भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। जहां 2019-20 में नए वाहनों में ईवी का हिस्सा सिर्फ 0.71% था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 7.50% हो गया है। सरकार की योजनाओं, बढ़ते चार्जिंग स्टेशनों और लोगों में बढ़ती जागरूकता ने ईवी को भारत में लोकप्रिय बना दिया है। देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का सफर तेजी से आगे बढ़ रहा है, और सरकार ने अब ईवी मालिकों के लिए एक और अच्छी खबर साझा की है।
भारत में बहुत तेजी से फैल रहा ईवी नेटवर्क
वाहन पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि वाहन रजिस्ट्रेशन में ईवी का हिस्सा 2019-20 में 0.71% से बढ़कर 2024-25 में 7.50% हो गया है। इससे साफ है कि लोग अब सिर्फ पेट्रोल की बचत के लिए मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से स्मूद ड्राइव, कम खर्च और पर्यावरण के फायदे के लिए इसे चुन रहे हैं।
भारत में ईवी चार्जिंग कैसे हो रही है आसान?
पहले ईवी खरीदने वालों को कई बड़ी दिक्कतें होती थीं। जैसे चार्ज कहां करें, भारत में चार्जिंग का नेटवर्क और क्या ईवी से लंबी दूरी की यात्रा संभव है? अब सरकार और कंपनियों के प्रयासों की वजह से शहर, हाईवे और दूरदराज इलाकों में भी चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। मॉल, पेट्रोल पंप, पार्किंग और रिमोट लोकेशंस पर भी फास्ट-चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ रही है।
ईवी ग्रोथ के पीछे सरकार की बड़ी योजनाएं
1. PLI स्कीम- ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स (25,938 करोड़ रुपए)
सितंबर 2021 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य भारत में ईवी पार्ट्स और एडवांस्ड टेक कंपोनेंट्स का उत्पादन बढ़ाना है। इसमें 50% तक लोकल उत्पादन जरूरी है।
2. PLI स्कीम- ACC बैटरियां (18,100 करोड़ रुपए)
मई 2021 में मंजूर हुई इस योजना का लक्ष्य 50 GWh बैटरी उत्पादन क्षमता तैयार करना है। इससे आने वाले समय में बैटरियां सस्ती और आसानी से उपलब्ध होंगी।
3. पीएम ई-ड्राइव स्कीम (10,900 करोड़ रुपए)
2024 में शुरू हुई यह योजना 2028 तक चलेगी और इन वाहनों को बढ़ावा देती है:
- इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर
- इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर
- इलेक्ट्रिक बसें
- इलेक्ट्रिक ट्रक
- इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस
यह योजना चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करने और टेस्टिंग एजेंसियों को बेहतर बनाने पर भी ध्यान देती है। साथ ही, सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ा रही है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
ईवी मालिकों और खरीदारों के लिए फायदे
ईवी गाड़ियों के मालिकों को ज्यादा चार्जिंग स्टेशन की वजह से रेंज की टेंशन खत्म हो जाएगी। साथ ही घरेलू उत्पादन बढ़ने से ईवी पार्ट्स और बैटरी सस्ती होंगी। नई टेक्नोलॉजी से बेहतर सुरक्षा और फास्ट चार्जिंग मिल सकेगी। हर सेगमेंट में ज्यादा मॉडल स्कूटर, कार, ऑटो, ट्रक, बस उपलब्ध होंगे। आने वाले समय में ईवी उतने ही सामान्य हो जाएंगे, जितने आज पेट्रोल-डीजल वाले वाहन हैं।
भारत में ईवी ग्रोथ- साल-दर-साल बदलाव
- 2019-20: हिस्सा 0.71%- 1.74 लाख ईवी
- 2020-21: हिस्सा 0.82%- कोरोना महामारी के बावजूद बढ़ोतरी दर्ज
- 2021-22: 4.59 लाख ईवी- हिस्सा 2.49% (पहली बड़ी छलांग)
- 2022-23: 11.83 लाख ईवी- हिस्सा 5.30%
- 2023-24: 16.81 लाख ईवी- हिस्सा 6.82%, चार्जिंग नेटवर्क तेजी से बढ़ा
- 2024-25: 19.68 लाख ईवी- हिस्सा 7.50% (अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी)
इन आंकड़ों से साफ है कि लोग अब ईवी को खुले दिल से अपना रहे हैं और सरकारी नीतियां इस बदलाव को और तेज कर रही हैं। भारत तेजी से स्वच्छ और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रही है। अगर यही रफ्तार जारी रही, तो आने वाले कुछ वर्षों में ईवी पेट्रोल-डीजल वाहनों जितने आम हो जाएंगे।