उपभोक्ता आयोग में यह शिकायत किसने और क्यों दर्ज कराई थी?
पश्चिम बंगाल राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के न्यायिक सदस्य राजेश गुहा राय और सदस्य शांतनु साहा की पीठ जेनियाक इनोवेशन इंडिया लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी ने अपने डायरेक्टर के निजी इस्तेमाल के लिए लेक्सस मोटर्स लिमिटेड और उसके वर्कशॉप से यह लग्जरी गाड़ी खरीदी थी।
आयोग ने 3 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में कहा:
"प्रीमियम या लग्जरी वाहन खरीदने वाले ग्राहक को बेहतर तकनीकी जांच, स्पष्ट संवाद और वारंटी के तहत प्रभावी सर्विस पाने का पूरा अधिकार है। स्वीकृत ऑडियो शिकायत का सही तकनीकी समाधान करने में विफल रहना सर्विस में गंभीर कमी को दर्शाता है।"
यह वाहन 31 मार्च 2019 को खरीदा गया था और 5 अगस्त 2019 को इसकी डिलीवरी हुई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, गाड़ी का अगला दरवाजा ठीक से बंद नहीं हो रहा था और ऑडियो सिस्टम में समस्या तुरंत शुरू हो गई थी, जिसके बाद 8 अगस्त 2019 से ही ईमेल के जरिए शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी गई थीं।
आयोग ने पीड़ित ग्राहक को क्या राहत राशि प्रदान की?
अधिकृत डीलर के खिलाफ शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आयोग ने गाड़ी बदलने और 8,21,809 रुपये के हर्जाने की मांग को खारिज कर दिया। इसके बजाय आयोग ने ये निर्देश दिए:
- मुआवजा: आफ्टर-सेल्स सर्विस में लापरवाही के लिए 1,00,000 रुपये का मुआवजा।
- कानूनी खर्च: केस लड़ने में हुए खर्च के रूप में 50,000 रुपये की अतिरिक्त राशि।
- ऑडियो रिपेयर का एक और मौका: ग्राहक को अपने ऑडियो सिस्टम को एक अंतिम बार मुफ्त में जांच कराने और ठीक कराने का अवसर दिया गया है।
यह 1.5 लाख रुपये की राशि 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। तय समय में भुगतान न करने पर इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लागू होगा।