सरकार की ओर से शुरू किया गया वन टैग सिस्टम देखने में जितना साधारण है, असल में इसके काम करने का तरीका उतना ही स्मार्ट है। पहले बैंक बदलने का मतलब था, पुराना टैग कैंसिल करना, विंडस्क्रीन से स्टिकर उखाड़ना और नया टैग खरीदकर फिर से ऑनबोर्डिंग कराना, लेकिन अब तरीका बदल रहा है। वनटैग में आपका फिजिकल स्टिकर वही रहता है, सिर्फ उसके पीछे जुड़ा बैंक नेटवर्क बदल जाता है। आइए समझते हैं कि यह नई सुविधा आखिर कैसे काम करती है।
यूजर लेवल पर प्रोसेस: राजमार्ग एप से शुरुआत
यूजर के लिए बैंक स्विच करने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और बेहद आसान है:
- पात्रता की जांच : यूजर सबसे पहले एनएचएआई के राजमार्गयात्रा मोबाइल एप पर जाकर अपनी एलिजिबिलिटी चेक करता है।
- पहचान का सत्यापन: एप पर वाहन मालिक का वेरिफिकेशन किया जाता है।
- सहमति और नया बैंक चयन: यूजर अपनी औपचारिक सहमति दर्ज करता है और एप में दिए गए विकल्पों में से अपना पसंदीदा नया जारीकर्ता बैंक चुन लेता है।
डेटा में क्या बदलता है और क्या रहता है सेम?
- क्या बिल्कुल नहीं बदलता: आपके वाहन पर लगा फिजिकल फास्टैग स्टिकर, आपका टैग आईडी और आपका वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर पूरी तरह से वही रहता है।
- जो बैकएंड में बदलता है: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के एनईटीसी डेटाबेस में आपके उस टैग आईडी से लिंक जारीकर्ता बैंक का विवरण अपडेट कर दिया जाता है।
बैंकों के बीच काम का बंटवारा
- इसके बाद वनटैग स्विच की प्रक्रिया को पुराने और नए बैंक के बीच दो हिस्सों में बांटता है। इसमें पुराने बैंक का काम यूजर की पहचान वेरिफाई करना होता है। साथ ही पुराने अकाउंट के मामलों को बंद करना, जैसे कि फास्टैग वॉलेट में बचा हुआ बैलेंस ट्रांसफर या रिफंड करना, पेंडिंग रिफंड निपटाना और अनसेटल्ड ट्रांजेक्शन क्लियर करना।
- नए बैंक के काम की बात करें तो नए बैंक के पास यूजर की रिक्वेस्ट आते ही वह आगे की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी करता है। इसके बाद यूजर का फास्टैग्क अकाउंट नए बैंक के सिस्टम और वॉलेट से सीधे जुड़ जाता है।
बैकएंड टेक लेयर: NPCI की भूमिका क्या है?
इस पूरी स्विच प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) मुख्य टेक्नोलॉजी लेयर के रूप में काम करता है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया दोनों बैंकों को आपस में कनेक्ट करता है और व्यापक एनईटीसी ( नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन) सिस्टम में नए जारीकर्ता बैंक की डिटेल्स को रियल-टाइम में अपडेट कर देता है।
टोल प्लाजा पर कैसे काम करता है यह सिस्टम?
स्विच प्रोसेस के दौरान या पूरा होने के बाद जब आपकी गाड़ी टोल प्लाजा से गुजरती है...
- टोल प्लाजा के स्कैनर को कुछ भी अलग करने की जरूरत नहीं होती।
- स्कैनर हमेशा की तरह आपकी गाड़ी के टैग आईडी को रीड करता है।
- एनपीसीआई बैकएंड में अपडेटेड डेटा के आधार पर टोल का पैसा सीधे आपके नए बैंक अकाउंट या वॉलेट से काट लेता है।
- इस प्रक्रिया से रिप्लेसमेंट टैग एक्टिवेट होने तक टोल लेन में टैग रिजेक्ट होने का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है।