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F1 India: क्या भारत में लौट सकती है फॉर्मूला 1? जानें क्या है रफ्तार का यह रोमांच और कब हुई थी इसकी शुरुआत

Wed, 04 Feb 2026 12:27 PM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Indian Grand Prix Comeback: फॉर्मूला 1 (F1) दुनिया की सबसे महंगी और अत्याधुनिक तकनीक से लैस कार रेसिंग सीरीज है। इस लेख में जानिए कि फॉर्मूला 1 की शुरुआत कब और कहां हुई, साथ ही इस प्रतिष्ठित रेसिंग चैंपियनशिप में किस तरह की कारों का इस्तेमाल किया जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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भारत में एक बार फिर फॉर्मूला 1 रेसिंग की वापसी की उम्मीद जगने लगी है। खेल मंत्रालय और YEIDA के बीच हालिया चर्चाओं ने 2013 के बाद से बंद पड़ी इंडियन ग्रां प्री को दोबारा शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। सरकार अब सर्किट के प्रबंधन के लिए किसी प्रोफेशनल कंपनी को जिम्मेदारी सौंपना चाहती है। 

क्या है फॉमूला 1?

फॉमूला 1 (F1) दुनिया की सबसे तेज, तकनीकी और सबसे प्रतिष्ठित कार रेसिंग चैंपियनशिप है। इसमें खासतौर पर बनाई गई रेसिंग कारें दौड़ती हैं, जो आम रोड कारों जैसी नहीं होतीं। ये कारें बहुत हल्की, बेहद तेज और हाई-टेक होती हैं। इन्हें खास रेस ट्रैक्स (सर्किट्स) पर चलाया जाता है।

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F1 बाकी रेसों से कैसे अलग है?
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F1 कारें किसी आम कार या अन्य रेसिंग कारोंजैसी नहीं होतीं। ये ओपन व्हील यानी जिसमें टायर बॉडी के बाहर होते हैं और सिंगल सीटर होती हैं। ये कारें हवा के दबाव का इस्तेमाल जमीन से चिपक कर रहने के लिए करती हैं। आज की F1 कारें 1.6-लीटर V6 टर्बो हाइब्रिड इंजन का उपयोग करती हैं, जो बिजली और ईंधन दोनों से चलती हैं।

 भारत में पहली बार और अंतिम बार कब हुई?

  • भारत में अब तक तीन बास एफ-1 रेस का आयोजन हो चुका है। पहली बार एफ1 रेस अक्तूबर 2011 में ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) में हुई थी।
  • आखिरी बार भी बीआईसी में ही 27 अक्तूबर 2013 को हुई थी। जिसके विजेता जर्मन ड्राइवर सेबेस्टियन वेट्टेल (Red Bull Racing) ने भारत में हुई तीनों रेस (2011, 2012, 2013) जीती थीं।

दोबारा आयोजन में इतनी देरी क्यों हुई?

दोबारा आयोजन न होने के पीछे कोई एक नहीं, बल्कि तीन कई कारण हैं। सबसे पहली वजह तो टैक्स विवाद है। दरअसल यूपी सरकार ने खेल के बजाय मनोरंज की श्रेणी में डाल दिया था, इससे आयोजकों पर भारी एंटरटेनमेंट टैक्स लगा। दूसरी वजह सीमा शुल्क है। विदेशी कारों और उपकरणों को भारत लाने-ले जाने पर कस्टम ड्यूटी को लेकर सरकार और आयोजकों (जेपी ग्रुप) के बीच गहरा विवाद हुआ। इसके अलावा वित्तीय संकट भी प्रमुख कारण है। इसके आयोजक जेपी ग्रुप वित्तीय कठिनाइयों में फंस गए और इसके बाद वे एफ-1 की भारी होस्टिंग फीस भरने में असमर्थ रहे। 

 F1 में कैसी कारों का इस्तेमाल होता है?

एफ-1 में इस्तेमाल होने वाली कारें कार्बन फाइबर से बनी होती हैं, जिनका वजन (ड्राइवर के साथ) महज 798 किलोग्राम के आसपास होता है। इनकी रफ्तार 0 से 100 km/h की रफ्तार सिर्फ 2.6 सेकंड में पकड़ लेती हैं और इनकी टॉप स्पीड 370 km/h से अधिक हो सकती है। इनमें कार्बन-सिरेमिक डिस्क ब्रेक होते हैं जो 1000°C से भी ज्यादा गर्म हो सकते हैं।


आपको बता दें कि एफ 1 दुनिया की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सलाना स्पोर्ट्स सीरीज है। 2025 के आंकड़ों की बात करें तो इसके दुनिया भर में करीब 827 मिलियन (करीब 83 करोड़) प्रशंसक हैं। हर रेस को औसतन 70-80 मिलियन लोग देखते हैं। इससे साल भर की कुल व्यूअरशिप 1.5 बिलियन से ज्यादा तक पहुंच जाती है।

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