Auto industry record sales: भारत का ऑटो रिटेल सेक्टर वित्तीय वर्ष 26 में 2,96,71,064 करोड़ यूनिट्स की बिक्री के साथ रिकॉर्ड के काफी नजदीक पहुंच गया है। 13.30 प्रतिशत ग्रोथ के साथ यह पहली बार तीन करोड़ यूनिट्स को छूने की तैयारी में है, जिसमें दोपहिया, यात्री वाहन और ट्रैक्टर सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा।
फाडा के अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर ने इस वृद्धि को लैंडमार्क वर्ष बताया और कहा कि छह में से पांच वाहन श्रेणियों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही यह उद्योग तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
सेगमेंट में देखें कैसा रहा प्रदर्शन
- टू-व्हीलर्स: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार से 2.14 करोड़ से अधिक बाइक और स्कूटर बिके (13.40% ग्रोथ)।
- पैसेंजर व्हीकल: पहली बार 47 लाख यूनिट्स का आंकड़ा पार हुआ। माना जा रहा है कि लोगों की एसयूवी के प्रति बढ़ती पसंद की वजह से इसमें13% की बढ़ोतरी हुई।
- ट्रैक्टर: पहली बार 10 लाख का आंकड़ा पार कर 18.95% की सबसे तेज ग्रोथ दर्ज की।
- कमर्शियल वाहन: इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से पहली बार 10 लाख से अधिक ट्रक और बसें बिकीं।
GST 2.0: गेम चेंजर साबित हुआ नया टैक्स
सितंबर 2025 में लागू हुए जीएसटी 2.0 ने ऑटो बाजार की सूरत बदल दी। मास-सेगमेंट (सस्ती कारों और बाइक्स) पर टैक्स का बोझ कम होने से आम आदमी के लिए वाहन खरीदना आसान हो गया। यही वजह है कि मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में गाड़ियों की मांग में जबरदस्त तेजी आई।
गांव और शहर के बीच मिटती दूरियां
आंकड़े बताते हैं कि भारत की विकास गाथा अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। यात्री वाहनों के मामले में ग्रामीण मांग (17.12%) ने शहरी मांग (10.43%) को पीछे छोड़ दिया है। समग्र रूप से ग्रामीण रिटेल में 13.05% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा
थ्री-व्हीलर सेगमेंट में तो जबरदस्त रफ्तार रही, कुल बिक्री में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अब इलेक्ट्रिक वाहनों की है, जो पर्यावरण और बचत के प्रति बढ़ते रुझान को दर्शाती है।
तो क्या 3 करोड़ का सपना होगा पूरा?
फाडा के अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर का मानना है कि 3 करोड़ के आंकड़े तक अब बहुत आसानी से पहुंचा जा सकता है। अप्रैल 2026 के लिए भी डीलर्स का मूड काफी सकारात्मक है। हालांकि, निर्माण उपकरण एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा जहां 11.70% की गिरावट देखी गई।