स्वास्थय के लिए खतरनाक?
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कार्बन फाइबर: हल्का, मजबूत लेकिन खतरनाक?
कार्बन फाइबर को अब तक उसकी ताकत और हल्केपन के लिए सराहा जाता रहा है। एल्यूमीनियम से हल्का और स्टील से मजबूत यह मैटेरियल एयरक्राफ्ट से लेकर रेसिंग कारों और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों में इसकी मांग इसलिए बढ़ी क्योंकि यह बैटरी के भारी वजन को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे रेंज और परफॉर्मेंस दोनों बेहतर होती है।
लेकिन अब इस कमाल के मैटेरियल पर सवाल उठ रहे हैं। वजह यह है कि जब इसे डिस्पोज किया जाता है, तो यह हवा में माइक्रोस्कोपिक फाइबर्स छोड़ता है जो मशीनों को डैमेज कर सकते हैं और इंसानों की त्वचा व सांस की नली को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
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लग्जरी कार कंपनियों की बढ़ेगी मुसीबत
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स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों के लिए खतरा
EU का मानना है कि इन सूक्ष्म फाइबर कणों की वजह से वर्कर्स की सेहत खतरे में पड़ सकती है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। यही वजह है कि EU पहली ऐसी इकाई बन सकती है जो ऑटोमोबाइल सेक्टर में कार्बन फाइबर को “हानिकारक” घोषित करे।
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इंडस्ट्री की बढ़ेगी चुनौती
अगर यह नियम लागू होता है, तो इसका सीधा असर जापान की दिग्गज कंपनियों, Toray Industries, Teijin और Mitsubishi Chemical पर पड़ेगा, जो पूरी दुनिया के कार्बन फाइबर बाजार का आधे से ज्यादा हिस्सा नियंत्रित करती हैं।
सुपरकार बनाने वाली कंपनी McLaren जैसी ऑटो ब्रांड्स, जो पूरी कार को कार्बन फाइबर से बनाती हैं, उन्हें अब अपने डिजाइन और मटेरियल स्ट्रैटजी पर दोबारा विचार करना पड़ेगा। 2029 तक EU के इस फैसले पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि इसका असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री पर इसका असर पड़ सकता है।