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SBI Report: पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता होगी कम, 2030 तक ईवी बदल सकते हैं भारत की तस्वीर; रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Thu, 02 Jul 2026 12:58 PM IST
Jagriti टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

SBI Research Report: देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है और सरकार भी इसे लगातार बढ़ावा दे रही है। इसी बीच आई एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाला दावा किया है। आइए जानते हैं कि रिपोर्ट में क्या कहा गया है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? 
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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EV Adoption In India: भारत में लोग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन अपना रहे हैं। खास बात यह है कि अब इसका असर सिर्फ ऑटोमोबाइल सेक्टर तक सीमित नहीं है। एसबीआई की नई रिसर्च बताती है कि अगर 2030 तक देश में ईवी की हिस्सेदारी मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत  हो जाती है, तो भारत करीब एक लाख करोड़ रुपये का इंपोर्ट बिल बचा सकता है। रिपोर्ट में बढ़ते ईवी रजिस्ट्रेशन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी को इस बदलाव की अहम वजह बताया गया है।

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रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?

  • एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अगर अगले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार इसी तरह बनी हरती है, तो ऐसा मुमकिन है कि 2030 तक कुल वाहन बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच जाए। अगर ऐसा हुआ तो पेट्रोल और डीजल के आयात पर देश का खर्च काफी कम हो सकता है। रिपोर्ट का अनुमान है कि इससे करीब एक लाख करोड़ रुपये के इंपोर्ट बिल की बचत संभव है।
  • रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद ईंधन की कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लोगों की सोच में काफी बदलाव आया है। इसका असर ईवी बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।


ईवी रजिस्ट्रेशन में कितनी बढ़ोतरी हुई?
वर्ष 2025 में हर महीने औसतन ईवी रजिस्ट्रशन की संख्या करीब 1.3 लाख थी, लेकिन मार्च से जून 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 2.3 लाख प्रति माह पहुंच गया। यानी हर महीने लगभग एक लाख अतिरिक्त ईवी रजिस्टर हुए हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026 के अंत तक कुल EV रजिस्ट्रेशन 25 लाख के आंकड़े को पार कर सकते हैं।

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सिर्फ ईवी की निर्भरता भी बढ़ी
भारत में पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों (Pure EV) की हिस्सेदारी भी लगातार मजबूत हो रही है।

  • 2024 में कुल रजिस्ट्रेशन में इनकी हिस्सेदारी दो प्रतिशत से भी कम थी।
  • 2026 में अब यह बढ़कर 8 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
  • वहीं, कई राज्यों में तो शुद्ध ईवी हिस्सेदारी 10% से ज्यादा दर्ज की गई है।
  • इसका मतलब है कि ग्राहक अब हाइब्रिड के बजाय पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना रहे हैं और इसी ओर निर्भर हो रहे हैं।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ी चुनौती

  • हालांकि चार्जिंग अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल भारत में 29,151 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं। इसमें 
  • कुल चार्जिंग स्टेशनों का लगभग 35% हिस्सा कर्नाटक और महाराष्ट्र में है। ऐसे में एसबीआई का मानना है कि ईवी की सफलता काफी हद तक चार्जिंग नेटवर्क पर टिकी हुई है। ऐसे में चार्जिंग स्टेशन का विस्तार काफी जरुरी है।


दिल्ली सरकार की नई पॉलिसी में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी की भी सराहना की गई है। पॉलिसी में अगले चार वर्षों में 32 हजार नए चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने की योजना है। अगर इनके लाभों की बात करें तो यह इस प्रकार है...

  • इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर पहले तीन वर्षों तक कुल 60 हजार रुपये तक का इंसेंटिव मिलेाग।
  • इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पर 1.20 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी।
  • N1 कमर्शियल इलेक्ट्रिक ट्रक पर पहले वर्ष एक लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।
  • योग्य ईवी पर 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ होगी।


2030 तक ईवी बाजार कहां पहुंचेगा?

  • रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत में रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या 2.86 करोड़ है। 2030 तक यह आंकड़ा बढ़कर 4 करोड़ होने का अनुमान है। इनमें से करीब 80 लाख वाहन इलेक्ट्रिक हो सकते हैं, यानी कुल वाहनों का लगभग 20 प्रतिशत।
  • रिपोर्ट यह भी कहती है कि 2027 से 2030 के बीच सामान्य स्थिति की तुलना में 35 लाख अतिरिक्त पेट्रोल वाहनों की जगह ईवी सड़कों पर आ सकते हैं।
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