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₹53.72 लाख की लग्जरी एसयूवी में ऑडियो समस्या पर ₹1.5 लाख मुआवजा: कार बदलने और रिफंड की मांग खारिज

Wed, 09 Sep 2026 11:56 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

53.72 लाख रुपये की एक नई लग्जरी एसयूवी में डिलीवरी के कुछ ही दिनों बाद ऑडियो सिस्टम की समस्या सामने आने के बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। जानें पूरा मामला।
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Luxury Car Audio System Defect - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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53.72 लाख रुपये की एक लग्जरी एसयूवी शोरूम से बाहर निकलते ही खराबी का शिकार हो गई। कार डिलीवरी के महज तीन दिनों के भीतर ही इसका ऑडियो सिस्टम काम करना बंद कर दिया। दिखने में छोटी लगने वाली स्पीकर की यह समस्या आगे चलकर कई वर्षों तक कानूनी लड़ाई में बदल गई। जिसमें कार को बदलने और पूरे पैसे रिफंड करने की मांग उठने लगी। पश्चिम बंगाल राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में आफ्टर-सेल्स सर्विस में कमी पाते हुए कार मालिक को 1.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। हालांकि कोर्ट ने पूरी गाड़ी बदलने या रिफंड देने की मांग को खारिज कर दिया है। 
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उपभोक्ता आयोग में यह शिकायत किसने और क्यों दर्ज कराई थी?

पश्चिम बंगाल राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के न्यायिक सदस्य राजेश गुहा राय और सदस्य शांतनु साहा की पीठ जेनियाक इनोवेशन इंडिया लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी ने अपने डायरेक्टर के निजी इस्तेमाल के लिए लेक्सस मोटर्स लिमिटेड और उसके वर्कशॉप से यह लग्जरी गाड़ी खरीदी थी। 
आयोग ने 3 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में कहा:
"प्रीमियम या लग्जरी वाहन खरीदने वाले ग्राहक को बेहतर तकनीकी जांच, स्पष्ट संवाद और वारंटी के तहत प्रभावी सर्विस पाने का पूरा अधिकार है। स्वीकृत ऑडियो शिकायत का सही तकनीकी समाधान करने में विफल रहना सर्विस में गंभीर कमी को दर्शाता है।"
यह वाहन 31 मार्च 2019 को खरीदा गया था और 5 अगस्त 2019 को इसकी डिलीवरी हुई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, गाड़ी का अगला दरवाजा ठीक से बंद नहीं हो रहा था और ऑडियो सिस्टम में समस्या तुरंत शुरू हो गई थी, जिसके बाद 8 अगस्त 2019 से ही ईमेल के जरिए शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी गई थीं।
 

शिकायतकर्ता और कार डीलरशिप के क्या तर्क थे?

  • शिकायतकर्ता के वकीलों का आरोप था कि बार-बार निरीक्षण और मरम्मत की कोशिशों के बाद भी ऑडियो की समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके चलते कंपनी ने गाड़ी बदलने या पूरा रिफंड देने की मांग की।
  • दूसरी ओर, डीलरशिप के वकील ने गाड़ी में किसी भी तरह के मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (निर्माण दोष) से साफ इनकार किया। लेकिन उन्होंने म्यूजिक सिस्टम की शिकायत को स्वीकार किया। डीलरशिप ने तर्क दिया कि वारंटी के तहत संबंधित पार्ट्स को मुफ्त में बदल दिया गया था। 26 नवंबर 2019 को जब ग्राहक ने गाड़ी वापस ली, तब भी फीडबैक में दर्ज किया गया कि आगे का बायां स्पीकर अलग तरह की आवाज कर रहा है। यही विवरण कोर्ट के फैसले का मुख्य आधार बना।

उपभोक्ता आयोग ने पूरी गाड़ी को डिफेक्टिव क्यों नहीं माना?

  • आयोग ने एक सिंगल कंपोनेंट (पार्ट) की खराबी और पूरी गाड़ी के मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट के बीच अंतर को स्पष्ट किया। कोर्ट ने माना कि ऑडियो सिस्टम में निश्चित रूप से खराबी थी, जिसे खुद डीलरशिप ने वारंटी के तहत बदला था।
  • हालांकि, शिकायतकर्ता ऐसा कोई स्वतंत्र ऑटोमोटिव इंजीनियर रिपोर्ट, डायग्नोस्टिक स्कैन या लैब एनालिसिस पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो सके कि पूरी गाड़ी में ही निर्माण दोष था। इसके अलावा, फ्रंट डोर में खराबी के दावे को साबित करने के लिए कोई जॉब कार्ड या फोटोग्राफ प्रस्तुत नहीं किया गया था।
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आयोग ने पीड़ित ग्राहक को क्या राहत राशि प्रदान की?

अधिकृत डीलर के खिलाफ शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आयोग ने गाड़ी बदलने और 8,21,809 रुपये के हर्जाने की मांग को खारिज कर दिया। इसके बजाय आयोग ने ये निर्देश दिए:
  • मुआवजा: आफ्टर-सेल्स सर्विस में लापरवाही के लिए 1,00,000 रुपये का मुआवजा।
  • कानूनी खर्च: केस लड़ने में हुए खर्च के रूप में 50,000 रुपये की अतिरिक्त राशि।
  • ऑडियो रिपेयर का एक और मौका: ग्राहक को अपने ऑडियो सिस्टम को एक अंतिम बार मुफ्त में जांच कराने और ठीक कराने का अवसर दिया गया है।
यह 1.5 लाख रुपये की राशि 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। तय समय में भुगतान न करने पर इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लागू होगा। 
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