FASTag rules 2026: क्या आपका फास्टैग विंडस्क्रीन पर सही जगह लगा है? अगर नहीं, तो सावधान हो जाइए। 2026 के नए नियमों के अनुसार, छोटी सी गलती आपको दोगुना टोल भरने पर मजबूर कर सकती है। एनुअल पास की कीमतों में बदलाव से लेकर सड़क निर्माण के दौरान मिलने वाली 50% की छूट तक, नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) ने सफर के कायदे बदल दिए हैं। जानिए कैसे यूपीआई पेमेंट और राजमार्ग यात्रा एप आपके सफर को सस्ता और आसान बना सकते हैं।
फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी (RFID) तकनीक पर काम करता है। इसे वाहन के विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है और टोल प्लाजा से गुजरते ही पैसा अपने-आप बैंक अकाउंट या वॉलेट से कट जाता है। इससे लंबी कतारों से छुटकारा मिलता है, कैशलेस पेमेंट होता है और हर ट्रांजैक्शन का SMS अलर्ट मिलता है।
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1. सालाना पास अब महंगा
नेशनल हाइवे एथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 2026-27 के लिए फास्टैग एनुअल पास की कीमत बढ़ाकर 3,075 रुपये कर दी है। एक बार भुगतान करने पर 1 साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध बार-बार रिचार्ज की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सुविधा केवल नॉन-कमर्शियल वाहनों के लिए उपलब्ध है।
2. गलत फास्टैग लगाने पर डबल टोल
अगर फास्टैग ठीक से विंडस्क्रीन पर नहीं लगा है या स्कैन नहीं हो पाता, तो टोल प्लाजा पर दोगुना शुल्क देना पड़ सकता है। इसका मकसद टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम रोकना और सिस्टम का सही उपयोग सुनिश्चित करना है।
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3. रोड कंस्ट्रक्शन के दौरान राहत
जब हाईवे पर चौड़ीकरण या मरम्मत का काम चल रहा होता है, तब यात्रियों को राहत मिलती है। नियम के अनुसार कि टोल का केवल 50% शुल्क लिया जाता है।यह तब लागू होता है जब सड़क को 2 लेन से 4 या 6 लेन किया जा रहा हो।
4. फास्टैग नहीं? फिर भी डिजिटल पेमेंट विकल्प
अगर आपके वाहन में फास्टैग नहीं है या काम नहीं कर रहा तो कैश पेमेंट पर डबल टोल और यूपीआई पेमेंट पर 1.25 गुना टोल लगता है। यानी डिजिटल पेमेंट फिर भी सस्ता विकल्प है।
5. शिकायत और मदद के लिए सुविधा
अगर फास्टैग से जुड़ी कोई दिक्कत आती है तो आप 1033 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा राजमार्ग यात्रा एप से टोल प्लाजा की जानकारी, पेट्रोल पंप, अस्पताल, ईवी चार्जिंग स्टेशन और लाइव मौसम अपडेट ले सकते है।
क्यों जरूरी है ये अपडेट जानना?
फास्टैग अब अनिवार्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुका है।
छोटी गलती (जैसे गलत प्लेसमेंट) भी महंगी पड़ सकती है।
सरकार धीरे-धीरे कैशलेस टोल सिस्टम को और सख्त बना रही है।
आने वाले समय में फास्टैग से जुड़े और ऑटोमेशन बढ़ सकते हैं।