वाहनों की खुदरा बिक्री में तेजी ने कंपनियों के उत्पादन को समर्थन दिया है।
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Festive Season Auto Demand - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर मजबूत मांग और बिक्री के साथ त्योहारी सीजन में प्रवेश कर रहा है। जीएसटी (GST) दरों में कटौती के बाद पैसेंजर व्हीकल्स (PV), टू-व्हीलर्स (2W) और कमर्शियल व्हीकल्स (CV) की रिटेल मांग में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली है। जिससे वाहन उत्पादन को भी बड़ा सहारा मिला है।

 

क्या ऑटो कंपनियों का राजस्व बढ़ने की उम्मीद है?

कोटक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की सितंबर तिमाही में ऑटो निर्माताओं के राजस्व में मजबूत बढ़ोतरी की संभावना है:
  • वार्षिक राजस्व वृद्धि (YoY Revenue): कोटक के कवरेज के तहत आने वाली अधिकांश ऑटोमोबाइल कंपनियों के राजस्व में सालाना आधार पर लगभग 29 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।
  • राजस्व बढ़ने के कारण: वाहनों की उच्च बिक्री मात्रा, कीमतों में वृद्धि, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, जीएसटी कटौती के कारण बनी रिटेल गति और अनुकूल विदेशी मुद्रा ने राजस्व को बढ़ाने में मदद की है।

 

बिक्री बढ़ने के बावजूद कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव क्यों है?

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि "कच्चे माल की कीमतों में तेजी मजबूत टॉपलाइन ग्रोथ को धुंधला कर सकती है।"
  • कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी: स्टील, रबर और क्रूड (कच्चे तेल) से जुड़ी सामग्रियों की कीमतें बढ़ने के कारण ऑटो कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है।
  • मार्जिन में गिरावट: राजस्व में 29% की वृद्धि के बावजूद, कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में सालाना आधार पर लगभग 200 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आने का अनुमान है।
  • राहत के कारक: हालांकि कम डिस्काउंट, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और करेंसी मूवमेंट्स से कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन कमोडिटी की उच्च लागत के कारण ग्रॉस मार्जिन पर दबाव बना रहेगा।

 

टायर निर्माताओं पर कच्चे माल की कीमतों का कितना गंभीर असर पड़ेगा?

कच्चे माल की बढ़ी हुई कीमतों का सबसे गंभीर असर टायर इंडस्ट्री पर देखा जा रहा है:
  • रबर और क्रूड ऑयल की मार: रबर और क्रूड ऑयल की बढ़ी हुई कीमतों के कारण टायर कंपनियों का मुनाफा बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना है।
  • मार्जिन में भारी गिरावट: सितंबर तिमाही में प्रमुख घरेलू टायर निर्माताओं के राजस्व में 16 से 26 प्रतिशत की बढ़त के बावजूद, उनके ऑपरेटिंग मार्जिन में सालाना आधार पर 400 से 480 बेसिस पॉइंट्स तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।

 

क्या आगामी दिसंबर तिमाही (Q3FY27) में वाहन महंगे हो सकते हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे माल की कीमतों में तेजी का यह रुख तीसरी तिमाही (Q3FY27) में भी जारी रहने की संभावना है:
  • कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत: कोटक की रिपोर्ट में कहा गया है, "हमें उम्मीद है कि तीसरी तिमाही में कच्चे माल की हेडविंड्स जारी रहेंगी, जिनकी भरपाई कंपनियों द्वारा की जाने वाली मूल्य वृद्धि से होगी।"
  • त्योहारी सीजन पर असर: चूंकि दिसंबर तिमाही में मुख्य त्योहारी खरीदारी का सीजन शामिल होता है, ऐसे में कंपनियों द्वारा गाड़ियों की कीमतें बढ़ाए जाने से ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है।
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