प्रश्न- सरकार ने सभी कार कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ शिफ्ट करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। इस दिशा में मारुति क्या कर रही है?
उत्तर- हम सरकार के दिशा-निर्देशों को पूरी तरह मानते हैं। जहां तक इलेक्ट्रिक कार की बात है, तो हमने भी इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। हमारा पहला ई-वाहन वर्ष 2020 में आ जाएगा। आप इसके तकनीकी पहलू को देखिए, तो इसे बनाने के लिए मॉडल में पूरी तरह फेरबदल करना पड़ता है। वर्तमान में पेट्रोल या डीजल इंजन वाली कार का फ्रेम या चेसिस है, वह ई-वाहन से पूरी तरह अलग होती है। ई-वाहन में अलग तरह से बैलेसिंग देखी जाती है, क्योंकि उसका इंजन नहीं, बल्कि बैटरी सबसे ज्यादा भारी होती है। हम सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
प्रश्न- कुछ कंपनियों ने अपने ई-वाहन लांच कर दिए हैं या लांच करने वाले हैं। आपकी क्या योजना है?
उत्तर- हर कंपनी अपनी रणनीति के हिसाब से काम करती है। हमारा मानना है कि बाजार में ई-वाहन आने से पहले उसके लिए बुनियादी ढांचागत संरचना तैयार हो जाए। अभी आप देखिए कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता जैसे पुराने महानगरों में भी इसके लिए चार्जिंग स्टेशन नहीं बने हैं। इस दिशा में सरकार का प्रयास शुरू हुआ है पर अभी काफी काम होना बाकी है। हमने जो समय सीमा तय की है, उस वक्त तक इस दिशा में बहुत कुछ हो जाएगा।
प्रश्न- ई-वाहन में आपकी कौन सी कार आएगी? क्या ऑल्टो का भी ई संस्करण निकालेंगे?
उत्तर- कार के मॉडल के बारे में आपका जो सवाल है, उसका जवाब हम फिलहाल नहीं देंगे। यह हमारा ट्रेड सीक्रेट है। समय आने पर इस बारे में आपको विस्तृत जानकारी दी जाएगी। जहां तक ऑल्टो के ई-संस्करण के बारे में आपने पूछा है, तो हम ऐसा नहीं करेंगे। ऑल्टो कार को हमने 18 साल पहले 2.90 लाख रुपये में बाजार में उतारा था और आज इसकी कीमत बढ़ने की बजाय घटी ही है। अभी भी इसका बेस मॉडल 2.80 लाख में उपलब्ध है। इसे यदि ई कार के रूप में लांच करेंगे, तो इसकी कीमत दोगुनी हो जाएगी। इस कार के जो ग्राहक हैं, वे दोगुनी कीमत में इसे नहीं खरीदेंगे।
प्रश्न- तो क्या ऑल्टो अभी जैसी है, वैसी ही रहेगी?
उत्तर- वैसी क्यों रहेगी। हम इसे भी बेहतर बनाएंगे। आप देखिए, जब हमने इसे लांच किया था, तो इसका माइलेज 16.9 किलोमीटर प्रति लीटर था। अभी इसका माइलेज बढ़कर 24.7 किलोमीटर प्रति लीटर हो गया है। इसी तरह इसका कम्फर्ट लेवल भी बढ़ा है। इसके के10 मॉडल को हमने ऑटो गियर शिफ्ट ट्रांसमिशन तकनीक से लैस किया है, ताकि बिना माइलेज पर असर पड़े यह शहर के हैवी ट्रैफिक का मुकाबला कर सके। साथ ही, इसके ड्राइविंग सीट पर हमने एयर बैग लगाया है। आगे भी इसमें निरंतर सुधार होंगे।
प्रश्न- दो दशक पहले लोग कैरियर के बीच में कार खरीदते थे। अभी ज्यादातर युवा वर्ग कार खरीद रहे हैं। ऐसे ग्राहकों के बीच ऑल्टो कैसे फिट बैठेगी?
उत्तर- मैं आपको बताना चाहूंगा कि ऑल्टो की 25 फीसदी बिक्री वैसे युवाओं के बीच हो रही है, जो 30 वर्ष से कम उम्र के हैं। यही नहीं, हमारे 55 फीसदी ग्राहक ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी पहली कार के रूप में ऑल्टो खरीदा। यही नहीं, 20 फीसदी ग्राहक तो ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी दूसरी कार भी ऑल्टो ही खरीदी। हमारी ऑल्टो मध्य वर्ग की पसंदीदा फैमिली कार है। तभी तो यह एंट्री लेवल सेगमेंट में पिछले 14 वर्षों से नंबर वन पायदान पर है। एंट्री लेवल सेगमेंट में अन्य कंपनियां जितनी कारें मिलकर बेचती हैं, अकेले ऑल्टो कारों की बिक्री उससे ज्यादा है।
प्रश्न- आपने कुछ साल पहले नेक्सा की शुरुआत की थी, अब एरेना।
इसकेपीछे क्या रणनीति है?
उत्तर- आपको मैं कुछ साल पहले की बात बताना चाहूंगा। उस समय हमने देखा कि हम कुछ मामलों में औरों से पीछे चल रहे हैं, खासकर प्रीमियम वर्ग में। हमारे शोरूम 30-35 साल पुराने हैं, जबकि नए जमाने के प्रीमियम ग्राहकों को शोरूम में कुछ और चाहिए। इसलिए हमने नेक्सा की शुरुआत की। यह प्रयास बेहद सफल रहा और इसके जरिये हमने चालू वित्त वर्ष में ही तीन लाख से ज्यादा कारें बेची हैं। हमने पाया कि हमारे करीब 51 फीसदी ग्राहकों ने नेक्सा में आने से पहले मारुति की कार खरीदने केबारे में सोचा भी नहीं था, लेकिन वहां आकर जो अनुभव मिला, तो उसका असर उनके निर्णय पर पड़ा।
प्रश्न- एरेना में किन बातों पर फोकस कर रहे हैं?
उत्तर- हमारा अनुसंधान कहता है कि शहरी क्षेत्रों के 70 से 80 फीसदी ग्राहक और ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 60 फीसदी ग्राहक कार खरीदने से पहले इंटरनेट पर खूब रिसर्च करते हैं। उनमें से अधिकतर तो शोरूम आने से पहले कार केब्रांड, मॉडल, यहां तक कि रंग तक पसंद कर लेते हैं। वे जब शोरूम आते हैं, तो वैसा ही अनुभव और रोमांच चाहते हैं, जो डिजिटली मिला है। उसे ही साकार रूप देने के लिए हमने एरेना का डिजाइन किया है। इसमें कॉफी मशीन है, फैमिली लॉन्ज है, टच स्क्रीन वाली मशीन लगी है, ताकि उन्हें वर्चुअल प्लेटफॉर्म मिल सके। वे जिस डिजिटल माहौल से आ रहे हैं, वही माहौल शोरूम में भी मिले।